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Jammu News: महाराष्ट्र के चिंचवड़ से पहली बार 108 स्कॉर्पियो कारों को लेकर पहुंची ऑटोमोबाइल रेल रैक
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सांबा में रेलवे का नया इतिहास : जम्मू डिवीजन में पहली बार निर्माण संयंत्र से सीधे रेल मार्ग के जरिए पहुंची ऑटोमोबाइल की बड़ी खेप।
• ऐतिहासिक मील का पत्थर:
• लॉन्ग-रूट कार्गो : 1,992 किलोमीटर का लंबा सफर तय कर पहुंची विशेष मालगाड़ी
• हाई-स्पीड परिवहन : दो मंजिला क्षमता वाले 27 विशेष वैगनों से सुरक्षित हुई डिलीवरी
• सड़क मार्ग पर निर्भरता घटने से कम होगी लॉजिस्टिक्स लागत और पर्यावरण प्रदूषण
संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। जम्मू-कश्मीर में रेल-आधारित माल ढुलाई और ऑटोमोबाइल लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचा गया है। महाराष्ट्र के चिंचवड़ (पुणे) से महिंद्रा एंड महिंद्रा की 108 चमचमाती स्कॉर्पियो एसयूवी से लदी देश की पहली हाई-स्पीड ऑटोमोबाइल फ्रेट रैक सांबा स्थित गति शक्ति मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनल (एसीटीएल, सांबा प्राइवेट लिमिटेड) पर सफलतापूर्वक पहुंची। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में सीधे रेल मार्ग से महिंद्रा की गाड़ियों की डिलीवरी का यह पहला मामला है।
यह रैक महाराष्ट्र के औद्योगिक क्षेत्र चिंचवड़ से रवाना होकर भारतीय रेल नेटवर्क पर लगभग 1,992 किलोमीटर की दूरी तय कर सांबा पहुंची। ऑटोमोबाइल फ्रेट ट्रेन ऑपरेटर (एएफटीओ) द्वारा संचालित इस विशेष मालगाड़ी में 27 विशेष रूप से डिजाइन किए गए BCACBM वैगन शामिल थे। ये वैगन दो मंजिला (डबल-डेक) होते हैं, जिससे एक ही खेप में भारी संख्या में वाहनों का सुरक्षित परिवहन संभव हो पाया। इससे पहले अक्टूबर 2025 में मानेसर से अनंतनाग तक मारुति सुजुकी की कारों की रेक लाई गई थी और वर्तमान में भी मारुति की कारों का रेल परिवहन जारी है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में पहली बार महिंद्रा कंपनी की कारों का रेल मार्ग से परिवहन किया गया है।
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व्यापार और स्थानीय बाजार को मिलेगी नई रफ्तार
बाजार विशेषज्ञों और स्थानीय कार डीलरों के अनुसार, रेल नेटवर्क के इस इस्तेमाल से बाजार में गाड़ियों की कृत्रिम कमी (वेटिंग पीरियड) दूर होगी। सड़क परिवहन के मुकाबले ट्रेन से गाड़ियां आने पर उन पर स्क्रैच या डैमेज होने का खतरा शून्य हो जाता है। रेलवे के इस कदम से जम्मू-कश्मीर के ऑटोमोबाइल बाजार को एक नई रफ्तार मिलेगी और माल ढुलाई के बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी।
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रेलवे अधिकारियों का आधिकारिक बयान:
जम्मू डिवीजन और पूरे उत्तर रेलवे के लिए यह एक बड़ी और क्रांतिकारी उपलब्धि है। अब तक केंद्र शासित प्रदेश में नए वाहनों की आपूर्ति के लिए पूरी तरह पारंपरिक सड़क मार्ग (ट्रकों) पर निर्भर रहना पड़ता था, जिसमें समय और लागत दोनों अधिक लगती थी। रेल-आधारित ऑटोमोबाइल लॉजिस्टिक्स की इस सफल शुरुआत से न केवल लॉजिस्टिक्स लागत में भारी कमी आएगी, बल्कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगने वाले भारी ट्रैफिक जाम और कार्बन उत्सर्जन से भी बड़ी राहत मिलेगी। -प्रवक्ता, उत्तर रेलवे
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प्रधानमंत्री गति शक्ति पहल के तहत यह मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनल देश के प्रमुख विनिर्माण केंद्रों को सीधे जम्मू-कश्मीर से जोड़ रहा है। यह रैक कार निर्माताओं के लिए एक किफायती और सुरक्षित विकल्प बनकर उभरी है, जिससे स्थानीय डीलरों और उपभोक्ताओं तक बेहद कम समय में गाड़ियों की सुरक्षित डिलीवरी सुनिश्चित की जा सकेगी। -उचित सिंघल, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक, जम्मू रेलवे डिवीजन
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जम्मू-कश्मीर के ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए यह एक क्रांतिकारी बदलाव है। अब तक महाराष्ट्र या देश के अन्य कोनों से ट्रकों के जरिए नई कारें यहां लाने में कम से कम 7 से 10 दिन का समय लग जाता था, लेकिन रेल मार्ग से यह समय घटकर आधा रह गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि सड़क मार्ग पर हादसों, मौसम (जैसे हाईवे बंद होना) और गाड़ियों पर स्क्रैच लगने का जो डर हमेशा बना रहता था, वह अब पूरी तरह खत्म हो जाएगा। इससे हमें शोरूम तक बिल्कुल सुरक्षित और चमचमाती गाड़ियां मिलेंगी।
-अध्यक्ष, जम्मू-कश्मीर ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन
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• ऐतिहासिक मील का पत्थर:
• लॉन्ग-रूट कार्गो : 1,992 किलोमीटर का लंबा सफर तय कर पहुंची विशेष मालगाड़ी
• हाई-स्पीड परिवहन : दो मंजिला क्षमता वाले 27 विशेष वैगनों से सुरक्षित हुई डिलीवरी
• सड़क मार्ग पर निर्भरता घटने से कम होगी लॉजिस्टिक्स लागत और पर्यावरण प्रदूषण
संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। जम्मू-कश्मीर में रेल-आधारित माल ढुलाई और ऑटोमोबाइल लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचा गया है। महाराष्ट्र के चिंचवड़ (पुणे) से महिंद्रा एंड महिंद्रा की 108 चमचमाती स्कॉर्पियो एसयूवी से लदी देश की पहली हाई-स्पीड ऑटोमोबाइल फ्रेट रैक सांबा स्थित गति शक्ति मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनल (एसीटीएल, सांबा प्राइवेट लिमिटेड) पर सफलतापूर्वक पहुंची। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में सीधे रेल मार्ग से महिंद्रा की गाड़ियों की डिलीवरी का यह पहला मामला है।
यह रैक महाराष्ट्र के औद्योगिक क्षेत्र चिंचवड़ से रवाना होकर भारतीय रेल नेटवर्क पर लगभग 1,992 किलोमीटर की दूरी तय कर सांबा पहुंची। ऑटोमोबाइल फ्रेट ट्रेन ऑपरेटर (एएफटीओ) द्वारा संचालित इस विशेष मालगाड़ी में 27 विशेष रूप से डिजाइन किए गए BCACBM वैगन शामिल थे। ये वैगन दो मंजिला (डबल-डेक) होते हैं, जिससे एक ही खेप में भारी संख्या में वाहनों का सुरक्षित परिवहन संभव हो पाया। इससे पहले अक्टूबर 2025 में मानेसर से अनंतनाग तक मारुति सुजुकी की कारों की रेक लाई गई थी और वर्तमान में भी मारुति की कारों का रेल परिवहन जारी है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में पहली बार महिंद्रा कंपनी की कारों का रेल मार्ग से परिवहन किया गया है।
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व्यापार और स्थानीय बाजार को मिलेगी नई रफ्तार
बाजार विशेषज्ञों और स्थानीय कार डीलरों के अनुसार, रेल नेटवर्क के इस इस्तेमाल से बाजार में गाड़ियों की कृत्रिम कमी (वेटिंग पीरियड) दूर होगी। सड़क परिवहन के मुकाबले ट्रेन से गाड़ियां आने पर उन पर स्क्रैच या डैमेज होने का खतरा शून्य हो जाता है। रेलवे के इस कदम से जम्मू-कश्मीर के ऑटोमोबाइल बाजार को एक नई रफ्तार मिलेगी और माल ढुलाई के बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी।
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रेलवे अधिकारियों का आधिकारिक बयान:
जम्मू डिवीजन और पूरे उत्तर रेलवे के लिए यह एक बड़ी और क्रांतिकारी उपलब्धि है। अब तक केंद्र शासित प्रदेश में नए वाहनों की आपूर्ति के लिए पूरी तरह पारंपरिक सड़क मार्ग (ट्रकों) पर निर्भर रहना पड़ता था, जिसमें समय और लागत दोनों अधिक लगती थी। रेल-आधारित ऑटोमोबाइल लॉजिस्टिक्स की इस सफल शुरुआत से न केवल लॉजिस्टिक्स लागत में भारी कमी आएगी, बल्कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगने वाले भारी ट्रैफिक जाम और कार्बन उत्सर्जन से भी बड़ी राहत मिलेगी। -प्रवक्ता, उत्तर रेलवे
प्रधानमंत्री गति शक्ति पहल के तहत यह मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनल देश के प्रमुख विनिर्माण केंद्रों को सीधे जम्मू-कश्मीर से जोड़ रहा है। यह रैक कार निर्माताओं के लिए एक किफायती और सुरक्षित विकल्प बनकर उभरी है, जिससे स्थानीय डीलरों और उपभोक्ताओं तक बेहद कम समय में गाड़ियों की सुरक्षित डिलीवरी सुनिश्चित की जा सकेगी। -उचित सिंघल, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक, जम्मू रेलवे डिवीजन
जम्मू-कश्मीर के ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए यह एक क्रांतिकारी बदलाव है। अब तक महाराष्ट्र या देश के अन्य कोनों से ट्रकों के जरिए नई कारें यहां लाने में कम से कम 7 से 10 दिन का समय लग जाता था, लेकिन रेल मार्ग से यह समय घटकर आधा रह गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि सड़क मार्ग पर हादसों, मौसम (जैसे हाईवे बंद होना) और गाड़ियों पर स्क्रैच लगने का जो डर हमेशा बना रहता था, वह अब पूरी तरह खत्म हो जाएगा। इससे हमें शोरूम तक बिल्कुल सुरक्षित और चमचमाती गाड़ियां मिलेंगी।
-अध्यक्ष, जम्मू-कश्मीर ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन