अपनी सीट छोड़ सुरक्षित ठिकाने की तलाश में उमर
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तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए नेशनल कांफ्रेंस ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को दो विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ाने का फैसला किया है। उमर अपने वर्तमान निर्वाचन क्षेत्र गांदरबल को छोड़कर बीरवाह (बड़गाम) और सोनवार (श्रीनगर) से चुनाव लड़ेंगे।
सोनवार में 2008 के चुनाव में उमर के पिता फारूक अब्दुल्ला विजयी हुए थे। बाद में उनके लोकसभा में पहुंचने पर इस सीट से नेशनल कांफ्रेंस के ही मोहम्मद यासीन शाह इस सीट से विधायक चुने गए। नेकां इस सीट को अपने लिए सबसे ज्यादा सुरक्षित मानती है।
यहां चौथे चरण में 14 दिसंबर को मतदान होना है। गांदरबल से इस बार उमर के स्थान पर शेख अशफाक जब्बार को मैदान में उतारा गया है। सनद रहे कि 1977 के बाद पहली बार गांदरबल से नेकां के टिकट पर कोई ऐसा उम्मीदवार मैदान में होगा जो अब्दुल्ला परिवार से नहीं है।
चाचा मुस्तफा कमाल भी हजरतबल से गुलमर्ग गए
2002 का चुनाव उमर यहां पीडीपी उम्मीदवार काजी मोहम्मद अफजल से 2870 वोटों से चुनाव हार चुके हैं। बीरवाह पर भी इस समय नेकां का कब्जा है। यहां तीसरे चरण में नौ दिसंबर को मतदान होगा।
उमर के अलावा उनके चाचा मुस्तफा कमाल ने भी अपना विधानसभा क्षेत्र बदला है। हजरतबल के वर्तमान विधायक मुस्तफा कमाल इस बार गुलमर्ग से चुनाव लड़ेंगे। नेशनल कांफ्रेंस के जनरल सेक्रेटरी अली मोहम्मद सागर ने 22 उम्मीदवारों की चौथी सूची जारी की।
सूची में एकमात्र महिला प्रत्याशी शक्ति बाला (छंब) को स्थान मिला है। इससे पहले पार्टी 62 उम्मीदवारों के नाम घोषित कर चुकी है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष उमर की अध्यक्षता में हुई संसदीय बोर्ड की मीटिंग के बाद जारी चौथी सूची में कश्मीर संभाग के 15 और जम्मू संभाग के सात उम्मीदवार शामिल हैं।
नेकां की चौथी सूची में केवल एक महिला प्रत्याशी
घोषित उम्मीदवारों में उमर अब्दुल्ला (बीरवाह और सोनवार), आगा सईद महमूद (पट्टन), अली मोहम्मद डार (चडूरा), गुलाम नबी रतनपुरी (पुलवामा), मोहम्मद सईद अखून (हजरतबल), पीर अफाक (जाडीबल), डॉ. महमूद बेग (अनंतनाग), शेख रफी (शोपियां)ृ, डॉ. मुस्तफा कमाल (गुलमर्ग), शेख अशफाक जब्बर (गांदरबल), मोहम्मद अशरफ गनई (सोपोर), कफील उर रहमान (करनाह), मोहम्मद अब्दुल्ला वानी (बांडीपुर), वली मोहम्मद (लैंगेट) का नाम है।
वहीं, मिर्जा अब्दुल रशीद (राजोरी), डॉ. रियाज भद्रवही (भद्रवाह), संसार चंद (चिनैनी), चौधरी सलाम दीन (इंदरवाल), सुरिंदर सिंह बंटी (गांधी नगर), शक्ति बाला (छंब) और डा. शमशाद शान (गुल अरनास) शामिल हैं। सूची को अंतिम रूप देने वाले संसदीय बोर्ड में उमर के अलावा अब्दुल रहीम राथर, अली मोहम्मद सागर, मियां अल्ताफ, मोहम्मद अकबर लोन, अजय सडोत्रा, नासिर असलम वानी और देवेंद्र सिंह राणा शामिल हैं।
तब मोदी पर उमर ने ली थी चुटकी
विधानसभा चुनाव में दो क्षेत्रों से चुनाव लड़ने का फैसला कर उमर अब्दुल्ला सवालों के घेरे में आ गये हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान नरेंद्र मोदी के दो सीटों से चुनाव लड़ने पर उमर ने मोदी को घेरा था। 20 मार्च को उमर ने कहा था कि यदि देश में इतनी ही मोदी लहर है तो मोदी एक ही लोकसभा क्षेत्र से चुनाव क्यों नहीं लड़ लेते।
उमर ने कहा था कि मोदी को हार का डर सता रहा है इसलिए उन्होंने दो क्षेत्रों से चुनाव लड़ने का फैसला किया है। अब दो सीटों से चुनाव लड़ने के फैसले के बाद उमर खुद ही घिरते नजर आ रहे हैं। माना जा रहा है कि गांदरबल से चुनाव जीतने को लेकर उमर पूरी तरह आश्वस्त नहीं थे।
ऐसे में वे कोई जोखिम नहीं लेना चाहते। गांदरबल विधानसभा क्षेत्र से 2002 में उमर अब्दुल्ला पीडीपी उम्मीदवार काजी मोहम्मद अफजल से 2870 वोटों से चुनाव हार चुके हैं।