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अटल सेतु की क्षमता जांचने का काम पूरा
ब्यूरो, अमर उजाला/कठुआ
Updated Wed, 23 Mar 2016 09:34 PM IST
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अटल सेतु
- फोटो : फाइल
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अटल सेतु की क्षमता जांचने की प्रक्रिया बुधवार को पूरी कर ली गई। एक अधिकारी ने बताया कि दोपहर तीन बजे से सेतु से ट्रकों को एक-एक कर हटाने का सिलसिला शुरू हो गया। शाम पांच बजे ट्रैपिक को भी अनुमति दे दी गई। उन्होंने बताया कि वीरवार को कुछ समय के लिए ट्रैफिक को रोककर पुल के लेवल की जांच की जाएगी। भार जांचने की प्रक्रिया में पुल पर पड़े असर की जांच की जाएगी। इसके बाद कंसलटेंट को रिपोर्ट के लिए सभी आंकड़े भेज दिए जाएंगे।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार अटल सेतु भार क्षमता की अपनी परीक्षा में पास हो गया है। इससे साफ है कि पुल से नौ सौ टन वजन के वाहन कभी भी गुजर सकते हैं, जिस पर मुहर रिपोर्ट के साथ ही लग जाएगी। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि हालांकि अटल सेतु के निर्माण के दौरान हर स्लैब को डालने के साथ ही टेस्टिंग प्रक्रिया को अंजाम दिया गया था। पुल को हैंडओवर करने की प्रक्रिया में भार क्षमता जांचने एक महत्वपूर्ण अंश है जिसे अब अंजाम दिया जा रहा है।
अटल सेतु से वसूला गया 13 लाख राजस्व
जम्मू कश्मीर के बसोहली, पंजाब के दुनेरा से लेकर हिमाचल तक के इलाकों को जोड़ने वाले अटल सेतु के जरिए राज्य सरकार की झोली में 13 लाख का राजस्व डाला जा चुका है। 25 दिसंबर 2015 को अटल सेतु से गुजरने वाले वाहनों को कर के दायरे में लाया गया था।
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आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार दिसंबर माह में एक्साइज विभाग ने पुल पर गुजरने वाले वाहनों से 88 हजार, जनवरी में सात लाख 76 हजार, फरवरी माह में चार लाख 66 हजार, मार्च में 2 लाख 51 हजार राजस्व कर के रूप में एकत्रित किया है। इसी के साथ इस साल टोल के जरिए राजस्व जुटाने वाला अटल सेतु दूसरा बड़ा टोल नाका बन गया है।
पिलर बेस पर कंक्रीट लेयर का हो रहा प्रयोग
अटल सेतु रंजीत सागर झील में समाने वाले रावी दरिया पर बना है। ऐसे में जलस्तर कम होने से पुल के निचले हिस्से में कंक्रीट की लेयर डाली जा रही है। सूत्रों की मानें तो निर्माण एजेंसी पुल को किसी भी तरह के नुकसान की आशंका को शून्य करना चाहती है।
एक अधिकारी ने बताया कि पुल की नींव के पास जलस्तर कम होने पर पानी की लहरे उठती हैं। इससे लगातार मिट्टी का कटाव होता है। मिट्टी के लगातार हो रहे कटाव से पुल को कोई नुकसान न हो इसे देखते हुए कंक्रीट लेयर डालकर नींव को और मजबूत करने का काम भी जारी है।
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सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार अटल सेतु भार क्षमता की अपनी परीक्षा में पास हो गया है। इससे साफ है कि पुल से नौ सौ टन वजन के वाहन कभी भी गुजर सकते हैं, जिस पर मुहर रिपोर्ट के साथ ही लग जाएगी। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि हालांकि अटल सेतु के निर्माण के दौरान हर स्लैब को डालने के साथ ही टेस्टिंग प्रक्रिया को अंजाम दिया गया था। पुल को हैंडओवर करने की प्रक्रिया में भार क्षमता जांचने एक महत्वपूर्ण अंश है जिसे अब अंजाम दिया जा रहा है।
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अटल सेतु से वसूला गया 13 लाख राजस्व
जम्मू कश्मीर के बसोहली, पंजाब के दुनेरा से लेकर हिमाचल तक के इलाकों को जोड़ने वाले अटल सेतु के जरिए राज्य सरकार की झोली में 13 लाख का राजस्व डाला जा चुका है। 25 दिसंबर 2015 को अटल सेतु से गुजरने वाले वाहनों को कर के दायरे में लाया गया था।
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आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार दिसंबर माह में एक्साइज विभाग ने पुल पर गुजरने वाले वाहनों से 88 हजार, जनवरी में सात लाख 76 हजार, फरवरी माह में चार लाख 66 हजार, मार्च में 2 लाख 51 हजार राजस्व कर के रूप में एकत्रित किया है। इसी के साथ इस साल टोल के जरिए राजस्व जुटाने वाला अटल सेतु दूसरा बड़ा टोल नाका बन गया है।
पिलर बेस पर कंक्रीट लेयर का हो रहा प्रयोग
अटल सेतु रंजीत सागर झील में समाने वाले रावी दरिया पर बना है। ऐसे में जलस्तर कम होने से पुल के निचले हिस्से में कंक्रीट की लेयर डाली जा रही है। सूत्रों की मानें तो निर्माण एजेंसी पुल को किसी भी तरह के नुकसान की आशंका को शून्य करना चाहती है।
एक अधिकारी ने बताया कि पुल की नींव के पास जलस्तर कम होने पर पानी की लहरे उठती हैं। इससे लगातार मिट्टी का कटाव होता है। मिट्टी के लगातार हो रहे कटाव से पुल को कोई नुकसान न हो इसे देखते हुए कंक्रीट लेयर डालकर नींव को और मजबूत करने का काम भी जारी है।