AFSPA: अतिसंवेदनशील इलाकों से हटने लगी सेना
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अफस्पा पर औपचारिक रूप से भले ही सरकार चुप हो, लेकिन कुछ इलाकों से सेना हटाने का काम शुरू हो गया है। कठुआ जिले के सुदूरवर्ती और अति संवेदनशील इलाकों से सेना हटाने की प्रक्रिया ने ग्रामीणों में खलबली मचा दी है। आतंकी गतिविधियों के लिहाज से अतिसंवेदनशील श्रेणी में आने वाले बनी तहसील के कई इलाकों में सेना हटने से दहशत का माहौल बन गया है।
करीब दो दशक पूर्व आतंकी वारदातों से दहल चुके ऐसे इलाकों में सेना की तैनाती के बाद से हालात नियंत्रण में चल रहे हैं। बहरहाल खुफिया एजेंसियों की नजर में आज भी यह इलाके अतिसंवेदनशील श्रेणी में होने की वजह से कड़ी सुरक्षा की मांग करते हैं।
बनी तहसील के डग्गर और रोलका में आतंकी हमले हो चुके हैं। डग्गर और रोलका सहित कई अन्य इलाके आतंकियों के लिए लगातार कई वर्षों तक शरण स्थली रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए बनी के पर्वतीय इलाकों में अफस्पा के तहत सेना की विशेष तैनाती की गई थी।
गांव वाले बोले, मत हटाओ सेना
लेकिन अब सेना हटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसे पूरी तरह से हटाया जाएगा या फिर आंशिक स्तर पर इसे लेकर प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट नहीं की है, बहरहाल सेना हटाने की प्रक्रिया की पुष्टि जरूर की है। एसडीएम बनी मोहम्मद अनवर बांडे के अनुसार बनी सब डिवीजन के कुछ इलाकों से सेना हटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
स्थानीय ग्रामीणों ने इस पर चिंता जताते हुए सैन्य तैनाती बहाल रखने की मांग की है। उन्होंने इस मामले को जिला उपायुक्त को रेफर कर दिया है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 1995 में बनी के डग्गर गांव में आतंकियों ने वन विभाग के विश्राम गृह को जला दिया था।
सुरक्षा बलों पर हमला कर तीन सुरक्षा कर्मियों की जान ले ली थी। इसी तरह से इलाके में चल रहे विकास कार्यों में भी आतंकियों ने कई बार बाधा डाली। सड़क निर्माण एजेंसी बीआरओ की मशीनरी और ट्रकों को आग लगाने से लेकर मशीनरी को खाई में फेंकने की घटनाएं भी हुई थीं।