दहशत के 30 घंटे, 12 मौतें और आतंक का अंत
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अरनिया के पिंड कठार गांव में घुसे पाकिस्तानी आतंकियों के खात्मे के लिए चला आपरेशन 30 घंटे बाद शुक्रवार को दोपहर बाद समाप्त हुआ। इसमें तीन जवान और पांच नागरिकों समेत आठ हिंदुस्तानियों को जान गंवानी पड़ी।
सेना ने चार आतंकियों को तो मार गिराया, बाकी का अता-पता नहीं। ग्रामीणों ने दावा किया था कि आतंकियों की संख्या अठ से दस के बीच थी। सेना ने मौके से भारी मात्रा में गोला बारूद, चार एके-47 रायफल, एक पिस्टल, राकेट लांचर तथा हैंड ग्रेनेड बरामद किए हैं।
तीन रेडियो सेट और चाकलेट एवं खाद्य सामग्री भी मौके से मिला है। इसके साथ ही बंकर से 50 मीटर दूर आईईडी भी मिला। सेना के प्रवक्ता कर्नल मनीष मेहता ने बताया कि मुठभेड़ के बाद सेना ने पूरे इलाके को घेर रखा है। तलाशी अभियान जारी है।
क्या मोदी की रैली भी निशाने पर थी?
मारे गए आतंकियों की उम्र 20 से 24 साल बताई जा रही है। सभी युवा आतंकी सेना की वर्दी में थे। ये लश्कर के बताए जा रहे हैं। इन्हें फिदायीन बनाकर चुनाव के दौरान तबाही मचाने भेजा गया था। मोदी की रैली भी निशाने पर थी।
मौके पर आतंकियों के जूते पड़े हुए थे। इसके साथ ही जिस कार को उन्होंने निशाना बनाया था वह भी क्षतिग्रस्त स्थिति में खड़ी थी। मोटरसाइकिल भी गिरी पड़ी थी। मोटरसाइकिल सवार को भी उन्होंने मार दिया था।
इसके साथ ही बंकर के पास पुल से पहले ट्रैक्टर भी सड़क किनारे था जिसके मालिक को आतंकियों ने बीरवार को मार दिया था। साथ ही लापता राकेश की भी शुक्रवार को लाश मिल गई। आपरेशन खत्म होने के बाद जिला प्रशासन की मौजूदगी में चारों आतंकियों के शव को पुलिस ने कब्जे में लिया।
सेना ने शुरु किया तलाशी अभियान
बीरवार को सुबह आतंकियों ने कठार गांव में सेना के 84 नंबर बंकर पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद उन्होंने चार नागरिकों को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। आतंकियों के घुसने की खबर मिलते ही सेना ने पूरे इलाके को घेरकर आपरेशन शुरू कर दिया।
आपरेशन देर शाम तक चला। रात में आपरेशन बंद रहा, लेकिन शुक्रवार को सुबह सात बजे दोबारा से आपरेशन शुरू कर दिया गया। दोपहर दो बजे तक इलाके में गोलियों की आवाज गूंजती रही। सेना ने मोटार्र का भी इस्तेमाल किया।