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Jammu News: मोहमाया त्याग ईश्वर की भक्ति कर जीवन सफल बनाए इंसान
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गांव मट्टू के शिव मंदिर में भागवत कथा में साध्वी आशीष गिरिराज ने किए प्रवचन
संवाद न्यूज एजेंसी
ज्यौड़ियां। इंसान मोहमाया को त्याग ईश्वर की भक्ति करे। इसी से जीवन सफल होगा। यही जीवन का उद्देश्य है। यह प्रवचन खौड़ के गांव मट्टू के शिव मंदिर में चल रही भागवत कथा के दूसरे दिन सोमवार को कथावाचक साध्वी आशीष गिरिराज ने किए।
महाराज ने कहा कि भगवान की भक्ति में सुख है। इससे दुखों से छुटकारा मिलता है। लालच, मोह का त्याग कर भगवान की भक्ति में मन लगाएं। लेकिन, मनुष्य की हर पल आनंद की आकांक्षा है। इसके लिए निरंतर प्रयासरत है। किसी को पढ़ने में आनंद आता है तो किसी को खेलने में। कोई लिखने में आनंद ले रहा है तो कोई बड़ी-बड़ी बातें करने में। धन दौलत में आनंद खोज रहे हैं, लेकिन वास्तविक आनंद की प्राप्ति हमारे भीतर है। इसके लिए सरलता और सहजता जरूरी है। सहज और सरल होने से ही आनंद समीप आता है। साध्वी ने माता-पिता की सेवा का भी संदेश दिया। कहा कि इससे बड़ी भक्ति कोई नहीं है। माता-पिता संतान की खुशी के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं। मां खुद गीले बिस्तर पर सोकर संतान को सूखी जगह सुलाती है। इसलिए हमेशा माता-पिता की सेवा करें। वहीं, मास और शराब का सेवन न करें। कुदरत के बनाए हर प्राणी से प्रेम करें। यहां प्रेम है, वहां प्रभु स्वयं होते हैं। इस मौके पर काफी संख्या में संगत मौजूद थी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ज्यौड़ियां। इंसान मोहमाया को त्याग ईश्वर की भक्ति करे। इसी से जीवन सफल होगा। यही जीवन का उद्देश्य है। यह प्रवचन खौड़ के गांव मट्टू के शिव मंदिर में चल रही भागवत कथा के दूसरे दिन सोमवार को कथावाचक साध्वी आशीष गिरिराज ने किए।
महाराज ने कहा कि भगवान की भक्ति में सुख है। इससे दुखों से छुटकारा मिलता है। लालच, मोह का त्याग कर भगवान की भक्ति में मन लगाएं। लेकिन, मनुष्य की हर पल आनंद की आकांक्षा है। इसके लिए निरंतर प्रयासरत है। किसी को पढ़ने में आनंद आता है तो किसी को खेलने में। कोई लिखने में आनंद ले रहा है तो कोई बड़ी-बड़ी बातें करने में। धन दौलत में आनंद खोज रहे हैं, लेकिन वास्तविक आनंद की प्राप्ति हमारे भीतर है। इसके लिए सरलता और सहजता जरूरी है। सहज और सरल होने से ही आनंद समीप आता है। साध्वी ने माता-पिता की सेवा का भी संदेश दिया। कहा कि इससे बड़ी भक्ति कोई नहीं है। माता-पिता संतान की खुशी के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं। मां खुद गीले बिस्तर पर सोकर संतान को सूखी जगह सुलाती है। इसलिए हमेशा माता-पिता की सेवा करें। वहीं, मास और शराब का सेवन न करें। कुदरत के बनाए हर प्राणी से प्रेम करें। यहां प्रेम है, वहां प्रभु स्वयं होते हैं। इस मौके पर काफी संख्या में संगत मौजूद थी।
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