40 कश्मीरी महिलाओं ने नशेड़ी शौहर को तलाक दिया
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कश्मीर की महिलाओं के मिज़ाज में क्रांतिकारी बदलाव आ रहा है। पिछले दो महीनों में श्रीनगर की 40 से ज्यादा महिलाओं ने अपने पतियों को इसलिए तलाक दे दिया क्योंकि वे नशे की लत छोड़ने को राजी नहीं थे।
ये तलाक बाकायदा इस्लामिक कायदे-कानून के मुताबिक हुए हैं। मुस्लिम महिलाओं के इस साहसिक फैसले से समाज में नशे के खिलाफ जोरदार पैगाम गया है।
घाटी में पिछले दो महीने में नशे की आदत छोड़ने को तैयार न होने पर तलाक के 40 से ज्यादा मामले सामने आए हैं। कश्मीरी महिलाएं ऐसे शौहरों को तलाक का फरमान सुना रही हैं जो बीवियों से ज़्यादा नशे को प्यार करते हैं।
शरिया बोर्ड के अध्यक्ष नसरुल इस्लाम नशे की लत को सामाजिक बंधनों में आ रही दूरियों के लिए एक बड़ा कारण मान रहे हैं।
शरियत के हिसाब से लिया तलाक
ऐसा ही साहसिक फैसला लेने वाली श्रीनगर की 27 वर्षीय युवती ने बताया कि जून 2015 में उसका निकाह हुआ। इसके बाद शौहर काफी बीमार हो गया। उसे श्रीनगर के एसएमएस अस्पताल में भर्ती किया गया।
यहां पता लगा कि वह नशे का आदी है। बाद में उसे पीसीआर ड्रग डी-एडिक्शन सेंटर भेजा गया। यह सब पता चलने के बाद उसने तलाक का फैसला लिया जो कश्मीरी समाज में लिए काफी मुश्किल निर्णय था।
पहले तो घर वालों ने साथ देने से इंकार किया लेकिन बाद में उन्होंने भी मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए उनका साथ दिया। आज के समाज में यह फैसला लेना काफी मुश्किल था लेकिन वह शरिया बोर्ड गई जिन्होंने इस फैसले की सुनवाई कर उन्हें तलाक दिलवाया।
पढ़िए ऐसी एक और साहसी महिला की कहानी
वह नशे की गोलियां लेता है। जब उसे यह पता चला तो दिल पर पत्थर रख पति से तलाक लेने का फैसला लिया। यह दोनों युवतियां उन 40 कश्मीरी महिलाओं में से हैं जिन्होंने हाल ही में नशेड़ी पतियों से तलाक लिया है।
इन महिलाओं के अनुसार इस काम में स्थानीय शरिया अदालत ने उन्हें काफी मदद की। इस्लाम में महिलाओं के क्या हक हैं और जुल्म एवं उत्पीड़न से कैसे छुटकारा पाया जाए इसका रास्ता बताया।
सब इस्लामिक कानून के तहत
शरिया बोर्ड के अध्यक्ष नसरुल इस्लाम ने बताया कि ऐसे दर्जनों मामले हैं जिनमें नशे ने घरों को बर्बाद किया है। हर दिन उनके पास ऐसे मामले आ रहे हैं।
ऐसे मामलों में इस्लाम इजाजत देता है कि महिला अपने पति से तलाक मांगे। शरिया अदालत ने पिछले दो महीनों में 40 से अधिक महिलाओं को तलाक हासिल करने में सहायता की है जिनके पति नशे के आदती थे। यह सब इस्लामिक कानून के तहत हुआ है।