जम्मू-कश्मीर फर्जी हथियार लाइसेंस मामलाः एक शस्त्र निर्माता गिरफ्तार, सीबीआई कर रही पूछताछ
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बहुचर्चित फर्जी शस्त्र लाइसेंस मामले में सीबीआई ने शस्त्र निर्माता राहुल ग्रोवर को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद उसे अदालत में पेश कर पूछताछ के लिए 10 दिन की रिमांड पर लिया गया है। सीबीआई प्रवक्ता के अनुसार, ग्रोवर कथित तौर पर हथियार डीलरों और अफसरों के साथ मिलकर जम्मू-कश्मीर से पूरे देश में मान्य शस्त्र लाइसेंस खरीदने का काम करता था। ग्रोवर को राजस्थान पुलिस के आतंकवाद निरोधी दस्ते ने इसी आरोप में 2017 में गिरफ्तार किया था। एक साल बाद उसे जमानत मिली थी। ग्रोवर पर उपभोक्ताओं को हथियार लाइसेंस के नवीनीकरण या नए लाइसेंस देने की सुविधा देने का आरोप है।
राजस्थान एटीएस की ओर से पेश तत्कालीन अतिरिक्त महाधिवक्ता ने राजस्थान उच्च न्यायालय में दलील दी थी कि ग्रोवर से बरामद किए गए 565 लाइसेंस में से 93 लाइसेंस ऐसे व्यक्तियों को दिए गए हैं, जो उस समय जम्मू-कश्मीर में तैनात ही नहीं थे, उनमें से कई ने सशस्त्र बलों में कभी सेवा भी नहीं दी।
सीबीआई ने जम्मू-कश्मीर सरकार की सहमति के बाद एक मामला दर्ज किया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि 2012 से 2016 की अवधि के दौरान तत्कालीन राज्य के विभिन्न जिलों के उपायुक्तों ने फर्जी तरीके से भारी मात्रा में लाइसेंस जारी किए थे।
यशा मुदगल, राजीव रंजन समेत आठ अफसरों के यहां मारे गए थे छापे
अगस्त, 2018 मामले की जांच सौंपे जाने के बाद सीबीआई ने अभियुक्तों के परिसरों में छापा मारते हुए अहम दस्तावेज दर्ज किए थे। ग्रोवर ने आरोप लगाया था कि उन्होंने एक आईएएस अधिकारी के परिजनों के खाते में एक बड़ी रकम भी हस्तांतरित की, जो उस समय एक जिले के उपायुक्त के रूप में कार्यरत थे।
मामला दर्ज करने के बाद पिछले साल 30 दिसंबर को जांच एजेंसी ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी यशा मुदगल, कुमार राजीव रंजन, इत्तरा हुसैन, मोहम्मद सलीम, मोहम्मद जुनैद खान, एफसी भगत, फारूक अहमद खान और जहांगीर अहमद के घरों की तलाशी ली थी। यशा वर्तमान में बिजली वितरण निगम जम्मू की सीईओ और प्रबंध निदेशक हैं, जबकि राजीव जम्मू-श्रीनगर मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के सीईओ हैं।