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अनजाने में एलओसी पार करने वाले लड़के को सेना ने गिफ्ट के साथ वापस भेजा पाकिस्तान
Fri, 08 Jan 2021 07:44 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: विक्रांत चतुर्वेदी
Updated Fri, 08 Jan 2021 07:44 PM IST
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पीओके से आए लड़के को वापस भेजते भारतीय सेना
- फोटो : अमर उजाला
भारतीय सेना ने जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर मिसाल कायम की है। पाकिस्तान को आईना दिखाते हुए नया उदाहरण पेश किया है। एलओसी पास करने वाले एक 14 वर्षीय लड़के को पाकिस्तानी सेना को सौंप दिया है।
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के मीरपुर निवासी मोहम्मद शरीफ का 14 वर्षीय बेटा अली हैदर 31 दिसंबर 2020 को अनजाने में एलओसी पार कर लिया था। वह 31 दिसंबर को पुंछ के रंगार नाला के पास मिला था। पूछताछ में उसने बताया कि वह पीओके से है और वापस अपने परिवार के पास जाना चाहता है। शुक्रवार को उसकी अच्छी देखभाल के साथ उसे वापस भेज दिया।
वहीं गलती से एलओसी पार चले गए और पाकिस्तान में लगभग चार महीने तक हिरासत में रहने के बाद लौटे भारतीय सैनिक चंदू बाबूलाल चव्हाण ने समय से पहले ही रिटायरमेंट की मांग की थी। 24 वर्षीय चव्हाण ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर कहा था कि वह काफी परेशान हैं और नौकरी नहीं करना चाहते हैं, उन्हें सेवानिवृत्त किया जाए।
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बता दें कि 37 राष्ट्रीय राइफल्स के जवान चंदू 29 सितंबर, 2016 को लापता हो गए थे। उन्होंने अनजाने में एलओसी पार किया था जिसके बाद पाकिस्तानी सेना ने उन्हें हिरासत में ले लिया था। उनको चार महीने बाद भारतीय सेना को सौंपा गया। भारत लौटने के बाद चंदू को किरकी में सैन्य अस्पताल के मनोरोग वार्ड में भर्ती कराया गया था। भारत लौटने के बाद सेना ने अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत धुले जिले के निवासी चंदू को सजा भी दी।
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पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के मीरपुर निवासी मोहम्मद शरीफ का 14 वर्षीय बेटा अली हैदर 31 दिसंबर 2020 को अनजाने में एलओसी पार कर लिया था। वह 31 दिसंबर को पुंछ के रंगार नाला के पास मिला था। पूछताछ में उसने बताया कि वह पीओके से है और वापस अपने परिवार के पास जाना चाहता है। शुक्रवार को उसकी अच्छी देखभाल के साथ उसे वापस भेज दिया।
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वहीं गलती से एलओसी पार चले गए और पाकिस्तान में लगभग चार महीने तक हिरासत में रहने के बाद लौटे भारतीय सैनिक चंदू बाबूलाल चव्हाण ने समय से पहले ही रिटायरमेंट की मांग की थी। 24 वर्षीय चव्हाण ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर कहा था कि वह काफी परेशान हैं और नौकरी नहीं करना चाहते हैं, उन्हें सेवानिवृत्त किया जाए।
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बता दें कि 37 राष्ट्रीय राइफल्स के जवान चंदू 29 सितंबर, 2016 को लापता हो गए थे। उन्होंने अनजाने में एलओसी पार किया था जिसके बाद पाकिस्तानी सेना ने उन्हें हिरासत में ले लिया था। उनको चार महीने बाद भारतीय सेना को सौंपा गया। भारत लौटने के बाद चंदू को किरकी में सैन्य अस्पताल के मनोरोग वार्ड में भर्ती कराया गया था। भारत लौटने के बाद सेना ने अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत धुले जिले के निवासी चंदू को सजा भी दी।