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Jammu News: नगर निगम की सीमा के भीतर आवंटित भूमि का मालिकाना हक नहीं मिलेगा
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- राजस्व विभाग ने जारी की अधिसूचना, कस्टोडियन भूमि पर अतिक्रमण करने वालों के पक्ष में कोई हस्तातंरण नहीं होगा
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। प्रदेश प्रशासन ने 1947, 1965, 1971 और पश्चिम पाकिस्तान विस्थापितों के लिए कस्टोडियन भूमि के हस्तांतरण के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। लेकिन, नगर निगम और नगर समितियों की सीमा के भीतर आवंटित कस्टोडियन भूमि को विस्थापितों को हस्तांतरित नहीं किया जाएगा। इसी तरह कस्टोडियन भूमि पर अतिक्रमण करने वालों के पक्ष में भी कोई हस्तांतरण स्वीकृत नहीं किया जाएगा।
भूमि के हस्तांतरण के संदर्भ में राजस्व विभाग की ओर से जारी एक आदेश में कुछ नियम व शर्तें रखी गई हैं। 1947 के डीपीएस (विस्थापितों) के मामले में किरायेदारी अधिकारों के हस्तांतरण के लिए पावर ऑफ अटॉर्नी को वैध दस्तावेज नहीं माना जाएगा। विस्थापित जम्मू-कश्मीर भूमि राजस्व अधिनियम के तहत आवासीय उद्देश्य, कृषि से संबंधित गतिविधियों को छोड़कर किसी अन्य उपयोग के लिए भूमि को परिवर्तित नहीं करेंगे।
इसी तरह पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) 1947 के विस्थापितों के मामले में जम्मू-कश्मीर कृषि सुधार अधिनियम, 1976 की धारा 3-ए के तहत कोई भी आवंटन दस्तावेज, राजस्व विभाग की प्रमाणित कॉपी अथवा म्यूटेशन दस्तावेज उनके पास होना चाहिए। पीओके 1965 व 1971 विस्थापितों के मामले में आवंटन के बाद से कस्टोडियन भूमि पर निरंतर व्यक्तिगत दर्ज की गई खेती को दर्शाने वाले राजस्व रिकॉर्ड की सत्यापित प्रति या सरकारी आदेश के तहत प्रदान की गई वित्तीय सहायता की रसीद की सत्यापित प्रति होनी चाहिए।
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पशिच्म पाकिस्तानी विस्थापितों (डब्ल्यूपीडीपीएस) के मामलों में संबंधित तहसीलदार पूरी जांच के बाद एसीआर अथवा एसडीएम को अपनी सिफारिशें भेजेगा। संबंधित जिलों के सहायक आयुक्त राजस्व और एसडीएम मूल आदेश की जांच करेंगे। दोनों अधिकारी जांच प्रक्रिया के बाद संबंधित जिलों के उपायुक्तों को मामला भेजेंगे। कस्टोडियन संपत्ति के संरक्षक को सभी मूल दस्तावेजों का सत्यापन करना होगा ताकि इन मामलों में फर्जीवाड़ा न हो सके।
डीसी म्यूटेशन की मासिक रिपोर्ट मंडलायुक्त और वित्तीय आयुक्त को सौंपेंगे
जिलों के उपायुक्तों को म्यूटेशन की मासिक प्रगति रिपोर्ट मंडलायुक्त, वित्तीय आयुक्त (राजस्व) को देनी होगी। इसी तरह तहसीलदार, एसीआर, एसडीएम ग्रामीण इलाकों में साप्ताहिक शिविर लगाएंगे, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति इस योजना से वंचित न रह जाए। डीसी कस्टोडियन भूमि पर अवैध कब्जों और अतिक्रमण का सख्ती से निपटारा करेंगे। कस्टोडियन जनरल यह सुनिश्चित करेगा कि भूमि के किसी भी दुरुपयोग, विशेष रूप से अतिक्रमण को रोकने को रोकने के लिए उपाय किए जाएं। अधिकारी 30 दिन में आवेदनों की जांच कर भूमि आवंटित करेंगे। इस प्रक्रिया को छह माह के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। प्रदेश प्रशासन ने 1947, 1965, 1971 और पश्चिम पाकिस्तान विस्थापितों के लिए कस्टोडियन भूमि के हस्तांतरण के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। लेकिन, नगर निगम और नगर समितियों की सीमा के भीतर आवंटित कस्टोडियन भूमि को विस्थापितों को हस्तांतरित नहीं किया जाएगा। इसी तरह कस्टोडियन भूमि पर अतिक्रमण करने वालों के पक्ष में भी कोई हस्तांतरण स्वीकृत नहीं किया जाएगा।
भूमि के हस्तांतरण के संदर्भ में राजस्व विभाग की ओर से जारी एक आदेश में कुछ नियम व शर्तें रखी गई हैं। 1947 के डीपीएस (विस्थापितों) के मामले में किरायेदारी अधिकारों के हस्तांतरण के लिए पावर ऑफ अटॉर्नी को वैध दस्तावेज नहीं माना जाएगा। विस्थापित जम्मू-कश्मीर भूमि राजस्व अधिनियम के तहत आवासीय उद्देश्य, कृषि से संबंधित गतिविधियों को छोड़कर किसी अन्य उपयोग के लिए भूमि को परिवर्तित नहीं करेंगे।
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इसी तरह पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) 1947 के विस्थापितों के मामले में जम्मू-कश्मीर कृषि सुधार अधिनियम, 1976 की धारा 3-ए के तहत कोई भी आवंटन दस्तावेज, राजस्व विभाग की प्रमाणित कॉपी अथवा म्यूटेशन दस्तावेज उनके पास होना चाहिए। पीओके 1965 व 1971 विस्थापितों के मामले में आवंटन के बाद से कस्टोडियन भूमि पर निरंतर व्यक्तिगत दर्ज की गई खेती को दर्शाने वाले राजस्व रिकॉर्ड की सत्यापित प्रति या सरकारी आदेश के तहत प्रदान की गई वित्तीय सहायता की रसीद की सत्यापित प्रति होनी चाहिए।
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पशिच्म पाकिस्तानी विस्थापितों (डब्ल्यूपीडीपीएस) के मामलों में संबंधित तहसीलदार पूरी जांच के बाद एसीआर अथवा एसडीएम को अपनी सिफारिशें भेजेगा। संबंधित जिलों के सहायक आयुक्त राजस्व और एसडीएम मूल आदेश की जांच करेंगे। दोनों अधिकारी जांच प्रक्रिया के बाद संबंधित जिलों के उपायुक्तों को मामला भेजेंगे। कस्टोडियन संपत्ति के संरक्षक को सभी मूल दस्तावेजों का सत्यापन करना होगा ताकि इन मामलों में फर्जीवाड़ा न हो सके।
डीसी म्यूटेशन की मासिक रिपोर्ट मंडलायुक्त और वित्तीय आयुक्त को सौंपेंगे
जिलों के उपायुक्तों को म्यूटेशन की मासिक प्रगति रिपोर्ट मंडलायुक्त, वित्तीय आयुक्त (राजस्व) को देनी होगी। इसी तरह तहसीलदार, एसीआर, एसडीएम ग्रामीण इलाकों में साप्ताहिक शिविर लगाएंगे, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति इस योजना से वंचित न रह जाए। डीसी कस्टोडियन भूमि पर अवैध कब्जों और अतिक्रमण का सख्ती से निपटारा करेंगे। कस्टोडियन जनरल यह सुनिश्चित करेगा कि भूमि के किसी भी दुरुपयोग, विशेष रूप से अतिक्रमण को रोकने को रोकने के लिए उपाय किए जाएं। अधिकारी 30 दिन में आवेदनों की जांच कर भूमि आवंटित करेंगे। इस प्रक्रिया को छह माह के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।