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चीड़ की सूखी टहनियों से बनेंगे छाबड़ी-बिन्ना
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ड़ोगरा रूरल हॉट में महिलाओं को छाबड़ी व बिन्ना बनाने की जानकारी देते हुए वन विभाग के अधिकारी।
- फोटो : REASI
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पौनी। चीड़ के पेड़ों से गिरने वाली उनकी पतली टहनियों से डोगरा संस्कृति की पहचान छाबड़ी और बिन्ना बनाया जाएगा। काफी कम कीमत पर छाबड़ी और बिन्ना बनने से महिलाओं को रोजगार मिलेगा। वहीं, डोगरा संस्कृति को अन्य स्थानों पर पहुंचानेे में भी मदद मिलेगी।
वन विभाग ने खैरालेड़ में बनाए डोगरा हॉट में महिलाओं को छाबड़ी तथा बिन्ना बनाने के काम शुरू करवाया है। मौके पर पहुंची डिवीजनल वन अधिकारी ज्योत्सना सरकार ने महिलाओं से कहा कि चीड़ के पेड़ों से गिरने वाली टहनियों को नजरअंदाज कर दिया जाता है। आमतौर पर जंगल या सड़कों के किनारों पर लगे चीड़ के पेड़ों से यह पतली टहनियां गिरी हुई दिखाई देती हैं। विभाग ने इनका उपयोग करने के लिए छाबड़ी व बिन्ना बनाने का बीड़ा उठाया है।
उन्होंने कहा कि डोगरा हॉट में डोगरा संस्कृति को बढ़ावा देने का प्रयास जारी है, जहां डोगरा व्यंजनों के साथ संस्कृति को दिखाया गया है। श्री शिवखोड़ी धाम में आने वाले श्रद्धालु भी रुकते हैं, तो छाबड़ी-बिन्ना बनाकर उन्हें बेचा जा सकता है। इससे महिलाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
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अधिकारी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में इन चीजों की अच्छी खासी कीमतें हैं। जिसका फायदा ग्रामीण महिलाएं उठा सकती हैं। सरपंच नीलम शर्मा ने वन विभाग का धन्यवाद करते हुए स्थानीय महिलाओं को इसका लाभ उठाने को कहा। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वह इस सुनहरे अवसर को हाथ से नहीं जाने दें, और छाबड़ी-बिन्ना बनाने की तकनीक सीखें।
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वन विभाग ने खैरालेड़ में बनाए डोगरा हॉट में महिलाओं को छाबड़ी तथा बिन्ना बनाने के काम शुरू करवाया है। मौके पर पहुंची डिवीजनल वन अधिकारी ज्योत्सना सरकार ने महिलाओं से कहा कि चीड़ के पेड़ों से गिरने वाली टहनियों को नजरअंदाज कर दिया जाता है। आमतौर पर जंगल या सड़कों के किनारों पर लगे चीड़ के पेड़ों से यह पतली टहनियां गिरी हुई दिखाई देती हैं। विभाग ने इनका उपयोग करने के लिए छाबड़ी व बिन्ना बनाने का बीड़ा उठाया है।
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उन्होंने कहा कि डोगरा हॉट में डोगरा संस्कृति को बढ़ावा देने का प्रयास जारी है, जहां डोगरा व्यंजनों के साथ संस्कृति को दिखाया गया है। श्री शिवखोड़ी धाम में आने वाले श्रद्धालु भी रुकते हैं, तो छाबड़ी-बिन्ना बनाकर उन्हें बेचा जा सकता है। इससे महिलाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
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अधिकारी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में इन चीजों की अच्छी खासी कीमतें हैं। जिसका फायदा ग्रामीण महिलाएं उठा सकती हैं। सरपंच नीलम शर्मा ने वन विभाग का धन्यवाद करते हुए स्थानीय महिलाओं को इसका लाभ उठाने को कहा। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वह इस सुनहरे अवसर को हाथ से नहीं जाने दें, और छाबड़ी-बिन्ना बनाने की तकनीक सीखें।