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J&K: कश्मीर के बाद अब जम्मू में भी होगी उच्च जोखिम संक्रमित बीमारियों की पहचान, होगी समय की बचत
Tue, 19 Mar 2024 03:18 PM IST
kumar गुलशन कुमार
अमित कुमार, जम्मू
अमित कुमार, जम्मू
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Tue, 19 Mar 2024 03:18 PM IST
सार
जीएमसी जम्मू के माइक्रोबायोलाजी विभाग में अप्रैल से बीएसएल-3 (बायो सेफ्टी लेवल) लैब को शुरू करने की तैयारी की जा रही है।
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gmc jammu
- फोटो : संवाद
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विस्तार
सार्स, कोविड, जीका और स्वाइन फ्लू जैसी उच्च जोखिम वाली संक्रमित बीमारियों की जल्द पहचान कश्मीर के बाद अब जम्मू संभाग भी हो पाएगी। इसी कड़ी में जीएमसी जम्मू के माइक्रोबायोलाजी विभाग में अप्रैल से बीएसएल-3 (बायो सेफ्टी लेवल) लैब को शुरू करने की तैयारी की जा रही है।
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अभी तक कोविड और दूसरी उच्च जोखिम संक्रमित बीमारियों के सैंपल को आईसीएमआर-एनआईवी पुणे आदि लैब में भेजा जा रहा था। लेकिन जीएमसी में बीएसएल-3 लैब में उक्त सभी टेस्ट होने से संक्रमण के प्रसार को रोकने के साथ पीड़ितों को उचित चिकित्सा देखभाल में मदद मिलेगी। भविष्य में इस लैब का पठानकोट और हिमाचल प्रदेश के चिकित्सा संस्थानों को भी लाभ मिलेगा।
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जीएमसी जम्मू में कोविड के दौरान जांच करते समय बड़ी संख्या में डॉक्टर और चिकित्सा स्टाफ संक्रमित हो गया था, क्योंकि यहां बीएसएल-3 लैब की कोई सुविधा नहीं थी और सभी टेस्ट खुले वातावरण में हो रहे थे। इससे आसपास के लोग संक्रमण की चपेट में आते गए। मगर बीएसएल-3 लैब में पूरी तरह से सुरक्षित वातावरण में परीक्षण किए जाते हैं।
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लैब में हवा भी 100 प्रतिशत फिल्टर होकर भीतर जाती है। लैब में ही पानी आदि तरल पदार्थों का उत्पादन होता है और उसे एक उच्च प्रक्रिया के बाद बाहर भेजा जाता है। इससे उच्च जोखिम संक्रमित बीमारियों के वायरस, वैक्टीरिया आदि के खुले वातावरण में आने का कोई मौका नहीं रहता है।
यह संक्रमण खुले में पहुंचकर मानव शरीर को भारी हानि पहुंचाते हैं। लैब में गंभीर परीक्षण के साथ भविष्य में उच्च जोखिम संक्रमित बीमारियों की रोकथाम के लिए शोध भी किए जाते हैं।