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बिजली संकट से जूझ रहे जम्मू-कश्मीर को बड़ी सौगात, विद्युत ऊर्जा क्षेत्र में 35 हजार करोड़ का करार

Mon, 04 Jan 2021 11:36 AM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Mon, 04 Jan 2021 11:36 AM IST
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35 thousand crore agreement in electric power sector in jammu kashmir
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह - फोटो : सोशल मीडिया

बिजली संकट से जूझ रहे जम्मू-कश्मीर में चौबीसों घंटे आपूर्ति के लिए 35 हजार करोड़ की पांच बड़ी जल विद्युत परियोजनाओं का करार हो गया है। एनएचपीसी, विद्युत विकास विभाग और जम्मू-कश्मीर विद्युत विकास निगम के बीच रविवार को प्रदेश की सबसे बड़ी सावलकोट समेत पांच परियोजनाओं पर एमओयू हस्ताक्षरित हुआ।

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जम्मू के कन्वेंशन सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय विद्युत मंत्री राज कुमार सिंह, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह भी इस खास अवसर के गवाह बने। 850 मेगावाट की रेटले, 930 मेगावाट की किरथई-2 परियोजना पर कार्य शुरू करने जबकि सावलकोट (1856 मेगावाट), उड़ी-2 (240) और 258 मेगावाट क्षमता वाली डुलहस्ती-2 परियोजना के क्रियान्वयन पर एमओयू किया गया। यह परियोजनाएं बिजली उत्पादन के साथ रोजगार के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण हैं।
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करार के तहत प्रदेश में अगले तीन से चार वर्ष के दौरान 3498 मेगावाट बिजली का अतिरिक्त उत्पादन शुरू हो जाएगा। कार्यक्रम में मौजूद केंद्रीय विद्युत राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) राज कुमार सिंह ने कहा कि एनएचपीसी स्थानीय युवाओं को परियोजनाओं में काम करने के लिए प्रशिक्षण देगा। लघु पन बिजली परियोजनाओं पर भी एनएचपीसी काम करेगा।
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जम्मू-कश्मीर में प्रत्येक घर में 24 घंटे बिजली मिले इसी उद्देश्य से काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पन बिजली क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश और सिक्किम ने क्षमताओं पर कार्य कर मिसाल पेश की है। जम्मू कश्मीर भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा राष्ट्रीय बिजली औसत के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में 20 घंटे और शहरी क्षेत्रों में 22 से 23 घंटे की बिजली आपूर्ति हो रही है। 

शुरू होने के 40 साल बाद प्रदेश को वापस मिलेंगे प्रोजेक्ट: उपराज्यपाल

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि बिजली परियोजनाएं 40 साल बाद व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए पूरी तरह से जम्मू-कश्मीर को वापस मिल जाएंगी। इससे पूर्व एनएचपीसी को जो प्रोजेक्ट दिए गए, उनमें परियोजनाओं को लौटाने का प्रावधान नहीं था। 2024 तक जम्मू कश्मीर में बिजली उत्पादन दोगुना हो जाएगा।

उपराज्यपाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में बिजली उत्पादन की क्षमता 14867 मेगावाट की है। अभी तक केवल 3504 मेगावाट ही हासिल किया जा सका है। 3498 मेगावाट क्षमता की परियोजनाएं अगले तीन से चार साल में शुरू होने से जम्मू-कश्मीर बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो जाएगा। उपराज्यपाल ने कहा कि एनएचपीसी को सावलकोट प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए काम दिया गया है। 1984 में यह परियोजना शुरू हुई थी लेकिन अधर में लटकी रही। इससे 1856 मेगावाट पन बिजली उत्पादन होगा।

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