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धूप में निखार, सर्दी से मिली राहत
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परगवाल में वारिस से गिली हुई फसल
अरनिया। बीते दो दिन से बारिश व सर्द हवा की मार झेल रहे लोगों को मंगलवार को निखरी धूप ने काफी राहत प्रदान की है। मौसम में निखार आने से किसानों को भी काफी लाभ पहुंचेगा।
रविवार दोपहर बाद से शुरू हुई हल्की बारिश सोमवार शाम तक जारी रही। इससे लोगों को सीजन की पहली ठंड का अहसास हुआ। वहीं खेतों में कटी पड़ी धान की फसल भी भीग गई। हालांकि इस बारिश से इस फसल को नुकसान नहीं है। सुभाष चंद्र, तिलक राज, गुरमीत सिंह, नेकराम, बाबू राम आदि किसानों का कहना है कि रविवार को दोपहर बाद करीब दो बजे घने बादल छा गए और बरसना शुरू किया तो लगा कि गत वर्ष की तरह इस बार भी अवश्य ही हमें धान की फसल से हाथ धोना पड़ेगा। मगर राहत की बात यह रही कि रात भर तेज हवा के साथ ओलावृष्टि नहीं हुई, वरना खेतों में कटी पड़ी धान की फसल बरबाद हो जाती।
वहीं इस बारिश से मात्र गेहूं बिजाई व फसल समेटने में देरी जरूर होगी। मगर मंगलवार को सारा दिन खिली धूप से काफी राहत मिली है। बुधवार को भी इसी प्रकार मौसम में निखार रहा तो वीरवार से फिर फंडाई (झाड़ने) का कार्य शुरू हो जाएगा, जबकि सोमवार तक गेहूं रोपाई के लिए खेत भी तैयार हो जाएंगे।
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घान की फसल सुखाने में जुटे किसान
परगवाल। सीमा क्षेत्र परगवाल में किसान मौजूदा समय धान की फसल को सुखाने में जुटे हैं। इसके लिए किसानों ने खेतों में डेरा डाला हुआ है। स्थानीय किसान गणेश सिंह ने बताया कि जल्दी पकने वाली धान की फसल को वह बारिश होने से पहले समेट चुके थे, लेकिन उनकी बासमती अभी खेतों में ही पड़ी थी। इसको वह समेटने में जुटे थे। वहीं फसल गीली होने से वह मायूस हैं। हालांकि उन्होंने बारिश से ज्यादा नुकसान नहीं होने की बात कही। किसान केहर राम ने कहा कि इस सीजन क्षेत्र में प्रवासी श्रमिकों के ज्यादा संख्या में नहीं पहुंचने से ज्यादातर किसान अपनी बासमती फसल समय से पहले नहीं समेट पाए। इस कारण उनकी फसल खेतों में पड़ी भीग गई, जिसको लेकर किसान चिंतित हैं। उनका कहना था कि अगर इसी तरह धूप खिली रही तो वह थोडे़ दिनों के अंदर फसल सुखा लेंगे। उन्होंने बारिश से फसल को थोड़ा नुकसान होने की बात कही। संवाद
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बारिश ने धान की कटाई में लगे किसानों के कदम रोके
ज्यौड़ियां। खौड़ तथा ज्यौड़ियां में बासमती धान को समेटने का काम जोरों से चल रहा है, लेकिन बारिश ने कटाई में जुटे किसानों के कदम रोक दिए हैं। किसानों के मुताबिक बारिश तथा तेज हवा से बासमती की खड़ी फसल जमीन पर लेट गई है। जो फसल कटी है वह बारिश से भीग गई है। किसानों के अनुसार धान को समेटने के कार्य में अब 10 दिन देरी हो सकती है। क्योंकि जो फसल कटी हुई है उसका सूखने का इंतजार करना पड़ रहा है। किसान तरसेम सिंह, करनैल सिंह, सुखदेव सिंह भाऊ आदि ने बताया कि बारिश और तेज हवा से धान की फसल को नुकसान हो गया है। बारिश से भीगी धान के चावल का स्वाद नहीं रहता है। चावल की मिठास खत्म हो जाती है और फीका हो जाता है। संवाद
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रविवार दोपहर बाद से शुरू हुई हल्की बारिश सोमवार शाम तक जारी रही। इससे लोगों को सीजन की पहली ठंड का अहसास हुआ। वहीं खेतों में कटी पड़ी धान की फसल भी भीग गई। हालांकि इस बारिश से इस फसल को नुकसान नहीं है। सुभाष चंद्र, तिलक राज, गुरमीत सिंह, नेकराम, बाबू राम आदि किसानों का कहना है कि रविवार को दोपहर बाद करीब दो बजे घने बादल छा गए और बरसना शुरू किया तो लगा कि गत वर्ष की तरह इस बार भी अवश्य ही हमें धान की फसल से हाथ धोना पड़ेगा। मगर राहत की बात यह रही कि रात भर तेज हवा के साथ ओलावृष्टि नहीं हुई, वरना खेतों में कटी पड़ी धान की फसल बरबाद हो जाती।
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वहीं इस बारिश से मात्र गेहूं बिजाई व फसल समेटने में देरी जरूर होगी। मगर मंगलवार को सारा दिन खिली धूप से काफी राहत मिली है। बुधवार को भी इसी प्रकार मौसम में निखार रहा तो वीरवार से फिर फंडाई (झाड़ने) का कार्य शुरू हो जाएगा, जबकि सोमवार तक गेहूं रोपाई के लिए खेत भी तैयार हो जाएंगे।
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घान की फसल सुखाने में जुटे किसान
परगवाल। सीमा क्षेत्र परगवाल में किसान मौजूदा समय धान की फसल को सुखाने में जुटे हैं। इसके लिए किसानों ने खेतों में डेरा डाला हुआ है। स्थानीय किसान गणेश सिंह ने बताया कि जल्दी पकने वाली धान की फसल को वह बारिश होने से पहले समेट चुके थे, लेकिन उनकी बासमती अभी खेतों में ही पड़ी थी। इसको वह समेटने में जुटे थे। वहीं फसल गीली होने से वह मायूस हैं। हालांकि उन्होंने बारिश से ज्यादा नुकसान नहीं होने की बात कही। किसान केहर राम ने कहा कि इस सीजन क्षेत्र में प्रवासी श्रमिकों के ज्यादा संख्या में नहीं पहुंचने से ज्यादातर किसान अपनी बासमती फसल समय से पहले नहीं समेट पाए। इस कारण उनकी फसल खेतों में पड़ी भीग गई, जिसको लेकर किसान चिंतित हैं। उनका कहना था कि अगर इसी तरह धूप खिली रही तो वह थोडे़ दिनों के अंदर फसल सुखा लेंगे। उन्होंने बारिश से फसल को थोड़ा नुकसान होने की बात कही। संवाद
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बारिश ने धान की कटाई में लगे किसानों के कदम रोके
ज्यौड़ियां। खौड़ तथा ज्यौड़ियां में बासमती धान को समेटने का काम जोरों से चल रहा है, लेकिन बारिश ने कटाई में जुटे किसानों के कदम रोक दिए हैं। किसानों के मुताबिक बारिश तथा तेज हवा से बासमती की खड़ी फसल जमीन पर लेट गई है। जो फसल कटी है वह बारिश से भीग गई है। किसानों के अनुसार धान को समेटने के कार्य में अब 10 दिन देरी हो सकती है। क्योंकि जो फसल कटी हुई है उसका सूखने का इंतजार करना पड़ रहा है। किसान तरसेम सिंह, करनैल सिंह, सुखदेव सिंह भाऊ आदि ने बताया कि बारिश और तेज हवा से धान की फसल को नुकसान हो गया है। बारिश से भीगी धान के चावल का स्वाद नहीं रहता है। चावल की मिठास खत्म हो जाती है और फीका हो जाता है। संवाद