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तंग गलियों में भी अब लोग बना सकेंगे मकान, कर सकेंगे मरम्मत

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जम्मू। शहर में अब घर बनाना और मरम्मत कार्य को आसान बनाने के लिए नगर निगम ने भवन निर्माण अनुमति नियमों में संशोधन को मंजूरी दे दी है। सोमवार को बुलाए गए विशेष सत्र में 28 में से 25 संशोधन को मंजूरी दी गई है, जबकि तीन पर चर्चा में सहमति नहीं बनी है। इस पर तीन माह में आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं। अब तंग गलियां होने के बावजूद गृह निर्माण करने में दिक्कत नहीं होगी। इसके संशोधन को मंजूरी मिल गई है।
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सोमवार को मेयर चंद्र मोहन गुप्ता, डिप्टी मेयर पूर्णिमा शर्मा और आयुक्त अवनी लवासा की अध्यक्षता में विशेष सत्र का आयोजन हुआ, जिसमें 28 से ज्यादा बिंदुओं पर मंथन किया गया है। इसमें पार्षदों ने भी सुझाव दिए हैं। करीब दो घंटे तक चले विशेष सत्र में 25 संशोधनों को मंजूरी दी गई है। वहीं, तीन पर सहमति नहीं बनी है, जिनके लिए तीन माह तक सुझाव मांगे गए हैं। पारित संशोधित नियमों को सचिवालय भेजा जाएगा।
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सत्र में पुराने शहर के कम चौड़े रास्तों की शर्त हटाने पर सहमति बनी है। रास्ते के अनुसार ही गृह निर्माण की अनुमति मिलेगी और शहरवासी मरम्मत भी करवा सकेंगे। पहले सेटबैक के चक्कर में नक्शे ही पास नहीं हो रहे थे। इस कारण लोगों को नए भवन बनाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। इसमें वार्ड एक से 11, 15, 19, 23 और 45 के अलावा तंग गलियों वाले मोहल्लों को शामिल किया गया है। यहां पर कई घरों का निर्माण रुका पड़ा है। विशेष सत्र से पहले रविवार को कमेटी की डिप्टी मेयर पूर्णिमा शर्मा, पार्षद राजेंद्र शर्मा, पवन सिंह और सुमित कुमार की उपस्थिति में बैठक हो चुकी है। इसमें 28 से ज्यादा बिंदुओं पर प्रस्ताव तैयार किए गए थे। अब तीन माह तक लोग अपने सुझाव दे सकते हैं। इन नियमों में सुझाव भी जुड़ जाएंगे।
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फ्लैट निर्माण में शेल्टर फीस को 25 प्रतिशत निर्धारित
फ्लैट निर्माण में शेल्टर फीस को 25 प्रतिशत तक निर्धारित कर दिया गया है। फ्लोर एरिया अनुपात को पांच से दस प्रतिशत तक बढ़ाने पर सहमति बनी है। इसमें नगर निगम सिर्फ अपनी फीस ही काटेगा। लेबर सेस श्रम विभाग ही काटेगा। बेसमेंट की अनुमति निशुल्क मिलेगी, जबकि वाणिज्यिक में 25 रुपये प्रति वर्ग फुट के हिसाब से शुल्क देना होगा। चहारदीवारी की शर्त को पांच से सात मीटर किया गया है। इसे अब दो मीटर तक बढ़ा दिया गया है। यह फैसला शहर में बढ़ रही चोरी की वारदातों के चलते लिया गया है। ट्रस्ट की भूमि के लिए नए नियम बनाए गए हैं। इसमें ट्रस्ट सरकार से मान्यता प्राप्त है तो उसेे भवन निर्माण में अनुमति मिलेगी।
धार्मिक स्थलों में भवन निर्माण के लिए निशुल्क मिलेगी मंजूरी
सरकारी भूमि पर जबरन कब्जा नहीं हो सकेगा। धार्मिक स्थलों में भवन निर्माण की अनुमति के लिए फीस अदा नहीं करनी होगी। निर्माण के लिए लंबा इंतजार नहीं करना होगा। असुरक्षित भवन को गिराने के लिए लोक निर्माण विभाग की अनुमति की जरूरत नहीं होगी। इन भवनों को जेएमसी गिराएगा। अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) के लिए अब लैंड टाइटल, बिजली, पानी और सीवरेज की ही अनुमति लेनी होगी। अनुमति के बाद काम शुरू हो सकेगा। पहले एनओसी की लंबी प्रक्रिया थी। आर्थिक रूप से कमजोर और (पीएचएच) लोगों के घरों के निर्माण के लिए शर्त सरल होगी। दो फुट रास्ते का निर्माण होगा। अनुमति के लिए फीस अदा नहीं करनी होगी।
इन मसलों कमेटी देगी अपने सुझाव फिर होगा लागू
इन संशोधन पर सहमति तो बनी लेकिन बेहतरी के लिए कमेटी से सुझाव मांगे गए हैं। बन टाइम टाइटल कंपाउंडिंग फीस लेने, अवैध निर्माण पर नगर निगम की ओर से ही फैसला लेना शामिल है। पहले कानूनों की अवहेलना होती थी। कार्रवाई के बाद स्टे लगता था। ट्रिब्यूनल की ओर से कंपाउंडिंग फीस के निर्देश आते थे। जेएमसी हाईकोर्ट में चुनौती देता था। अब बन टाइम टाइटल कंपाउंडिंग फीस अदा कर छुटकारा पाया जा सकेगा। अवैध रूप से बन चुकी दुकानों के मसले भी हल होंगे। बन टाइम सेंटलमेंट में कॉलोनियां भी व्यवस्थित होंगी।
छूटे बिंदुओं पर कानून बनाने के लिए दे सकते हैं सुझाव
कमेटी को तीन माह के अंदर लोग कानून बनाने के लिए सुझाव दे सकते हैं। कुछ कानूनों पर सहमति नहीं बन पाई है। इन कानूनों में लोगों की सलाह के बाद जनरल हाउस में मसले पर मंथन होगा।

विशेष सत्र में कई प्रस्तावों को पास किया गया है। इन्हें लागू किया जाएगा। हाउस ने मंजूरी दी है। कुछ अवैध निर्माण संबंधी इमारतों पर सहमति नहीं बनी है। इन पर कमेटी तीन माह तक सुझाव लेगी और जनरल हाउस में मसले को रखेगी। अब नियम बनाने के लिए अलग से विशेष सत्र का आयोजन नहीं किया जाएगा। जनरल हाउस में ही कानूनों पर मंथन होगा।
- अतुल गुप्ता, सचिव, नगर निगम
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