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सजा को सस्पेंड करने के आदेश
Updated Thu, 09 Aug 2018 01:45 AM IST
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जम्मू। हाईकोर्ट ने बोर्ड आफ प्रोफेशनल एंट्रेंस एक्जामिनेशन (बोपी) के पूर्व चेयरमैन मुश्ताक अहमद पीर की अपील को रद्द कर दिया। पूर्व चेयरमैन ने हाईकोर्ट में भ्रष्टाचार निरोधक विशेष अदालत के सजा दिए जाने के आदेशों को सस्पेंड करने की अपील दायर की थी।
न्यायाधीश एमके हंजूरा ने कहा कि भ्रष्टाचार निरोधक विशेष अदालत ने कामन एंट्रेंस टेस्ट (सीईटी) घोटाले 2012 के तहत सजा सुनाई है। जल्द से केस के ट्रायल के लिए हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार ज्यूडीशियल को कहा कि वह मुख्य न्यायाधीश से उपयुक्त बेंच का गठन करने की गुजारिश करें। इस बीच उन्होंने आदेश में यह भी कहा कि पूर्व चेयरमैन का लगातार मेडिकल चेकअप हो। क्योंकि वह बीमार हैं। उनके खिलाफ आरोप है कि 2012 के सीईटी परीक्षाओं में एक जिले के कई छात्रों को एमबीबीएस में पास बताया है, जबकि वह इंटरनल टेस्ट में फेल थे। एक छात्र नवीद अहमद भट जो केमेस्ट्री की स्पेलिंग भी ठीक तरीके से नहीं लिख पा रहा था। उसे भी पास कर दिया। एक अन्य छात्र फारूक अहमद इट्टू मेसर्ज इनफोटेक कंप्यूटर्ज बिजबेहाड़ा आरोपी पूर्व चेयरमैन का करीबी है। उसने कुछ प्रश्नपत्र उम्मीदवारों को मुहैया कराए। दलालों ने अभिभावकों से मोटी रकम हासिल करके मुश्ताक अहमद पीर को प्रदान की। इस मामले की जांच डीएसपी बशीर अहमद डार को दी गई। जांच में पाया कि फारूक अहमद इट्टू वर्ष 2001 में कंप्यूटर सेंटर चलाता था।
कश्मीर विश्वविद्यालय के कंप्यूटर साइंसेज विभाग के मुश्ताक अहमद पीर जब विभागाध्यक्ष थे तो वह लगातार पीर के पास आता था। दोनों में दोस्ताना संबंध बने। वर्ष 2008 में पीर को चेयरमैन बनाया गया। फारूक अहमद ने उसी समय उम्मीदवारों को लाभ पहुंचाना शुरू कर दिया था। एक उम्मीदवार से 30 लाख रुपये तक लिए गए। इसके लिए अन्य आरोपी सज्जाद हुसैन भट़्ट को भी साथ में मिलाया गया। जो पहले से ही उम्मीदवारों को विभिन्न मेडिकल कालेज में प्रवेश दिलाने का धंधा करता था। जेएनएफ
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न्यायाधीश एमके हंजूरा ने कहा कि भ्रष्टाचार निरोधक विशेष अदालत ने कामन एंट्रेंस टेस्ट (सीईटी) घोटाले 2012 के तहत सजा सुनाई है। जल्द से केस के ट्रायल के लिए हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार ज्यूडीशियल को कहा कि वह मुख्य न्यायाधीश से उपयुक्त बेंच का गठन करने की गुजारिश करें। इस बीच उन्होंने आदेश में यह भी कहा कि पूर्व चेयरमैन का लगातार मेडिकल चेकअप हो। क्योंकि वह बीमार हैं। उनके खिलाफ आरोप है कि 2012 के सीईटी परीक्षाओं में एक जिले के कई छात्रों को एमबीबीएस में पास बताया है, जबकि वह इंटरनल टेस्ट में फेल थे। एक छात्र नवीद अहमद भट जो केमेस्ट्री की स्पेलिंग भी ठीक तरीके से नहीं लिख पा रहा था। उसे भी पास कर दिया। एक अन्य छात्र फारूक अहमद इट्टू मेसर्ज इनफोटेक कंप्यूटर्ज बिजबेहाड़ा आरोपी पूर्व चेयरमैन का करीबी है। उसने कुछ प्रश्नपत्र उम्मीदवारों को मुहैया कराए। दलालों ने अभिभावकों से मोटी रकम हासिल करके मुश्ताक अहमद पीर को प्रदान की। इस मामले की जांच डीएसपी बशीर अहमद डार को दी गई। जांच में पाया कि फारूक अहमद इट्टू वर्ष 2001 में कंप्यूटर सेंटर चलाता था।
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कश्मीर विश्वविद्यालय के कंप्यूटर साइंसेज विभाग के मुश्ताक अहमद पीर जब विभागाध्यक्ष थे तो वह लगातार पीर के पास आता था। दोनों में दोस्ताना संबंध बने। वर्ष 2008 में पीर को चेयरमैन बनाया गया। फारूक अहमद ने उसी समय उम्मीदवारों को लाभ पहुंचाना शुरू कर दिया था। एक उम्मीदवार से 30 लाख रुपये तक लिए गए। इसके लिए अन्य आरोपी सज्जाद हुसैन भट़्ट को भी साथ में मिलाया गया। जो पहले से ही उम्मीदवारों को विभिन्न मेडिकल कालेज में प्रवेश दिलाने का धंधा करता था। जेएनएफ
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