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दो साल से किडनी प्रत्यारोपण ठंडे बस्ते में

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दो साल से किडनी प्रत्यारोपण ठंडे बस्ते में
जम्मू। जम्मू-कश्मीर मानव अंग प्रत्यारोपण (संशोधन) विधेयक 2018 को मंजूरी मिलने के बावजूद सुपर स्पेशलिटी अस्पताल जम्मू के नेफ्रोलॉजी विभाग में किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा को शुरू करने में गति नहीं मिल पाई है। इसके लिए नेफ्रोलॉजी सहित अन्य संबंधित विभागों के ढांचे का विस्तार किया गया है, मगर पिछले दो साल से प्रत्यारोपण के लिए उपकरणों की खरीद को लेकर पेंच फंसा हुआ है।
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प्रत्यारोपण की सुविधा के लिए नेफ्रोलॉजी यूनिट को अपग्रेड करने के साथ आपरेशन थियेटर का विस्तार किया गया। पूर्व गठबंधन सरकार की ओर से जुलाई 2018 में किडनी प्रत्यारोपण को शुरू करने की घोषणा की गई थी। इसके लिए जीएमसी फैकल्टी सदस्यों की कमेटी गठित की गई। इसमें ढांचे और अन्य जरूरी संसाधनों व उपकरणों की रिपोर्ट तैयार कर जीएमसी प्रशासन को सितंबर 2018 में सौंपी गई, लेकिन इसे अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। पूर्व सरकार के जाने के बाद कुछ खास नहीं हो पाया है। फैकल्टी सदस्यों की कमेटी में शामिल रहे नेफ्रोलॉजी विभाग के पूर्व एचओडी डॉ. एसके बाली ने बताया कि प्रत्यारोपण सुविधा के लिए रिपोर्ट तैयार करके दी गई थी। सुपर स्पेशलिटी के नेफ्रोलॉजी यूनिट में हर साल दो हजार से ज्यादा किडनी के नए मरीज पहुंच रहे हैं। इसमें 25-40 आयु वर्ग के किडनी क्रोनिक फेलियर मरीजों की तादाद बढ़ी है। ऐसे मरीजों को डायलेसिस के सहारे कुछ समय रखा जाता है। लेकिन स्थायी चिकित्सा के लिए किडनी प्रत्यारोपण की जरूरत पड़ती है। जिसके लिए उन्हें पड़ोसी राज्यों का रुख करना पड़ रहा है। नेफ्रोलॉजी यूनिट में वर्ष 2013 से कोई नई डायलेसिस मशीन नहीं खरीदी गई है। एक साल पहले परचेज कमेटी ने दस डायलेसिस मशीनों को मंजूरी दी थी। लेकिन अब तक जीएमसी प्रशासन उन्हें खरीदने में हिम्मत नहीं दिखा पाया है।
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ढांचा तैयार, उपकरणों का इंतजार-प्रिंसिपल
जीएमसी जम्मू की प्रिंसिपल डॉ. सुनंदा रैना का कहना है कि किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा के लिए सुपर स्पेशलिटी में जरूरी ढांचा तैयार किया गया है, जिसमें उपकरणों की खरीद की जानी है। वित्त विभाग की ओर से रीनल ट्रांसप्लांट सेंटर के लिए 15 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।
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