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Jammu News: दो दिन तक चलेगा साहित्य, विचारों और संवाद का जश्न
Sun, 05 Oct 2025 02:12 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Sun, 05 Oct 2025 02:12 AM IST
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में 11 अक्तूबर से दो दिवसीय कश्मीर साहित्य महोत्सव (केएलएफ) 2025 शुरू होगा। इसमें शब्दों, संस्कृति और विरासत का जश्न मनाया जाएगा। आयोजकों ने शनिवार को इसकी जानकारी दी।
श्रीकुला फाउंडेशन की प्रमुख पहल बहुप्रतीक्षित कश्मीर साहित्य महोत्सव (केएलएफ) 11-12 अक्टूबर को श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (एसकेआईसीसी) में आयोजित होगा। मिली जानकारी के अनुसार जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा इसका उद्घाटन करेंगे। मुख्य अतिथि के तौर पर डॉ. कर्ण सिंह भी शामिल होंगे।
आयोजन समिति के एडवोकेट जहांजेब अलकाबंद ने शनिवार को संवाददाता सम्मेलन में बताया कि यह ऐतिहासिक महोत्सव साहित्य, विचारों और संवाद का जश्न मनाने के लिए प्रसिद्ध लेखकों, कवियों, पत्रकारों, विचारकों और कलाकारों को एक साथ लाएगा। उन्होंने कहा कि विचारोत्तेजक सत्रों, पैनल चर्चाओं, पुस्तक विमोचन, कविता पाठ और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ केएलएफ रचनात्मकता और प्रेरणा का एक जीवंत संगम होगा।
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इस कार्यक्रम में विविध क्षेत्रों के 50 से अधिक प्रतिष्ठित वक्ता और लेखक भाग लेंगे जहां समकालीन साहित्य, इतिहास, मीडिया, कला, प्रौद्योगिकी और सांस्कृतिक विरासत पर सत्र आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि युवा आवाजों, महिला लेखकों और कश्मीरी साहित्य पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। जहांजेब ने आगे बताया कि इस आयोजन में पुस्तक मेला, कला प्रदर्शनी और कश्मीर की समृद्ध परंपराओं को प्रदर्शित करने वाले भव्य कार्यक्रम शामिल होंगे।
उन्होंने कहा कि करीब 15 युवा कश्मीरी लेखक इसमें भाग ले रहे हैं। अभी भी मौका है, अगर कश्मीरी युवा लेखक हमारे साथ जुड़ना चाहते हैं तो उन्हें भी मंच प्रदान किया जाएगा। उनकी प्रतिभा को लोगों के सामने रखा जाएगा। हमारा मुख्य उद्देश्य ही कश्मीर के साहित्य को आगे लाने है। यह उत्सव घाटी के हृदय में शब्दों, विचारों और संस्कृति का उत्सव है। यह केवल लेखकों और विचारकों का एक समागम नहीं है बल्कि एक जीवंत मंच है जहां कहानियां जीवंत होती हैं। आवाजें सुनी जाती हैं और संवाद समुदायों को जोड़ते हैं।
अलाकाबंद ने कहा कि साहित्य, कला, इतिहास और समकालीन विचारों पर आधारित सत्रों के साथ केएलएफ विविध दृष्टिकोणों को एक साथ लाता है। उभरती प्रतिभाओं को पोषित करता है और स्थानीय तथा वैश्विक दर्शकों के समक्ष कश्मीर की समृद्ध साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करता है।
श्रीकुला फाउंडेशन की नायरा मंजर ने कहा कि इस उत्सव के माध्यम से फाउंडेशन कश्मीर की समृद्ध साहित्यिक विरासत को संरक्षित, सम्मानित और प्रचारित करने का प्रयास करती है। उन्होंने कहा कि यह लेखकों, कवियों और कहानीकारों को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाने का एक मंच प्रदान करता है। साथ ही यह सुनिश्चित करता है कि घाटी की अनूठी आवाजें, परंपराएं और कथाएं आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहें।
इस महोत्सव के दौरान स्थानीय और बाहर से आए कलाकार भी इस मंच के जरिये अपनी प्रतिभा पेश करेंगे। प्रसिद्ध भरतनाट्यम कलाकार एश्वर्या अत्री ने कहा कि कश्मीर विविधता और समृद्ध संस्कृति का भंडार है। कश्मीरी ज्ञान और बुद्धि का ताज है और इसलिए यह महोत्सव यहां आयोजित किया जा रहा है। मैं एक कलाकार होने के नाते गर्व महसूस करती हूं कि मुझे कश्मीर में यह मंच मिला है अपनी कला को प्रदर्शित करने का। हमारी ओर से यह एक कोशिश है और यह आगे भी ऐसे ही जारी रहेगी।
महोत्सव में इन पुस्तकों का होगा विमोचन
- सुशील तंवर की ''''मुखबिर''''
- रूबल नेगी की ''''द स्लम क्वीन''''
- लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) डीपी पांडे की ''''सोलजरिंग विद पैशन''''
- दामिनी पुनिया की ''''राइफलमैन औरंगजेब''''
- अरिंदम मुखर्जी की ''''कॉन्टूर्स ऑफ द ग्रेटर गेम''''
समारोह में अपेक्षित वक्ता
- भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल
- शिक्षाविद विजय धर
- जेके बैंक के एमडी अमिताव चटर्जी
- सैन्य इतिहासकार और फिल्म निर्माता शिव कुणाल वर्मा
- लेखक और वरिष्ठ सैन्य अधिकारी सुशील तंवर
- डीजीपी लद्दाख एसडी सिंह
- रक्षा विश्लेषक अभिजीत अय्यर मित्रा
- लेखक रूबल नेगी लेखक
- वरिष्ठ पत्रकार आरती टिकू
- वरिष्ठ पत्रकार और लेखक इमाद मकदूमी
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श्रीकुला फाउंडेशन की प्रमुख पहल बहुप्रतीक्षित कश्मीर साहित्य महोत्सव (केएलएफ) 11-12 अक्टूबर को श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (एसकेआईसीसी) में आयोजित होगा। मिली जानकारी के अनुसार जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा इसका उद्घाटन करेंगे। मुख्य अतिथि के तौर पर डॉ. कर्ण सिंह भी शामिल होंगे।
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आयोजन समिति के एडवोकेट जहांजेब अलकाबंद ने शनिवार को संवाददाता सम्मेलन में बताया कि यह ऐतिहासिक महोत्सव साहित्य, विचारों और संवाद का जश्न मनाने के लिए प्रसिद्ध लेखकों, कवियों, पत्रकारों, विचारकों और कलाकारों को एक साथ लाएगा। उन्होंने कहा कि विचारोत्तेजक सत्रों, पैनल चर्चाओं, पुस्तक विमोचन, कविता पाठ और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ केएलएफ रचनात्मकता और प्रेरणा का एक जीवंत संगम होगा।
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इस कार्यक्रम में विविध क्षेत्रों के 50 से अधिक प्रतिष्ठित वक्ता और लेखक भाग लेंगे जहां समकालीन साहित्य, इतिहास, मीडिया, कला, प्रौद्योगिकी और सांस्कृतिक विरासत पर सत्र आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि युवा आवाजों, महिला लेखकों और कश्मीरी साहित्य पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। जहांजेब ने आगे बताया कि इस आयोजन में पुस्तक मेला, कला प्रदर्शनी और कश्मीर की समृद्ध परंपराओं को प्रदर्शित करने वाले भव्य कार्यक्रम शामिल होंगे।
उन्होंने कहा कि करीब 15 युवा कश्मीरी लेखक इसमें भाग ले रहे हैं। अभी भी मौका है, अगर कश्मीरी युवा लेखक हमारे साथ जुड़ना चाहते हैं तो उन्हें भी मंच प्रदान किया जाएगा। उनकी प्रतिभा को लोगों के सामने रखा जाएगा। हमारा मुख्य उद्देश्य ही कश्मीर के साहित्य को आगे लाने है। यह उत्सव घाटी के हृदय में शब्दों, विचारों और संस्कृति का उत्सव है। यह केवल लेखकों और विचारकों का एक समागम नहीं है बल्कि एक जीवंत मंच है जहां कहानियां जीवंत होती हैं। आवाजें सुनी जाती हैं और संवाद समुदायों को जोड़ते हैं।
अलाकाबंद ने कहा कि साहित्य, कला, इतिहास और समकालीन विचारों पर आधारित सत्रों के साथ केएलएफ विविध दृष्टिकोणों को एक साथ लाता है। उभरती प्रतिभाओं को पोषित करता है और स्थानीय तथा वैश्विक दर्शकों के समक्ष कश्मीर की समृद्ध साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करता है।
श्रीकुला फाउंडेशन की नायरा मंजर ने कहा कि इस उत्सव के माध्यम से फाउंडेशन कश्मीर की समृद्ध साहित्यिक विरासत को संरक्षित, सम्मानित और प्रचारित करने का प्रयास करती है। उन्होंने कहा कि यह लेखकों, कवियों और कहानीकारों को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाने का एक मंच प्रदान करता है। साथ ही यह सुनिश्चित करता है कि घाटी की अनूठी आवाजें, परंपराएं और कथाएं आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहें।
इस महोत्सव के दौरान स्थानीय और बाहर से आए कलाकार भी इस मंच के जरिये अपनी प्रतिभा पेश करेंगे। प्रसिद्ध भरतनाट्यम कलाकार एश्वर्या अत्री ने कहा कि कश्मीर विविधता और समृद्ध संस्कृति का भंडार है। कश्मीरी ज्ञान और बुद्धि का ताज है और इसलिए यह महोत्सव यहां आयोजित किया जा रहा है। मैं एक कलाकार होने के नाते गर्व महसूस करती हूं कि मुझे कश्मीर में यह मंच मिला है अपनी कला को प्रदर्शित करने का। हमारी ओर से यह एक कोशिश है और यह आगे भी ऐसे ही जारी रहेगी।
महोत्सव में इन पुस्तकों का होगा विमोचन
- सुशील तंवर की ''''मुखबिर''''
- रूबल नेगी की ''''द स्लम क्वीन''''
- लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) डीपी पांडे की ''''सोलजरिंग विद पैशन''''
- दामिनी पुनिया की ''''राइफलमैन औरंगजेब''''
- अरिंदम मुखर्जी की ''''कॉन्टूर्स ऑफ द ग्रेटर गेम''''
समारोह में अपेक्षित वक्ता
- भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल
- शिक्षाविद विजय धर
- जेके बैंक के एमडी अमिताव चटर्जी
- सैन्य इतिहासकार और फिल्म निर्माता शिव कुणाल वर्मा
- लेखक और वरिष्ठ सैन्य अधिकारी सुशील तंवर
- डीजीपी लद्दाख एसडी सिंह
- रक्षा विश्लेषक अभिजीत अय्यर मित्रा
- लेखक रूबल नेगी लेखक
- वरिष्ठ पत्रकार आरती टिकू
- वरिष्ठ पत्रकार और लेखक इमाद मकदूमी