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...तो खुदा के पास पहुंच जाता परिवार
Updated Tue, 22 May 2018 02:26 PM IST
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पुंछ। अगर में मकान कच्चा न होता तो गोलाबारी में पूरा परिवार ही खुदा के पास पहुंच गया होता। हालांकि पाकिस्तानी सेना की समय-असमय की जाने वाली गोलाबारी के डर से हमने अपने पशुओं को चराना छोड़ दिया है। उन्हें घरों के अंदर ही चारा पानी देते हैं। यहां तक खेतों में काम करना भी छोड़ रखा है। बस छुप-छुपा कर पशुओं के लिए चारा काट लाते हैं।
यह कहना है पुंछ जिले के माल्टी सेक्टर में नियंत्रण रेखा पर फेंसिंग से आगे बसे गांव बगयालदरा निवासी नजर दीन का, जोकि पुंछ के राजा सुखदेव सिंह अस्पताल में अपने 13 वर्षीय पुत्र जो पाक गोलाबारी में घायल हो गया था उसका उपचार कराने पहुंचे थे। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा कि पिछले कुछ माह से हम लोग डर-डर कर जी रहे हैं, क्योंकि पाकिस्तानी सेना दिन में कई बार हमारे घरों को निशाना बना कर गोलाबारी करती है। उसी तरह आज गोलाबारी के दौरान मेरे घर पर दो गोले आकर गिरे हैं। यह तो खुदा का शुक्र है कि मेरा मकान कच्चा था और लकड़ी और पत्थरों से बना हुआ था, जिसने पाक गोलों को खुद पर सहन कर लिया और मैं और मेरा परिवार जिंदा बच गया। मेरे बेटे को हल्की ही चोटें आई हैं।
नजर दीन का कहना है कि पिछले साल हमारे ही गांव में पाक गोलाबारी में एक घर के पांच लोग घायल हो गए थे और एक 13 वर्षीय बच्ची की मौके पर ही मौत हो गई थी। हम लोग गांव में उस बच्ची का जनाजा तक नहीं पढ़ पाए थे। हम लोग तो रात को भी चैन की नींद नहीं सो पाते हैं, क्योंकि नियंत्रण रेखा के अग्रिम क्षेत्रों में पाक सेना की गोलाबारी किसी भी समय शुरू हो जाती है।
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गौरतलब है कि इसी प्रकार पाकिस्तानी सेना की गोलाबारी से तीन महीने पहले बालाकोट में एक ही परिवार के पांच लोग मारे गए थे, जबकि मनकोट सेक्टर के घानी गांव में भी एक महिला की मौत हो गई थी। उससे पहले गत वर्ष पुंछ के करमाड़ा में भी सुबह पाकिस्तानी सेना द्वारा की गई गोलाबारी में सेना से छुट्टी पर आया एक हवलदार और उसकी पत्नी की मौके पर ही मौत हो गई थी।
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यह कहना है पुंछ जिले के माल्टी सेक्टर में नियंत्रण रेखा पर फेंसिंग से आगे बसे गांव बगयालदरा निवासी नजर दीन का, जोकि पुंछ के राजा सुखदेव सिंह अस्पताल में अपने 13 वर्षीय पुत्र जो पाक गोलाबारी में घायल हो गया था उसका उपचार कराने पहुंचे थे। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा कि पिछले कुछ माह से हम लोग डर-डर कर जी रहे हैं, क्योंकि पाकिस्तानी सेना दिन में कई बार हमारे घरों को निशाना बना कर गोलाबारी करती है। उसी तरह आज गोलाबारी के दौरान मेरे घर पर दो गोले आकर गिरे हैं। यह तो खुदा का शुक्र है कि मेरा मकान कच्चा था और लकड़ी और पत्थरों से बना हुआ था, जिसने पाक गोलों को खुद पर सहन कर लिया और मैं और मेरा परिवार जिंदा बच गया। मेरे बेटे को हल्की ही चोटें आई हैं।
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नजर दीन का कहना है कि पिछले साल हमारे ही गांव में पाक गोलाबारी में एक घर के पांच लोग घायल हो गए थे और एक 13 वर्षीय बच्ची की मौके पर ही मौत हो गई थी। हम लोग गांव में उस बच्ची का जनाजा तक नहीं पढ़ पाए थे। हम लोग तो रात को भी चैन की नींद नहीं सो पाते हैं, क्योंकि नियंत्रण रेखा के अग्रिम क्षेत्रों में पाक सेना की गोलाबारी किसी भी समय शुरू हो जाती है।
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गौरतलब है कि इसी प्रकार पाकिस्तानी सेना की गोलाबारी से तीन महीने पहले बालाकोट में एक ही परिवार के पांच लोग मारे गए थे, जबकि मनकोट सेक्टर के घानी गांव में भी एक महिला की मौत हो गई थी। उससे पहले गत वर्ष पुंछ के करमाड़ा में भी सुबह पाकिस्तानी सेना द्वारा की गई गोलाबारी में सेना से छुट्टी पर आया एक हवलदार और उसकी पत्नी की मौके पर ही मौत हो गई थी।