अश्वगंधा-गिलोय से बनी दवा कोरोना से लड़ने में करेगी मदद, आईआईआईएम-सीएसआईआर ने तैयार की टैबलेट-पाउडर
कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच इस महामारी से लड़ने के लिए अश्वगंधा, गिलोय, मुलेठी और यस्टिमधु जैसी जड़ी-बूटियां मरीजों की मदद करेंगी। कोविड-19 के मरीजों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए काउंसिल ऑफ साइंटिफिक इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआईआर) व इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरग्रेटिव मेडिसन (आईआईआईएम) ने इन जड़ी-बूटियों से आयुष-64 टैबलेट और पाउडर तैयार किया है।
दावा है कि ये दवाएं कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए मददगार साबित होंगी। चूहों पर सफल परीक्षण के बाद अब इसके क्लीनिकल ट्रायल की अनुमति मांगी गई है। जम्मू स्थित आईआईआईएम व सीएसआईआर के विशेषज्ञों ने जीएमसी, जम्मू को इनके क्लीनिकल ट्रायल के लिए पत्र लिखा है।
इस दवा के क्लीनिकल ट्रायल के लिए देशभर में 25 अस्पतालों को चिह्नित किया गया है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भी इसकी तैयारी है। क्लीनिकल ट्रायल ऑफ आयुर्वेदिक फॉर्मुलेशन कोविड-19 के प्रभारी डॉ. दिलीप मोंडे का दावा है कि कोरोना से लड़ रहे मरीजों की इस दवा के प्रयोग से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी।
दवा के चूहों पर परीक्षण में सामने आया है कि इसके नियमित सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और यह कोरोना के मरीजों के लिए काफी कारगर है। इनका कोई दुष्प्रभाव नहीं है। केंद्र ने भी इसके क्लीनिकल ट्रायल को हरी झंडी दे दी है।
आयुर्वेद में अश्वगंधा जैसी जड़ी-बूटियों का प्रयोग विपरीत परिस्थितियों में किया गया है। बिना साइड इफेक्ट के इनमें भीतरी शक्ति बढ़ाने के अलावा रोगों से लड़ने के गुण हैं। दवा का अब क्लीनिकल ट्रायल शुरू हो रहा है। एलोपैथी दवाइयों के साथ भी इसका सेवन किया जा सकता है।- राम विश्वकर्मा, निदेशक, आईआईआईएम-सीएसआईआर