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एलएसी से पीछे हट रहा चीन, सेना मुस्तैद

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लेह। वास्तविक नियंत्रण रेखा से चीन ने भले ही पीछे हटना शुरू कर दिया है, लेकिन भारतीय सेना सरहद पर पूरी तरह से मुस्तैद है। गलवां से पैंगोंग लेक तक सेना सुरक्षा तैयारियों को और मजबूत कर रही है। लद्दाख में एलएसी की ओर सेना की मूवमेंट पहले की तरह ही हो रही है। गलवां से लगता करीब 70 किलोमीटर तक का पूरा इलाका सेना की निगरानी में है।
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डेमचौक से गलवां तक पूरे क्षेत्र में अभी संचार नेटवर्क बंद है। एलएसी से लगते गांवों में ब्लैक आउट जारी है। लेह से गलवां करीब 230 किलोमीटर दूर है। लेकिन लेह से 100 किलोमीटर से आगे आवाजाही पर पूरी तरह रोक है। सरहदी क्षेत्रों में बीआरओ सामरिक महत्त्व के प्रोजेक्टों का काम तेजी से कर रहा है।
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एलएसी से सटे इलाके से लौटे लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद के कार्यकारी पार्षद कोनचोक स्टेंजिन का कहना है कि सीमा पर हालात पहले जैसे ही हैं। चीन की सेना के पीछे हटने की सूचना है, लेकिन स्थानीय लोगों के अग्रिम क्षेत्रों में जाने पर अभी भी पाबंदी है। न संचार सेवाएं बहाल हुई हैं और न ही सुरक्षा दृष्टि से किया गया ब्लैकआउट खत्म हुआ है। उनका कहना है कि चीन पर भरोसा नहीं किया जा सकता। गलवां क्षेत्र के पार्षद ताशी नामग्याल के अनुसार एलएसी से आबादी वाले क्षेत्र 50 से 70 किलोमीटर दूर हैं। एलएसी की ओर सेना की मूवमेंट में कोई कमी नहीं आई है। डेमचोक निवासी और न्योमा ब्लॉक विकास परिषद की अध्यक्ष उरगेन कहती हैं कि एलएसी के जमीनी हालात बता पाना फिलहाल मुमकिन नहीं है। चीन पर यकीन नहीं किया जा सकता। गलवां से सटे इलाके के सोनम का कहना है कि पहले भी कई बार चीन के पीछे हटने की बात की गई। क्षेत्र के लोगों के लिए आज भी स्थिति पहले जैसी है।
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लद्दाख विकास परिषद के पूर्व अध्यक्ष रिग्जिन स्पलबार कहते हैं कि जब तक एलएसी पर यथास्थिति बहाल नहीं हो जाती, चीन को लेकर कुछ भी दावा करना सही नहीं होगा। एलएसी के उस पार चीन की सेना का भारी जमावड़ा है। लेह के अंजुमन इमामिया के अध्यक्ष अशरफ अली बारचा बताते हैं कि उनके संपर्क में कई ऐसे ग्रामीण हैं जो एलएसी पर पोर्टर का काम करते हैं। उनका कहना है कि सैन्य जमावड़ा वैसा ही है। बारचा के अनुसार गलवां और गोगरा हॉट स्प्रिंग के पास कोई आबादी नहीं है लेकिन पैंगोंग के फिंगर एरिया में चीन की मौजूदगी परेशानी वाली है। यह पर्यटन स्थल है, यहां जल्द स्थिति सामान्य नहीं हुई तो क्षेत्र में पर्यटन कारोबार भी प्रभावित होगा।

इनसेट
लद्दाख विकास परिषद लाएगी एलएसी पर तारबंदी का प्रस्ताव
लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तारबंदी के लिए जल्द ही केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजेगी। कार्यकारी पार्षद कोनचोक स्टेंजिन ने बताया कि एलएसी से सटे इलाकों के लोग पशुपालन पर निर्भर हैं। एलएसी पर चरागाह इनकी लाइफलाइन है। पहले की तरह बिना तारबंदी और चरवाहों पर बंदिशों के साथ तनाव कम करना स्थायी समाधान नहीं है। परिषद की ओर से सरकार के समक्ष चरवाहों को बेरोकटोक जाने की अनुमति देने और तारबंदी का प्रस्ताव लाया जाएगा।
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