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Jammu News: धान की रोपाई महंगी, तीन वक्त खाने के साथ प्रति कनाल 700 रुपये रेट
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पाकिस्तान और भारत के बीच तनाव के बाद अन्य राज्यों से कम लौटे मजदूर
बीते वर्ष 600 से 650 रुपये लेते थे, कई दिनों के इंतजार के बाद मिल रहे धान लगाने वाले
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच पनपे तनाव का असर खेती-किसानी पर भी दिख रहा है। धान की रोपाई कराने में किसानों के पसीने छूट रहे हैं। धान लगाने वाले मजूदरों ने प्रति कनाल रेट बढ़ा दिया है। इसका सबसे बड़ा कारण जम्मू-कश्मीर में तनाव बढ़ने के बाद घरों को लौटने वाले मजदूरों का कम संख्या में आना है। किसानों का कहना है कि माहौल तो अब ठीक है। कोई डर नहीं, लेकिन धान की रोपाई बहुत महंगी पड़ रही है।
अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे गांव कोटली मिरदीयां के किसान जगतार सिंह रंधावा और अशोक कुमार का कहना है कि मजदूरों की बहुत कमी है, जो मिल रहे हैं, वे प्रति कनाल 700 रुपये मांग रहे हैं। पिछले वर्ष 600 या 650 रुपये देते थे। गांव विधिपुर के किसान तिलक राज का कहना है कि इस बार मजदूरी ज्यादा देनी पड़ रही है। पनीरी निकालने के लिए 200 रुपये प्रति कनाल अलग से देने पड़ रहे हैं।
इसका असर पूरी खेतीबाड़ी पर
गांव कोटली मीरदियां के ही रहने वाले गोविंद चौधरी व बुआ दत्ता का कहना है कि प्रति कनाल यदि 100 रुपये भी अधिक देने पड़ें तो बड़ा असर पड़ता है। अगर 20 से 30 कनाल जमीन में धान लगवाना है तो सीधा तीन हजार रुपये बढ़ रहा है। इसका असर पूरे सीजन पर रहता है। इतने पैसे खर्च करने के बाद भी गारंटी नहीं की मौसम की मार न पड़ जाए।
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ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर पैक
धान लगाने वालों ने अपने रेट ही नहीं बढ़ाए, वे धान लगाने के लिए तीन वक्त का खाना भी ले रहे हैं। आरएस पुरा के गांव गेगिंया के रहने वाले सुनील कुमार का कहना है कि अभी तीन दिन पहले ही धान लगवाया है। मजदूरों को सुबह ब्रेकफास्ट और दोपहर को लंच दिया। रात को घर जाते वक्त डिनर पैक भी करके दिया। दिलचस्प बात यह है कि वे सुबह अलग खाना खाते हैं। दोपहर को अलग सब्जी और रात को अलग।
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बीते वर्ष 600 से 650 रुपये लेते थे, कई दिनों के इंतजार के बाद मिल रहे धान लगाने वाले
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच पनपे तनाव का असर खेती-किसानी पर भी दिख रहा है। धान की रोपाई कराने में किसानों के पसीने छूट रहे हैं। धान लगाने वाले मजूदरों ने प्रति कनाल रेट बढ़ा दिया है। इसका सबसे बड़ा कारण जम्मू-कश्मीर में तनाव बढ़ने के बाद घरों को लौटने वाले मजदूरों का कम संख्या में आना है। किसानों का कहना है कि माहौल तो अब ठीक है। कोई डर नहीं, लेकिन धान की रोपाई बहुत महंगी पड़ रही है।
अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे गांव कोटली मिरदीयां के किसान जगतार सिंह रंधावा और अशोक कुमार का कहना है कि मजदूरों की बहुत कमी है, जो मिल रहे हैं, वे प्रति कनाल 700 रुपये मांग रहे हैं। पिछले वर्ष 600 या 650 रुपये देते थे। गांव विधिपुर के किसान तिलक राज का कहना है कि इस बार मजदूरी ज्यादा देनी पड़ रही है। पनीरी निकालने के लिए 200 रुपये प्रति कनाल अलग से देने पड़ रहे हैं।
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इसका असर पूरी खेतीबाड़ी पर
गांव कोटली मीरदियां के ही रहने वाले गोविंद चौधरी व बुआ दत्ता का कहना है कि प्रति कनाल यदि 100 रुपये भी अधिक देने पड़ें तो बड़ा असर पड़ता है। अगर 20 से 30 कनाल जमीन में धान लगवाना है तो सीधा तीन हजार रुपये बढ़ रहा है। इसका असर पूरे सीजन पर रहता है। इतने पैसे खर्च करने के बाद भी गारंटी नहीं की मौसम की मार न पड़ जाए।
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ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर पैक
धान लगाने वालों ने अपने रेट ही नहीं बढ़ाए, वे धान लगाने के लिए तीन वक्त का खाना भी ले रहे हैं। आरएस पुरा के गांव गेगिंया के रहने वाले सुनील कुमार का कहना है कि अभी तीन दिन पहले ही धान लगवाया है। मजदूरों को सुबह ब्रेकफास्ट और दोपहर को लंच दिया। रात को घर जाते वक्त डिनर पैक भी करके दिया। दिलचस्प बात यह है कि वे सुबह अलग खाना खाते हैं। दोपहर को अलग सब्जी और रात को अलग।