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Jammu News: कारसेवक सुरिंदर शर्मा की आपबीती... डीएसपी के कहने पर लगाया जयकारा, 18 दिन जेल में रहे, फिर पहुंचे रामनगरी
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संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। अयोध्या में बन रहे भव्य राममंदिर के लिए कारसेवकों के बलिदान और संघर्ष की कहानी हर किसी को झकझोर देती है। 1990 के आंदोलन में बड़ी संख्या में जम्मू संभाग से भक्त रामनगरी पहुंचे थे। इसमें एक नाम बजरंग दल के प्रदेश अध्यक्ष रहे जानीपुर के सुरिंदर शर्मा (69) का है जो कारसेवा के लिए गए थे। वे कहते हैं कि उस वक्त 35 साल का था। रामकाज के लिए कुछ कर गुजरने की चाह थी।
अयोध्या में हुए गोलीकांड का पता कुछ लोगों को लग चुका था। इस कारण कई लोग नहीं जाने की बात कर रहे थे, लेकिन फैसला किया कि संघर्ष में डरना नहीं है। करीब 200 लोग ट्रेन में निकले। दो डिब्बे खचाखच भरे थे। रास्ते में यह तक पता नहीं था कि रोटी मिलेगी भी या नहीं। साथ में 15-16 साल के नौजवान भी थे। उनकी दिलेरी देखकर हौसला बढ़ गया। जब लुधियाना पहुंचे तो बाहर सेना के जवान खड़े थे। वे बोले-डिब्बा खोलो। उन्हें बोला कि जगह नहीं है। संगठन का आदेश था कि बिल्कुल बोलना नहीं है, कोई जयकारा नहीं लगाना। डिब्बे में कुछ लोगों के बीच हाथापाई भी हुई। बड़ी मुश्किल से जान छूटी। ट्रेन में हर जगह से कारसेवक चढ़ रहे थे। सहारनपुर पहुंचते ही पुलिस ने ट्रेन रोक दी।
डीएसपी ने बोला कि जय श्री राम। सब चुप रहे। ट्रेन तीन घंटे लेट कर दी। अधिकारी कहते रहे कि ट्रेन चलने नहीं देंगे, जब तक कारसेवक नीचे नहीं उतरते। फिर चेतावनी दी कि बल के प्रयोग से सभी लोगों को जबरदस्ती उतारेंगे। थोड़ी देर बाद आकर कहा- बोलिए जय श्री राम, तो एक नौजवान ने जयकारा लगा दिया। डीएसपी समझ गए कि सभी कारसेवक हैं। इस पर उन्हें कहा कि आपके साथ चलने के लिए तैयार हैं। इसी बीच कुछ लोगों ने गिरफ्तारियां दी। सहारनपुर जेल में 18 दिन तक बंद रहे। जब छूटे तो कुछ लोग अयोध्या गए। बाकी लौट आए। वहां खौफनाक मंजर था। सैकड़ों चप्पलें पड़ी थीं। सुनी गलियों के हाल कभी नहीं भूल सकते। लगभग 60 फीट दूर रामलला के दर्शन किए थे। दूसरे दिन लौट आए।
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सुरिंदर कहते हैं कि रामलला का मंदिर बनने का सपना हो गया है। खुशी हो रही है कि भगवान राम अपने महल में जा रहे हैं। यह सौभाग्य और गर्व की बात है। राम राज्य की कल्पना की शुरुआत हो गई है। चाहते हैं कि कोई दुखी न हो, सब सुखी रहे। गुलामी के चिह्नों को मिटाया जा रहा है। नई पीढ़ी के सामने इतिहास आ रहा है।
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जम्मू। अयोध्या में बन रहे भव्य राममंदिर के लिए कारसेवकों के बलिदान और संघर्ष की कहानी हर किसी को झकझोर देती है। 1990 के आंदोलन में बड़ी संख्या में जम्मू संभाग से भक्त रामनगरी पहुंचे थे। इसमें एक नाम बजरंग दल के प्रदेश अध्यक्ष रहे जानीपुर के सुरिंदर शर्मा (69) का है जो कारसेवा के लिए गए थे। वे कहते हैं कि उस वक्त 35 साल का था। रामकाज के लिए कुछ कर गुजरने की चाह थी।
अयोध्या में हुए गोलीकांड का पता कुछ लोगों को लग चुका था। इस कारण कई लोग नहीं जाने की बात कर रहे थे, लेकिन फैसला किया कि संघर्ष में डरना नहीं है। करीब 200 लोग ट्रेन में निकले। दो डिब्बे खचाखच भरे थे। रास्ते में यह तक पता नहीं था कि रोटी मिलेगी भी या नहीं। साथ में 15-16 साल के नौजवान भी थे। उनकी दिलेरी देखकर हौसला बढ़ गया। जब लुधियाना पहुंचे तो बाहर सेना के जवान खड़े थे। वे बोले-डिब्बा खोलो। उन्हें बोला कि जगह नहीं है। संगठन का आदेश था कि बिल्कुल बोलना नहीं है, कोई जयकारा नहीं लगाना। डिब्बे में कुछ लोगों के बीच हाथापाई भी हुई। बड़ी मुश्किल से जान छूटी। ट्रेन में हर जगह से कारसेवक चढ़ रहे थे। सहारनपुर पहुंचते ही पुलिस ने ट्रेन रोक दी।
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डीएसपी ने बोला कि जय श्री राम। सब चुप रहे। ट्रेन तीन घंटे लेट कर दी। अधिकारी कहते रहे कि ट्रेन चलने नहीं देंगे, जब तक कारसेवक नीचे नहीं उतरते। फिर चेतावनी दी कि बल के प्रयोग से सभी लोगों को जबरदस्ती उतारेंगे। थोड़ी देर बाद आकर कहा- बोलिए जय श्री राम, तो एक नौजवान ने जयकारा लगा दिया। डीएसपी समझ गए कि सभी कारसेवक हैं। इस पर उन्हें कहा कि आपके साथ चलने के लिए तैयार हैं। इसी बीच कुछ लोगों ने गिरफ्तारियां दी। सहारनपुर जेल में 18 दिन तक बंद रहे। जब छूटे तो कुछ लोग अयोध्या गए। बाकी लौट आए। वहां खौफनाक मंजर था। सैकड़ों चप्पलें पड़ी थीं। सुनी गलियों के हाल कभी नहीं भूल सकते। लगभग 60 फीट दूर रामलला के दर्शन किए थे। दूसरे दिन लौट आए।
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सुरिंदर कहते हैं कि रामलला का मंदिर बनने का सपना हो गया है। खुशी हो रही है कि भगवान राम अपने महल में जा रहे हैं। यह सौभाग्य और गर्व की बात है। राम राज्य की कल्पना की शुरुआत हो गई है। चाहते हैं कि कोई दुखी न हो, सब सुखी रहे। गुलामी के चिह्नों को मिटाया जा रहा है। नई पीढ़ी के सामने इतिहास आ रहा है।