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भारत-पाक में वार्ता ही एकमात्र हल-महबूबा
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जम्मू। पीडीपी अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि भारत और पाकिस्तान में एकमात्र वार्ता ही हल है। जंग किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। इससे दोनों मुल्कों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। दोनों देशों में कुछ लोग ऐसे हैं जो हालात सामान्य नहीं होना देना चाहते हैं। पाक को हमलावरों पर कार्रवाई करनी चाहिए। महबूबा टीवी चैनल में एक साक्षात्कार में बोल रही थीं।
उन्होंने कहा कि आतंकवादियों पर पाक का नियंत्रण नहीं है। एक सवाल में कि सरकार ने वैरिकेट हटा दिए थे जिससे पुलवामा आत्मघाती हमला हो गया पर महबूबा ने कहा कि हमारी सरकार ने लोगों की भलाई के लिए कुछ स्थानों पर सुरक्षा हटाई थी, ताकि जांच में किसी को कोई परेशानी न हो। सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण सभी स्थानों पर सुरक्षा की गई थी। सीजफायर को हालात ठीक करने के लिए किया गया था। उन्होंने अलगाववादियों से सुरक्षा हटाने को बचकाना हरकत बताते हुए कहा कि अगर इससे कुछ हासिल होता है तो यह ठीक है। अलगाववादियों में कई लोग काफी बुजुर्ग हैं। गिलानी, उमर फारूक, यासीन मलिक जैसे अलगाववादियों ने कभी सुरक्षा नहीं मांगी। केंद्र के इस कदम से घाटी में हालात खराब हो सकते हैं। उन्होंने एनआईए की जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि कुछ लोगों को बेवजह जेलों में डाल दिया गया है,जबकि जांच में अभी तक कुछ खास नहीं निकल पाया है। पत्थरबाजों के हाथों में लैपटाप होना चाहिए और उनके परिवारवालों को इस पर सोचना चाहिए। बातचीत अगर नाकाम होती है तो इससे लोग मरते नहीं है, लेकिन जंग से हजारों, लाखों लोग मर जाते हैं। अटल बिहारी बाजपेयी के बाद किसी ने वार्ता पर जोर नहीं दिया है। पाक, भारत को कभी भी कमजोर समझने की गलते नहीं करेगा।
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उन्होंने कहा कि आतंकवादियों पर पाक का नियंत्रण नहीं है। एक सवाल में कि सरकार ने वैरिकेट हटा दिए थे जिससे पुलवामा आत्मघाती हमला हो गया पर महबूबा ने कहा कि हमारी सरकार ने लोगों की भलाई के लिए कुछ स्थानों पर सुरक्षा हटाई थी, ताकि जांच में किसी को कोई परेशानी न हो। सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण सभी स्थानों पर सुरक्षा की गई थी। सीजफायर को हालात ठीक करने के लिए किया गया था। उन्होंने अलगाववादियों से सुरक्षा हटाने को बचकाना हरकत बताते हुए कहा कि अगर इससे कुछ हासिल होता है तो यह ठीक है। अलगाववादियों में कई लोग काफी बुजुर्ग हैं। गिलानी, उमर फारूक, यासीन मलिक जैसे अलगाववादियों ने कभी सुरक्षा नहीं मांगी। केंद्र के इस कदम से घाटी में हालात खराब हो सकते हैं। उन्होंने एनआईए की जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि कुछ लोगों को बेवजह जेलों में डाल दिया गया है,जबकि जांच में अभी तक कुछ खास नहीं निकल पाया है। पत्थरबाजों के हाथों में लैपटाप होना चाहिए और उनके परिवारवालों को इस पर सोचना चाहिए। बातचीत अगर नाकाम होती है तो इससे लोग मरते नहीं है, लेकिन जंग से हजारों, लाखों लोग मर जाते हैं। अटल बिहारी बाजपेयी के बाद किसी ने वार्ता पर जोर नहीं दिया है। पाक, भारत को कभी भी कमजोर समझने की गलते नहीं करेगा।
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