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अपराजिता-छात्राओं ने किया कला का प्रदर्शन
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रंगोली बनाती छात्राएं।
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जम्मू। ‘अपराजिता : 100 मिलियन स्माइल्स’ अभियान के तहत सर्वोदया पब्लिक स्कूल पौनी चक्क में मंगलवार को महिला उत्पीड़न और सामाजिक कुरीतियों के विषय पर रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसमें छात्राओं ने महिलाओं से जुड़ी समस्याओं को उजागर करते हुए अपनी कला का भी बखूबी प्रदर्शन किया।
रंगोली प्रतियोगिता में पहला स्थान किरण और टीम, दूसरा स्थान जसबीर और टीम और तीसरा स्थान गुरदीन और टीम ने हासिल किया। प्रतियोगिता में छात्राओं ने अपनी कला, कौशल का प्रदर्शन किया। प्रतिभागी छात्राओं ने महिलाओं के साथ हो रहे भेदभाव को बहुत ही खूबसूरती से रंगों के साथ रंगोली में उजागर किया। उन्होंने दहेज प्रथा, भ्रूण-हत्या, लड़कियों की शिक्षा, दुष्कर्म आदि मामलों पर रंगोली बनाई व विचार भी रखे। छात्राओं ने महिलाओं पर समाज में हो रहे अपराधों, शोषण के बारे में भी खुलकर बातचीत की।
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अमर उजाला की यह मुहिम नारी के अधिकार की आवाज है। इससे वे अपने भीतर की शक्ति को लेकर जागरूक हो रही हैं। इससे छात्राएं ही नहीं बल्कि समाज भी जागरूक हो रहा है।
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-सुभाष शर्मा, चेयरमैन
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अपराजिता खुद में ही एक पूर्ण वाक्य है। इसे समझने में अन्य किसी शब्द की जरूरत नहीं है। नारी समाज को बदलने के लिए एक अहम हिस्सा है। जो अपने परिवार से लेकर समाज को बदलने की शक्ति रखती है।
-दीपिका राजपूत, प्रधानाचार्य
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नारी को कमजोर नहीं समझना चाहिए। उनके खिलाफ हो रहे अत्याचारों पर हमें अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए। इसके साथ ही नारी को अपने खिलाफ हो रहे अत्याचार के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।
-वंशिका, छात्रा
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महिलाओं को आगे बढ़ने की आजादी देनी चाहिए। ताकि वे अपनी जिंदगी के अहम फैसले करने में सक्षम बनें। उनके खिलाफ हो रही कुरीतियों को हमें रोकना होगा।
-लवी, छात्रा
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अमर उजाला की यह पहल लड़कियों को जागरूक कर रही है। अपराजिता जैसा अभियान नारी के अधिकार की आवाज है। ये लोगों को जागरूक करने का काम कर रहा है।
-जन्नत, छात्रा
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रंगोली प्रतियोगिता में पहला स्थान किरण और टीम, दूसरा स्थान जसबीर और टीम और तीसरा स्थान गुरदीन और टीम ने हासिल किया। प्रतियोगिता में छात्राओं ने अपनी कला, कौशल का प्रदर्शन किया। प्रतिभागी छात्राओं ने महिलाओं के साथ हो रहे भेदभाव को बहुत ही खूबसूरती से रंगों के साथ रंगोली में उजागर किया। उन्होंने दहेज प्रथा, भ्रूण-हत्या, लड़कियों की शिक्षा, दुष्कर्म आदि मामलों पर रंगोली बनाई व विचार भी रखे। छात्राओं ने महिलाओं पर समाज में हो रहे अपराधों, शोषण के बारे में भी खुलकर बातचीत की।
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अमर उजाला की यह मुहिम नारी के अधिकार की आवाज है। इससे वे अपने भीतर की शक्ति को लेकर जागरूक हो रही हैं। इससे छात्राएं ही नहीं बल्कि समाज भी जागरूक हो रहा है।
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-सुभाष शर्मा, चेयरमैन
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अपराजिता खुद में ही एक पूर्ण वाक्य है। इसे समझने में अन्य किसी शब्द की जरूरत नहीं है। नारी समाज को बदलने के लिए एक अहम हिस्सा है। जो अपने परिवार से लेकर समाज को बदलने की शक्ति रखती है।
-दीपिका राजपूत, प्रधानाचार्य
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नारी को कमजोर नहीं समझना चाहिए। उनके खिलाफ हो रहे अत्याचारों पर हमें अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए। इसके साथ ही नारी को अपने खिलाफ हो रहे अत्याचार के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।
-वंशिका, छात्रा
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महिलाओं को आगे बढ़ने की आजादी देनी चाहिए। ताकि वे अपनी जिंदगी के अहम फैसले करने में सक्षम बनें। उनके खिलाफ हो रही कुरीतियों को हमें रोकना होगा।
-लवी, छात्रा
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अमर उजाला की यह पहल लड़कियों को जागरूक कर रही है। अपराजिता जैसा अभियान नारी के अधिकार की आवाज है। ये लोगों को जागरूक करने का काम कर रहा है।
-जन्नत, छात्रा