'अफजल को फांसी दे दी है, आप संभाल लेना'
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का कहना है कि यूपीए सरकार की ओर से संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु को विवादास्पद तरीके से फांसी राजनीतिक कारणों से दी गई थी। रविवार को उमर ने कहां कि उन्हें फांसी की सूचना अंतिम समय में दी गई।
वह दिल्ली में उस वक्त अपनी बहन के साथ रेस्टोरेंट में खाना खा रहे थे, जब उन्हें तत्कालीन गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे का फोन आया। शिंदे ने उमर को बताया कि उन्होंने कागजात पर हस्ताक्षर कर दिए हैं और अगली सुबह गुरु को फांसी पर लटकाया जाएगा इसलिए वह न्याय और कानून व्यवस्था का बंदोबस्त करें।
उमर ने कहा कि मैंने उनसे पूछा कि वे निश्चित हैं कि अब कुछ नहीं किया जा सकता। इस पर शिंदे ने कहा कि नहीं अब मैंने हस्ताक्षर कर दिए हैं और वारंट जारी हो चुका है और मुझे (उमर को) इसके प्रभावों से निपटने के लिए कहा। उमर ने कहा कि यह सच है भले ही हमें यह अच्छा लगे या नहीं लेकिन उसे राजनीतिक कारणों से फांसी दी गई।
राजनीतिक नहीं थी अफजल की फांसी: शिंदे
अफजल गुरु को 9 फरवरी 2013 को फांसी पर लटकाया गया था। अफजल के परिजनों को टीवी के जरिए फांसी की सूचना मिलने पर विवाद उत्पन्न हो गया था। 2014 में विधानसभा चुनाव हारने वाले नेशनल कांफ्रेंस के कार्यकारी अध्यक्ष ने कहा कि गुरु का मामला उनके लिए लटकती हुई तलवार के समान था।
पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला के दावे जिसमें यूपीए सरकार की ओर से संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु को राजनीतिक कारणों से फांसी दिए जाने, को खारिज कर दिया। शिंदे ने कहा कि यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट का था। सुप्रीम कोर्ट में यह मामला गुरु के खिलाफ गया था।
उसकी दया याचिका खारिज हो चुकी थी। यह निर्णय (अफजल को फांसी) इस मामले से जुड़े सभी निर्णयों के बाद लिया गया। यह राजनीतिक निर्णय नहीं था।