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Jammu News: जम्मू-कश्मीर में एआई के इस्तेमाल की तैयारी तेज
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- 20 से अधिक संगठनों ने रखे 30 से ज्यादा एआई समाधान, विभागों ने परखे पायलट प्रोजेक्ट
- कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा, परिवहन और आपदा प्रबंधन में एआई उपयोग पर मंथन
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर में सरकारी कामकाज और जनसेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के इस्तेमाल की दिशा में कदम बढ़ाए गए हैं। आईआईटी जम्मू में मेइटी एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, जम्मू-कश्मीर की ओर से एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ एआई समाधान प्रदाताओं, स्टार्टअप, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और तकनीकी विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।
कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने सरकारी विभागों में एआई आधारित व्यावहारिक और मापनीय पहल आगे बढ़ाने पर जोर दिया। कार्यशाला में 20 से अधिक संगठनों ने 30 से ज्यादा एआई समाधान संभावित पायलट परियोजनाओं के लिए प्रस्तुत किए। कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं कौशल, शासन व आंतरिक सुरक्षा, लोक निर्माण, परिवहन, आपदा प्रबंधन और ऊर्जा से जुड़े समाधान प्रस्तुत किए गए।
विभागीय अधिकारियों ने समाधानों का आकलन डाटा की उपलब्धता, तकनीकी तैयारी, बुनियादी ढांचे की जरूरत, लागत, समयसीमा, संभावित परिणाम और भविष्य में विस्तार की क्षमता के आधार पर किया। समाधान प्रदाताओं और आईआईटी जम्मू के विशेषज्ञों के साथ विभागवार चर्चा में संभावित उपयोग के मामलों की पहचान की गई।
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कार्यशाला में विभागों ने मुख्य सचिव के समक्ष अपने एआई पायलट रोडमैप भी प्रस्तुत किए। इनमें प्रस्तावित पायलट, अपेक्षित परिणाम, संसाधन और विभिन्न विभागों से जुड़ी आवश्यकताओं को शामिल किया गया। आईआईटी जम्मू के निदेशक प्रो. मनोज सिंह गौर ने सरकार, अकादमिक संस्थानों, उद्योग और स्टार्टअप के बीच सहयोग को महत्वपूर्ण बताया।
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30 से अधिक एआई समाधानों पर विभागों ने किया मंथन
कार्यशाला में 20 से अधिक संगठनों ने जम्मू-कश्मीर में संभावित इस्तेमाल के लिए 30 से ज्यादा एआई समाधान प्रस्तुत किए। इनमें कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, शासन, आंतरिक सुरक्षा, लोक निर्माण, परिवहन, आपदा प्रबंधन और ऊर्जा से जुड़े समाधान शामिल रहे। विभागीय अधिकारियों ने समाधान प्रदाताओं के साथ उनकी उपयोगिता, डाटा की जरूरत, लागत, बुनियादी ढांचे और संभावित परिणामों पर चर्चा की। इसके बाद विभागों ने संभावित एआई परियोजनाओं के पायलट रोडमैप तैयार कर मुख्य सचिव के समक्ष प्रस्तुत किए।
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- कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा, परिवहन और आपदा प्रबंधन में एआई उपयोग पर मंथन
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर में सरकारी कामकाज और जनसेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के इस्तेमाल की दिशा में कदम बढ़ाए गए हैं। आईआईटी जम्मू में मेइटी एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, जम्मू-कश्मीर की ओर से एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ एआई समाधान प्रदाताओं, स्टार्टअप, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और तकनीकी विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।
कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने सरकारी विभागों में एआई आधारित व्यावहारिक और मापनीय पहल आगे बढ़ाने पर जोर दिया। कार्यशाला में 20 से अधिक संगठनों ने 30 से ज्यादा एआई समाधान संभावित पायलट परियोजनाओं के लिए प्रस्तुत किए। कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं कौशल, शासन व आंतरिक सुरक्षा, लोक निर्माण, परिवहन, आपदा प्रबंधन और ऊर्जा से जुड़े समाधान प्रस्तुत किए गए।
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विभागीय अधिकारियों ने समाधानों का आकलन डाटा की उपलब्धता, तकनीकी तैयारी, बुनियादी ढांचे की जरूरत, लागत, समयसीमा, संभावित परिणाम और भविष्य में विस्तार की क्षमता के आधार पर किया। समाधान प्रदाताओं और आईआईटी जम्मू के विशेषज्ञों के साथ विभागवार चर्चा में संभावित उपयोग के मामलों की पहचान की गई।
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कार्यशाला में विभागों ने मुख्य सचिव के समक्ष अपने एआई पायलट रोडमैप भी प्रस्तुत किए। इनमें प्रस्तावित पायलट, अपेक्षित परिणाम, संसाधन और विभिन्न विभागों से जुड़ी आवश्यकताओं को शामिल किया गया। आईआईटी जम्मू के निदेशक प्रो. मनोज सिंह गौर ने सरकार, अकादमिक संस्थानों, उद्योग और स्टार्टअप के बीच सहयोग को महत्वपूर्ण बताया।
30 से अधिक एआई समाधानों पर विभागों ने किया मंथन
कार्यशाला में 20 से अधिक संगठनों ने जम्मू-कश्मीर में संभावित इस्तेमाल के लिए 30 से ज्यादा एआई समाधान प्रस्तुत किए। इनमें कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, शासन, आंतरिक सुरक्षा, लोक निर्माण, परिवहन, आपदा प्रबंधन और ऊर्जा से जुड़े समाधान शामिल रहे। विभागीय अधिकारियों ने समाधान प्रदाताओं के साथ उनकी उपयोगिता, डाटा की जरूरत, लागत, बुनियादी ढांचे और संभावित परिणामों पर चर्चा की। इसके बाद विभागों ने संभावित एआई परियोजनाओं के पायलट रोडमैप तैयार कर मुख्य सचिव के समक्ष प्रस्तुत किए।