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धान की रोपाई करने में जुटे किसान

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धान की रोपाई करते हुए किसान - फोटो : RSPURA
आरएस पुरा। कोरोना महामारी के बीच ग्रामीण क्षेत्र के किसान खेतीबाड़ी करते देखे जा सकते थे, लेकिन अब महामारी कम होने पर किसान खेतों में धान की रोपाई करते देखे जा सकते हैं।
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आरएस पुरा के बासमती चावल अपनी खुशबू के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। रणवीर नहर में पर्याप्त मात्रा में पानी होने व पिछले दिनों हुई बारिश के बाद किसान धान की रोपाई कर समय पर कार्य निपटाने में लगे हैं। किसान समर चाढ़क का कहना है कि कोरोना ने देश के हर राज्य में लोगों को जहां जान गवानी पड़ी, वहीं आर्थिक तौर पर लोगों को नुकसान उठाना पड़ा। इससे दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार के अभी हालत हैं उससे नहीं लगता कि इस बार दूसरे राज्यों से मजदूर आ सकेंगे। किसानों को खुद ही धान की रोपाई का कार्य आरंभ कर लेना चाहिए। ताकि समय पर धान की फसल तैयार हो सके।
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गांव गंडली के किसान पवन सिंह, कशमीर सिंह, मकर सिंह का कहना है कि वह धान की 370 वैरायटी लगा रहे हैं, जिसे शुद्ध बासमती कहा जाता है। कोरोना के बीच ही कई किसानों ने धान की पनीरी लगा ली थी। अब खेतों को तैयार कर धान की रोपाई की जा रही है। कई किसान सुबह व शाम को घरों में रहने के बाद अब धान रोपाई में जुट गए हैं। बारिश के पानी से भरे खेतों में धान की रोपाई शुरू हो जाती है। शाम ढलने पर घर की ओर किसान रुख कर रहे हैं। मानसून की पहली बारिश होने पर किसानों ने खेतों की गुड़ाई करके इसे धान की रोपाई के लिए तैयार कर दिए थे। कुछ किसानों ने बारिश से पूर्व ही नलकूप से सिंचाई करके खेतों को तैयार कर लिया था। रोपाई के बारिश काफी मुफीद साबित हो रही है। मजदूरी को दरकिनार करते हुए किसान परिवार स्वयं ही धान की रोपाई में जुटे हैं।
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मई में धान की रोपाई करने का कार्य आरंभ हो जाता है। इस बार ऐसा नहीं पाया, जिसका कारण कोरोना महामारी रहा है। किसान जिस प्रकार धान की रोपाई कर रहे हैं उससे लगता है कि इसी माह तक धान की रोपाई का कार्य निपटा लेंगे।
-गुलशन शर्मा, कृषि अधिकारी, आरएस पुरा
डीडीसी सदस्य ने कृषि अधिकारियों के साथ की बैठक
अखनूर। डीडीसी सदस्य पंडित सुरेश शर्मा ने रविवार को कृषि अधिकारियों के साथ बैठक की। अधिकारियों ने कृषि के नए उपकरणों तथा खेती की नई तकनीक की जानकारी दी।
सुरेश शर्मा ने कहा कि विभाग के माध्यम से कृषि उपकरणों में जो सब्सिडी दी जा रही है उसका लाभ किसानों को मिलना चाहिए। हर पंचायत में शिविर लगाकर किसानों को जागरूक करें ताकि उनको योजनाओं का लाभ मिल सके। मैरा मेंदरिया, चौकी चौरा में पानी के स्रोत पर किसानों को जानकारी दी जाए। बीज, खाद के लगभग 9 के करीब स्टोर खुलने की जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया विभाग की तरफ से ऑर्गेनिक कलेक्टर नई स्कीम आ रही है। इसका लाभ पानी के किनारे जो जमीन है उसको हो सकता है। बैठक में एसडीएईओ एसके बट, एईओ योगेश मेहता, एईओ गारू राम, एईए रामलाल, संजय धर आदि उपस्थित रहे।
नहर का पानी नहीं मिलने पर किसानों ने जताया रोष
रामगढ़। क्षेत्र के गांव चक सलारिया के सरपंच विजय कुमार बाबा ने कहा कि क्षेत्र में अधिकांश खेतों में धान की बुआई और सिंचाई के लिए नहरों में पानी नहीं है। इससे किसानों में रोष है। किसानों का कहना है कि समय पर नहर का पानी व बिजली नहीं मिलने से धान की पनीरी सूख रही है। फसल को लेकर पानी की किल्लत से किसानों को जूझना पड़ रहा है।

सरपंच ने कहा कि कई साल से सीमावर्ती किसान पानी, बिजली के लिए परेशान हैं। पिछले साल बेमौसम बारिश से किसानों की धान की फसल बरबाद हो चुकी है। इस साल नहरों में सिंचाई के लिए पानी नहीं है। पंप सेट चलें, इसके लिए बिजली पर्याप्त नहीं मिल रही है। इससे लगता नहीं है कि इस साल भी किसान धान की फसल की रोपाई समय पर नहीं कर पाएंगे। मजबूर होकर किसानों को अपनी आवाज अधिकारियों के कानों तक पहुंचाने के लिए प्रदर्शन करना पड़ेगा। उन्होंने पिछले साल बर्बाद हुई किसानों की फसल के लिए मुआवजा जारी करने और बिजली-पानी और नहरी पानी की समस्या के समाधान की मांग की है।
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