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Jammu kashmir News : संघर्ष विराम समझौते के बाद माच्छिल सेक्टर के लोग जी रहे हैं अमन की जिंदगी 

अमृतपाल सिंह बाली, माच्छिल सेक्टर Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 29 Jun 2022 04:22 AM IST
सार

सीमावर्ती गांव के लोग बोले इन फिजाओं में अब बारूद की गंध नहीं आती। सेना ने संभाली एलओसी से सटे दुद्धी, पोश्वारी व अन्य इलाकों के विकास की कमान।

दुद्धी गांव
दुद्धी गांव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

उत्तरी कश्मीर के सीमावर्ती जिले कुपवाड़ा के माच्छिल सेक्टर में  नियंत्रण रेखा (एलओसी) से सटे अंतिम गावों में रहने वाले लोगों के जीवन में सुकून आ गया है। फरवरी 2021 में संघर्ष विराम समझौते के बाद अब वे अमन - चैन की जिंदगी जी रहे हैं। गांव वासियों का कहना है कि कई दशकों के बाद वह बेखौफ होकर खुली हवा में सांस ले रहे हैं। इन फिजाओं में अब बारूद की गंध नहीं आती। 


 संघर्ष विराम समझौते से पहले माच्छिल सेक्टर के दुद्धी गांव के लोग सीमापार से होने वाली भीषण गोलाबारी से सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। गांव के मोहम्मद लतीफ खान कहते हैं कि अक्तूबर 2019 में रात करीब 8 बजे इस इलाके में संघर्ष विराम का उल्लंघन हुआ था। इसमें उनका पूरा परिवार घायल हो गया था। दो घर भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए।


लतीफ ने कहा कि उन्होंने कर्ज लिया और अपने बच्चों का इलाज करवाया। एक बेटे ने अपना हाथ खो दिया। मैं उन्हें स्कूल भेज रहा हूं, लेकिन जख्मों के कारण वे पुलिस या सेना में नहीं जा सकते। हम पिछले एक साल से संघर्ष विराम समझौते के कारण शांति से रह रहे हैं। हम दोनों सरकारों से आगे भी शांति बनाए रखने का अनुरोध करते हैं।

एक अन्य ग्रामीण परवेज अहमद शेख ने कहा कि अब हम यहां सुरक्षित हैं और खुशी से रह रहे हैं। लोग अब खेतों में बिना किसी भय के काम कर रहे हैं। अपने व्यवसाय में लगे हैं। इससे पहले गोलाबारी से कई गांव और लोग प्रभावित हुए जिन्हें अभी तक मुआवजा नहीं दिया गया है।  

सड़कें हुईं बेहतर, संचार का संकट
एलओसी से सटे एक अन्य गांव पोश्वारी के रहने वाले हबीबुल्ला मौलवी ने बताया कि जब से समझौता हुआ है तबसे सेना भी विकास कार्यों की ओर ध्यान दे रही है, ताकि यहां के स्थानीय लोगों की जिंदगी में बदलाव लाया जा सके। हबीबुल्ला ने कहा कि सड़क संपर्क में काफी सुधार आया है। अब उनकी मांग है कि उनके गांव में भी मोबाइल टावर लगाए जाएं, क्योंकि टावर न होने के चलते उन्हें फोन सुनने और करने के लिए माच्छिल जाना पड़ता है।             

नागरिक सुविधाओं के साथ रोजगार भी दे रही सेना 
खूबसूरती से लबरेज इन सुदूर गांवों के विकास में सेना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। सड़क, बिजली, शिक्षा और रोजगार के अवसर मुहैया कराने से लेकर सेना इन लोगों की मदद के लिए दिन रात काम कर रही है। सेना के एक अधिकारी ने बताया कि संघर्ष विराम समझौते से पहले हम लोग आतंकी गतिविधियों के साथ निपटने में व्यस्त रहते थे लेकिन जब से समझौता हुआ है तब से हम लोगों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए काम कर रहे हैं। 

अग्रिम इलाकों को पर्यटन के लिए खोलने की कोशिश
प्रदेश सरकार भी नियंत्रण रेखा के पास के इन अग्रिम इलाकों को पर्यटन के लिए खोलने की कोशिश कर रही है। हाल ही में कुछ महीने पहले एलओसी से सटे केरन सेक्टर में स्थानीय लोगों ने होम स्टे खोले हैं, ताकि पर्यटक इन इलाकों में आराम से घूमने के लिए आ सकें।

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