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पीएमओ के खिलाफ की नारेबाजी

Sun, 21 Jan 2018 12:36 AM IST
Updated Sun, 21 Jan 2018 12:36 AM IST
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पीएमओ के खिलाफ की नारेबाजी
हीरानगर। सीमावर्ती लोगों से किए वादों को पूरा न करने का आरोप लगाते हुए बार्डर युनाइटेड फ्रंट ने गदियाल राहत शिविर में पीएमओ राज्य मंत्री के खिलाफ नारेबाजी कर प्रदर्शन किया।
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फ्रंट के चेयरमैन घनश्याम शर्मा ने केंद्र सरकार पर बार्डर के लोगों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि जो भी वादे किए गए सिर्फ वोटों के लिए। वोट मिलने के बाद लोगों द्वारा चुने गए नुमाइंदों ने इनकी सुध नहीं ली और इनसे किए वादों पर कोई काम नहीं किया। लोगों से वादा किया गया था कि आपात स्थिति में सुरक्षा के लिए यहां पक्के बंकर बनाए जाएंगे ताकि गोलाबारी के दौरान लोग इनमें शरण ले सकें। यह कागजी बंकर आम लोगों को नसीब नहीं हुए, जिसके चलते लोग अपने सुरक्षा इंतजाम खुद करने पर मजबूर हैं। सीमावर्ती लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पांच मरले प्लाट देने की बात भी कई बार कही गई जो जुमला ही साबित हुई।
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उन्होंने कहा कि क्षेत्र के सांसद होने के नाते पीएमओ राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह सीमांत लोगों की समस्या को बारीकी से समझ कर केंद्र के समक्ष रख सकते थे, लेकिन उन्होंने लोगों की पीड़ा जानना जरूरी नहीं समझा। शुक्रवार को वे हीरानगर आए लेकिन चंद लोगों से मिलने के बाद वापस लौट गए जबकि तमाम सीमांत लोगों को उम्मीद थी कि वे उनके बीच आकर उनका दर्द सुनेंगे। इसके बाद फ्रंट के सदस्यों ने गुज्जरे चक्क, कड़याला, पान्सर, मन्यारी, नाऊ चक्क, रठुआ आदि सीमांत गांवों का भी दौरा किया। उनके साथ मनोहर लाल, पवन कुमार, नजीर अहमद भी थे।
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खैर का नहीं मिल रहा उचित दाम
हीरानगर। कंडी के किसानों को खैर का उचित दाम पर न मिलने पर किसान मोर्चा ने डिंगा अंब में बैठक की। उन्हाेंने कहा कि किसानों को खैर का उचित दाम दिया जाए या फिर पंजाब में बेचने की अनुमति दी जाए।

मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष राजिंद्र सिंह चिब ने कहा कि कंडी के किसानों के लिए खैर बेशकीमती फसल है, लेकिन उन्हें गुमराह करके इसे कौड़ियों के भाव खरीदा जा रहा है। उन्होंने कहा कि यहां पर किसानों को खैर का भाव 1200 से 1500 रुपये बता कर खरीदा जा रहा और पंजाब में इसे 7 से 8 हजार रुपये में बेचा जा रहा है। पूरा मुनाफा ठेकेदार कमा रहे हैं, लेकिन जिन किसानों ने कई साल तक इनकी सेवा की उन्हें कुछ नहीं मिल रहा। उन्होंने मांग की कि खैर का उचित दाम किसानों को दिया जाए या फिर किसानों को स्वयं खैर पंजाब में बेचने की अनुमति दी जाए। ब्यूरो
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