{"_id":"6838cff37d8b013b8b0b3f53","slug":"a-group-of-displaced-kashmiri-pandits-will-go-to-pahalgam-from-jammu-today-jammu-news-c-10-jam1005-624987-2025-05-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jammu News: विस्थापित कश्मीरी पंडितों का दल जम्मू से आज जाएगा पहलगाम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jammu News: विस्थापित कश्मीरी पंडितों का दल जम्मू से आज जाएगा पहलगाम
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। विस्थापित कश्मीरी पंडितों का एक दल शुक्रवार को जम्मू से पहलगाम के लिए रवाना होगा। टूरिस्ट रिसेप्शन सेंटर से यह जत्था बसों में सवार होकर घाटी की ओर निकलेगा। इस यात्रा का उद्देश्य कश्मीरी मुसलमानों के साथ साझा विरासत और भाईचारे को मजबूत करना है। यह जानकारी आलव (इनिशिएटिव फॉर रिटर्न ओवर मदरलैंड) के आयोजक डॉ. संदीप मावा ने प्रेस क्लब जम्मू में पत्रकारों को दी।
डॉ. मावा ने कहा कि कश्मीरी पंडित पहलगाम के बायसरन में आतंकी हमले में मारे गए निर्दोष पर्यटकों को श्रद्धांजलि देंगे। इसके बाद कश्मीरी मुसलमानों के साथ मिलकर एक एकता यात्रा निकाली जाएगी। उन्होंने कहा आलव का अर्थ होता है जब कोई आपको पुकारता या बुलाता है। कश्मीर हमारी मातृभूमि है और वह हमें बुला रही है। डॉ. मावा ने कहा कि हर कश्मीरी पंडित वापस जाना चाहता है, लेकिन कुछ राजनीतिक कारणों और भीतरघात की वजह से यह संभव नहीं हो पा रहा है। इसमें एक प्रतिशत कश्मीरी मुसलमानों के साथ-साथ कुछ कश्मीरी पंडित भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि हम 34 वर्षों से विस्थापन का दंश झेल रहे हैं। अब हम अपनी शर्तों पर घर वापसी चाहते हैं। उन्होंने सरकार के सामने मजबूत सुरक्षा ग्रिड, आर्थिक और रोजगार पैकेज, हर जिले में सेफ लिविंग जोन, कश्मीरी पंडितों के लिए विशेष बजट, कश्मीर में आईटी हब की स्थापना, 1989 में बेची गई संपत्तियों को अमान्य मानना और कश्मीरी पंडितों को अल्पसंख्यक का दर्जा देने जैसे शर्तें रखीं। अगर सरकार अगर इन शर्तों को मानती तो कश्मीरी पंडित घाटी में वापस के लिए तैयार है।
उन्होंने बताया कि गुगल फॉर्म के जरिये कराए गए एक ऑनलाइन सर्वे में 1800 कश्मीरी पंडित परिवारों ने घाटी लौटने की इच्छा जताई है। अब समय आ गया है कि हम वापसी करें।उन्होंने जम्मू के लोगों का आभार जताया, जिन्होंने विस्थापन के समय कश्मीरी पंडितों को सहारा दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
जम्मू। विस्थापित कश्मीरी पंडितों का एक दल शुक्रवार को जम्मू से पहलगाम के लिए रवाना होगा। टूरिस्ट रिसेप्शन सेंटर से यह जत्था बसों में सवार होकर घाटी की ओर निकलेगा। इस यात्रा का उद्देश्य कश्मीरी मुसलमानों के साथ साझा विरासत और भाईचारे को मजबूत करना है। यह जानकारी आलव (इनिशिएटिव फॉर रिटर्न ओवर मदरलैंड) के आयोजक डॉ. संदीप मावा ने प्रेस क्लब जम्मू में पत्रकारों को दी।
डॉ. मावा ने कहा कि कश्मीरी पंडित पहलगाम के बायसरन में आतंकी हमले में मारे गए निर्दोष पर्यटकों को श्रद्धांजलि देंगे। इसके बाद कश्मीरी मुसलमानों के साथ मिलकर एक एकता यात्रा निकाली जाएगी। उन्होंने कहा आलव का अर्थ होता है जब कोई आपको पुकारता या बुलाता है। कश्मीर हमारी मातृभूमि है और वह हमें बुला रही है। डॉ. मावा ने कहा कि हर कश्मीरी पंडित वापस जाना चाहता है, लेकिन कुछ राजनीतिक कारणों और भीतरघात की वजह से यह संभव नहीं हो पा रहा है। इसमें एक प्रतिशत कश्मीरी मुसलमानों के साथ-साथ कुछ कश्मीरी पंडित भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि हम 34 वर्षों से विस्थापन का दंश झेल रहे हैं। अब हम अपनी शर्तों पर घर वापसी चाहते हैं। उन्होंने सरकार के सामने मजबूत सुरक्षा ग्रिड, आर्थिक और रोजगार पैकेज, हर जिले में सेफ लिविंग जोन, कश्मीरी पंडितों के लिए विशेष बजट, कश्मीर में आईटी हब की स्थापना, 1989 में बेची गई संपत्तियों को अमान्य मानना और कश्मीरी पंडितों को अल्पसंख्यक का दर्जा देने जैसे शर्तें रखीं। अगर सरकार अगर इन शर्तों को मानती तो कश्मीरी पंडित घाटी में वापस के लिए तैयार है।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि गुगल फॉर्म के जरिये कराए गए एक ऑनलाइन सर्वे में 1800 कश्मीरी पंडित परिवारों ने घाटी लौटने की इच्छा जताई है। अब समय आ गया है कि हम वापसी करें।उन्होंने जम्मू के लोगों का आभार जताया, जिन्होंने विस्थापन के समय कश्मीरी पंडितों को सहारा दिया।
विज्ञापन