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अमरनाथ यात्रा : समक्ष व सेहतमंद लोगों को ही मिलेगा अनिवार्य स्वास्थ्य प्रमाणपत्र
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मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने बुधवार को देशभर के विभिन्न राज्यों के स्वास्थ्य सचिवों के साथ बैठक कर
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मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने देशभर के 10 राज्यों के सचिवों को जारी किए दिशानिर्देश
- 1415 डाॅक्टर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से तैनात होंगे
- 05 अप्रैल तक नामित डाॅक्टरों की सूची होगी जारी
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। श्री अमरनाथ यात्रा 2025 के लिए सक्षम और सेहतमंद लोगों को ही अनिवार्य स्वास्थ्य प्रमाणपत्र (सीएचसी) जारी किया जाएगा। इससे यात्रा के दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्र में यात्रियों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचाया जा सकेगा। जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने देशभर के 10 राज्यों के स्वास्थ्य सचिवों के साथ बैठक कर ये दिशानिर्देश जारी किए हैं।
यात्रा अवधि के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जम्मू कश्मीर में 1415 डॉक्टरों को तैनात किया जाएगा।
मुख्य सचिव ने बुधवार को देशभर से दस राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य सचिवों के साथ वर्चुअल बैठक कर सीएचसी और दूसरे स्वास्थ्य मुद्दों पर चर्चा की। राज्यों को पांच अप्रैल 2025 तक श्राइन बोर्ड को नामित डॉक्टरों की अपनी सूची प्रस्तुत करने के लिए कहा गया। यात्रा के लिए आगामी 14 अप्रैल से निर्धारित बैंकों के माध्यम से ऑनलाइन और ऑफलाइन अग्रिम पंजीकरण प्रक्रिया शुरू हो रही है। मुख्य सचिव ने कहा कि पिछली यात्राओं के अनुभव मिला है कि अयोग्य लोगों को स्वास्थ्य प्रमाण पत्र जारी कर देने से पहाड़ी क्षेत्र में उन्हें गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझना पड़ा। 2012 की अमरनाथ यात्रा में ऐसे 100 से अधिक तीर्थयात्रियों ने स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के कारण अपनी जान गंवा दी थी। ये यात्री यात्रा में 12,800 फीट से अधिक ऊंचाई, कम ऑक्सीजन का स्तर, बर्फ से ढके पहाड़ और अचानक तापमान गिरने से गंभीर रूप बीमार हो गए। इन चुनौतियों के बाद कठोर स्वास्थ्य जांच को रेखांकित किया गया। उन्होंने राज्य प्रशासनों से सीएचसी के लिए पर्याप्त डाक्टर नामित करने को कहा।
उपराज्यपाल के प्रधान सचिव एवं श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड के सीईओ डॉ. मंदीप कुमार भंडारी ने डॉक्टरों को उनके आधिकारिक पदनाम से नामित करने की सलाह दी, जिन्हें नाम, पता और एनएमसी पंजीकरण संख्या सहित सीएचसी पर व्यक्तिगत रूप से हस्ताक्षर किए जाएं। इस लंबी और कठिन यात्रा में हाई एल्टीट्यूड पल्मोनरी एडिमा (एएपीई) और हाई एल्टीट्यूड सेरेब्रल एडिमा (एएसीई) जैसी गंभीर स्थितियों का जोखिम रहता है। बैठक में बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, गुजरात और महाराष्ट्र के स्वास्थ्य सचिव शामिल हुए।
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- 1415 डाॅक्टर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से तैनात होंगे
- 05 अप्रैल तक नामित डाॅक्टरों की सूची होगी जारी
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। श्री अमरनाथ यात्रा 2025 के लिए सक्षम और सेहतमंद लोगों को ही अनिवार्य स्वास्थ्य प्रमाणपत्र (सीएचसी) जारी किया जाएगा। इससे यात्रा के दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्र में यात्रियों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचाया जा सकेगा। जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने देशभर के 10 राज्यों के स्वास्थ्य सचिवों के साथ बैठक कर ये दिशानिर्देश जारी किए हैं।
यात्रा अवधि के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जम्मू कश्मीर में 1415 डॉक्टरों को तैनात किया जाएगा।
मुख्य सचिव ने बुधवार को देशभर से दस राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य सचिवों के साथ वर्चुअल बैठक कर सीएचसी और दूसरे स्वास्थ्य मुद्दों पर चर्चा की। राज्यों को पांच अप्रैल 2025 तक श्राइन बोर्ड को नामित डॉक्टरों की अपनी सूची प्रस्तुत करने के लिए कहा गया। यात्रा के लिए आगामी 14 अप्रैल से निर्धारित बैंकों के माध्यम से ऑनलाइन और ऑफलाइन अग्रिम पंजीकरण प्रक्रिया शुरू हो रही है। मुख्य सचिव ने कहा कि पिछली यात्राओं के अनुभव मिला है कि अयोग्य लोगों को स्वास्थ्य प्रमाण पत्र जारी कर देने से पहाड़ी क्षेत्र में उन्हें गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझना पड़ा। 2012 की अमरनाथ यात्रा में ऐसे 100 से अधिक तीर्थयात्रियों ने स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के कारण अपनी जान गंवा दी थी। ये यात्री यात्रा में 12,800 फीट से अधिक ऊंचाई, कम ऑक्सीजन का स्तर, बर्फ से ढके पहाड़ और अचानक तापमान गिरने से गंभीर रूप बीमार हो गए। इन चुनौतियों के बाद कठोर स्वास्थ्य जांच को रेखांकित किया गया। उन्होंने राज्य प्रशासनों से सीएचसी के लिए पर्याप्त डाक्टर नामित करने को कहा।
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उपराज्यपाल के प्रधान सचिव एवं श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड के सीईओ डॉ. मंदीप कुमार भंडारी ने डॉक्टरों को उनके आधिकारिक पदनाम से नामित करने की सलाह दी, जिन्हें नाम, पता और एनएमसी पंजीकरण संख्या सहित सीएचसी पर व्यक्तिगत रूप से हस्ताक्षर किए जाएं। इस लंबी और कठिन यात्रा में हाई एल्टीट्यूड पल्मोनरी एडिमा (एएपीई) और हाई एल्टीट्यूड सेरेब्रल एडिमा (एएसीई) जैसी गंभीर स्थितियों का जोखिम रहता है। बैठक में बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, गुजरात और महाराष्ट्र के स्वास्थ्य सचिव शामिल हुए।
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