{"_id":"5a5bb3b54f1c1b7f268b46cb","slug":"81515959221-jammu-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरकार के करोड़ो खर्च करने के बावजूद, किराए की इमारत में चल रहे हैं स्कूल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सरकार के करोड़ो खर्च करने के बावजूद, किराए की इमारत में चल रहे हैं स्कूल
Updated Mon, 15 Jan 2018 06:43 PM IST
विज्ञापन
- फोटो : डेमो फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उधमपुर। स्कूली शिक्षा में करोड़ों रुपये की योजनाएं शुरू करने के बावजूद आज भी जिला उधमपुर में 70 के करीब प्राइमरी स्कूल किराए की इमारतों में चल रहे हैं। जहां विद्यार्थियों को पीने का पानी, शौचालय व अन्य कई तरह की सुविधाएं नहीं मिल पा रही है।
सरकारी स्कूल के विद्यार्थियों को गुणवत्ता भरी शिक्षा प्रदान करने के लिए सरकार की तरफ से सर्व शिक्षा अभियान व अन्य कई तरह की योजनाएं शुरू की गई हैं, लेकिन इसके बावजूद कई सरकारी स्कूलों को अपनी इमारत नहीं मिल पा रही है।
जिला उधमपुर में विद्यार्थियों को गुणवत्ता भरी शिक्षा प्रदान करने के लिए शहर और ग्रामीण इलाकों में सरकार की तरफ से 899 सरकारी प्राइमरी स्कूल खोले गए हैं। इनमें से 70 के करीब प्राइमरी स्कूल आज भी एक या फिर दो कमरे की किराए की इमारतों में चल रहे हैं।
विज्ञापन
किराए की इमारत में विद्यार्थियों को बिठाने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं होने के कारण मजबूरी में शिक्षकों को विद्यार्थियों को बाहर खुले में बिठाना पड़ता है। तेज धूप और बारिश के दौरान तो विद्यार्थियों और शिक्षकों की परेशानी कई गुणा बढ़ जाती है।
किराए की इमारतों में विद्यार्थियों के बैठने के लिए शौचालय और पीने के पानी की सुविधा मौजूद नहीं है। किराए की इमारतों में पढ़ाने में शिक्षकों को भी काफी परेशानियों से जूझना पड़ रहा है।
विज्ञापन
सरकारी स्कूल के विद्यार्थियों को गुणवत्ता भरी शिक्षा प्रदान करने के लिए सरकार की तरफ से सर्व शिक्षा अभियान व अन्य कई तरह की योजनाएं शुरू की गई हैं, लेकिन इसके बावजूद कई सरकारी स्कूलों को अपनी इमारत नहीं मिल पा रही है।
विज्ञापन
जिला उधमपुर में विद्यार्थियों को गुणवत्ता भरी शिक्षा प्रदान करने के लिए शहर और ग्रामीण इलाकों में सरकार की तरफ से 899 सरकारी प्राइमरी स्कूल खोले गए हैं। इनमें से 70 के करीब प्राइमरी स्कूल आज भी एक या फिर दो कमरे की किराए की इमारतों में चल रहे हैं।
विज्ञापन
किराए की इमारत में विद्यार्थियों को बिठाने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं होने के कारण मजबूरी में शिक्षकों को विद्यार्थियों को बाहर खुले में बिठाना पड़ता है। तेज धूप और बारिश के दौरान तो विद्यार्थियों और शिक्षकों की परेशानी कई गुणा बढ़ जाती है।
किराए की इमारतों में विद्यार्थियों के बैठने के लिए शौचालय और पीने के पानी की सुविधा मौजूद नहीं है। किराए की इमारतों में पढ़ाने में शिक्षकों को भी काफी परेशानियों से जूझना पड़ रहा है।