जल स्तर गिरने से बगलिहार का उत्पादन प्रभावित
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महज सप्ताह भर पहले लोकार्पित की गई 450 मेगावाट उत्पादन क्षमता की बगलिहार पनबिजली परियोजना-दो से वर्तमान में मुश्किल से एक-चौथाई उत्पादन हो पा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सात नवंबर 2015 को इसे देश को समर्पित किया था। हालात यह हैं कि परियोजना से वैकल्पिक दिन पर उत्पादन करने की नौबत आ गई है। बगलिहार-एक परियोजना की हालत भी कुछ ऐसी ही है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार सर्दी के मौसम में चिनाब दरिया के जल स्तर में भारी गिरावट की वजह से बगलिहार-दो परियोजना में उत्पादन 90 से 100 मेगावाट तक ही हो पा रहा है।
एक दिन छोड़ कर दूसरे दिन उत्पादन करने की नौबत भी आ चुकी है। सर्दी बढ़ने पर दरिया में जल स्तर में और कमी आ सकती है। इसका सीधा असर पनबिजली उत्पादन पर पड़ेगा।
पानी का सीमित प्रयोग कर सकते हैं दोनों देश
जम्मू-कश्मीर पावर डेवलपमेंट कारपोरेशन के अधिकारियों की माने तो बगलिहार-एक परियोजना की भी ऐसी ही हालत है। पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौते के तहत चिनाब दरिया पर बनी बगलिहार-एक और दो परियोजना रन द वाटर स्कीम पर आधारित है।
इस वजह से डैम में सीमित पानी का भंडारण ही होता है। सर्दियों में दरिया में जल स्तर कम होने पर बिजली उत्पादन में भारी गिरावट आ जाती है। अप्रैल महीने से उत्पादन में फिर से बढ़ोतरी होने लगती है।
भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौता 1960 के तहत सिंधु, झेलम और चिनाब दरिया के पानी का जम्मू-कश्मीर सीमित प्रयोग ही कर सकता है। इसी तरह रावी और सतलुज दरिया के पानी का पाकिस्तान सीमित प्रयोग कर सकता है।
चिनाब दरिया पर बनी पनबिजली परियोजनाओं को रन द वाटर स्कीम पर आधारित बनाया गया है। गर्मियों में दरिया में जल स्तर बेहतर होने से बिजली उत्पादन भी क्षमता के अनुसार रहता है, लेकिन सर्दियों में जल स्तर कम होने पर उत्पादन भी गिर जाता है।