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जम्मूः 47 प्रतिशत बसें ओवर एज फिर भी धड़ल्ले से भर रहीं रफ्तार, जेकेएसआरटीसी का ऐसा है हाल
Sun, 08 Sep 2019 04:04 PM IST
प्रशांत कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Sun, 08 Sep 2019 04:04 PM IST
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जेकेएसआरटीसी
- फोटो : अमर उजाला
हाशिए पर खड़े जम्मू-कश्मीर स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (जेकेएसआरटीसी) के बेड़े में शामिल 47 प्रतिशत बसें ओवर एज हो चुकी हैं। जेकेएसआरटीसी के पास 529 बसें हैं। इनमें से 10 से 25 वर्ष की आयु के बीच की 248 बसें हैं, जो सड़कों पर दौड़ रही हैं। इनमें को कई बसें पांच साल या पांच लाख किलामीटर के मानदंड को पार चुकी हैं।
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इंटर स्टेट बसें औसत 4:38 और इंटर डिस्ट्रिक्ट 3:94 किलोमीटर प्रति लीटर का एवरेज दे रही हैं जो कमाई की लिहाज से काफी कम है। ऐसे में कॉरपोरेशन फायदे में कम और घाटे में ज्यादा चल रहा है। एसआरटीसी की सेंट्रल वर्कशाप में दो दर्जन के करीब बसें इंजन की समस्या को लेकर खड़ी हैं। इनमें आधा दर्जन बसें ऐसी हैं जो तय पांच साल में पांच लाख किलोमीटर का मानदंड को पूरा नहीं कर पाई हैं, लेकिन लंबे समय से वर्कशाप में खड़ी है। वर्कशाप में मैन पावर और सामान की कमी के चलते हैं, समय पर बसें ठीक नहीं हो पा रही है।
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कॉरपोरेशन बसों तय मानदंड से भी ज्यादा चल रहा है। इसका कारण है नए बसों की खरीद नहीं हो पाना है। वर्तमान में कॉरपोरेशन के पास ऐसी कई बसें हैं जो 10 से 15 लाख किलोमीटर तक चल चुकी हैं और अभी भी वे सड़कों पर दौड़ रही हैं। चिनाब वैली के जिलों की अधिकांश बसें लंबे समय से जम्मू की सेंट्रल वर्कशाप में सड़ रही हैं। रिकॉर्ड के मुताबिक मौजूदा समय में एसआरटीसी के पास 529 बसें हैं, जिनमें 31 बसें कंडम हैं और 10 बसें नॉन कामर्शियल हैं। यानी 488 बसें ही शेष बची हैं।
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हाल की में 34 नए बसें खरीदी हैं जो बहुत जल्द जेकेएसआरटीसी की बेडे़ में शामिल होंगी। इनमें से 25 बसें विजयपुर स्थित यार्ड में खड़ी हैं, जबकि दस अन्य बसें महाराष्ट्र से राज्य के लिए आ रही हैं। इन बसों की खरीदारी स्टेट मोटर गैरेज की ओर से की गई है।
| वर्ष | बसों की संख्या |
| 2012-13 | 563 |
| 2013-14 | 559 |
| 2014-15 | 514 |
| 2015-16 | 500 |
| 2016-17 | 488 |
| नोट | ये आंकड़े उन बसों की हैं जो सड़कों पर चलती हैं |
एसआरटीसी चालक और सह चालक की कमी से जूझ रहा है। इस वर्ष एसआरटीसी ने अनुबंध पर ड्राइवर की भर्ती की प्रक्रिया शुरू की थी जो अभी तक परवान नहीं चढ़ पाई है। इसके चलते रेगुलर ड्राइवरों पर अतिरिक्त भार है। कॉरपोरेशन के 300 के करीब चालकों की कमी है। एसआरटीसी इंप्लाइज एसोसिएशन के अध्यक्ष दीदार सिंह ने कहा कि चालकों को छुट्टियां नहीं मिल रही हैं। वे पुरानी गाड़ियाें को चलाने को मजबूर हैं।