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बातचीत का स्वागत
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श्रीनगर। केंद्र सरकार से बातचीत के लिए अलगाववादी संगठन हुर्रियत के नरम रुख का घाटी के क्षेत्रीय दलों ने स्वागत किया है। जहां एक ओर पीडीपी और नेकां ने इस बातचीत को आगे ले जाने पर जोड़ दिया है तो वहीं भाजपा ने स्पष्ट कहा कि जो भी भारतीय संविधान के दायरे में रह कर बातचीत करना चाहता है, उसके लिए केंद्र के द्वारा हमेशा खुले हैं। हुर्रियत ने भी साफ कर दिया है कि अगर केंद्र सरकार की ओर से सार्थक संवाद की पहल होगी तो उनकी ओर से भी सकारात्मक पहल की जाएगी।
राज्यपाल सत्यपाल मालिक द्वारा हाल ही में श्रीनगर में हुर्रियत के बातचीत के लिए तैयार होने को लेकर दिए गए बयान के बाद से यह मुद्दा गरमाया हुआ है। लगभग सभी राजनीतिक दलों का यह कहना है कि अगर हुर्रियत तैयार है तो बातचीत के सिलसिले को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र की ओर से शुरुआत की जानी चाहिए। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने तो यहां तक कह दिया कि हुर्रियत के बातचीत को लेकर अपनाए नरम रुख से उन्हें राहत मिली है। ट्विटर पर महबूबा ने लिखा- ‘देर आए दुरुस्त आए। पीडीपी-भाजपा गठबंधन का अंतर्निहित उद्देश्य केंद्र सरकार और सभी हितधारकों के बीच बातचीत को सुविधाजनक बनाना था। सीएम के रूप में मेरे कार्यकाल में ऐसा करने की पूरी कोशिश की। राहत मिली कि हुर्रियत ने आखिरकार अपना रुख नरम कर लिया है।’
वहीं डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने अपने एक बयान में कहा कि हुर्रियत के साथ बातचीत को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने दिल्ली में दिए एक बयान में कहा कि राज्यपाल का कहना है कि हुर्रियत बातचीत के लिए सहमत हो गई है। फिर उनके साथ बातचीत होनी चाहिए।
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भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अविनाश राय खन्ना ने श्रीनगर में कहा कि हमारा शुरू से एक ही स्टैंड रहा है कि जो लोग संविधान के दायरे में आकार संविधान की इज्जत करते हुए बात करना चाहते हैं, उससे हम बात कर सकते हैं। अगर संविधान की कोई इज्जत नहीं करेगा तो उससे बातचीत का कोई मतलब ही नहीं। एक सवाल के जवाब में खन्ना ने यह भी कहा कि वह समझते हैं कि जिस तरह से केंद्र ने लोगों को सच्चाई बताने का काम किया है और जनता ने समझा है, तबसे उनके मन में भी बदलाव आया है। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा का मकसद है यहां पर अमन बहाली हो और विकास हो। लेकिन कुछ लोग इसमें अड़चन डाल रहे हैं। लेकिन कानून व्यवस्था बनाए रखना, हमारी प्राथमिकता है। परिसीमन पर उन्होंने कहा कि अभी कोई फाइनल निर्णय नहीं हुआ।
बातचीत सबसे अच्छी पहल
राज्यपाल के बयान पर हुर्रियत (एम) के अध्यक्ष मीरवाइज मोलवी उमर फारूक ने कहा कि यदि सार्थक बातचीत शुरू की जाती है तो सकारात्मक प्रतिक्रिया होगी। बातचीत ही एकमात्र सबसे अच्छी पहल है। हुर्रियत हमेशा मसले के समाधान के लिए वार्ता के पक्ष में रही है। अभी कुछ नया नहीं कहा है। रोजाना युवाओं की हो रही मौतों को ध्यान में रखते हुए स्वाभाविक रूप से शांतिपूर्ण समाधान चाहते हैं।
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राज्यपाल सत्यपाल मालिक द्वारा हाल ही में श्रीनगर में हुर्रियत के बातचीत के लिए तैयार होने को लेकर दिए गए बयान के बाद से यह मुद्दा गरमाया हुआ है। लगभग सभी राजनीतिक दलों का यह कहना है कि अगर हुर्रियत तैयार है तो बातचीत के सिलसिले को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र की ओर से शुरुआत की जानी चाहिए। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने तो यहां तक कह दिया कि हुर्रियत के बातचीत को लेकर अपनाए नरम रुख से उन्हें राहत मिली है। ट्विटर पर महबूबा ने लिखा- ‘देर आए दुरुस्त आए। पीडीपी-भाजपा गठबंधन का अंतर्निहित उद्देश्य केंद्र सरकार और सभी हितधारकों के बीच बातचीत को सुविधाजनक बनाना था। सीएम के रूप में मेरे कार्यकाल में ऐसा करने की पूरी कोशिश की। राहत मिली कि हुर्रियत ने आखिरकार अपना रुख नरम कर लिया है।’
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वहीं डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने अपने एक बयान में कहा कि हुर्रियत के साथ बातचीत को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने दिल्ली में दिए एक बयान में कहा कि राज्यपाल का कहना है कि हुर्रियत बातचीत के लिए सहमत हो गई है। फिर उनके साथ बातचीत होनी चाहिए।
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भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अविनाश राय खन्ना ने श्रीनगर में कहा कि हमारा शुरू से एक ही स्टैंड रहा है कि जो लोग संविधान के दायरे में आकार संविधान की इज्जत करते हुए बात करना चाहते हैं, उससे हम बात कर सकते हैं। अगर संविधान की कोई इज्जत नहीं करेगा तो उससे बातचीत का कोई मतलब ही नहीं। एक सवाल के जवाब में खन्ना ने यह भी कहा कि वह समझते हैं कि जिस तरह से केंद्र ने लोगों को सच्चाई बताने का काम किया है और जनता ने समझा है, तबसे उनके मन में भी बदलाव आया है। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा का मकसद है यहां पर अमन बहाली हो और विकास हो। लेकिन कुछ लोग इसमें अड़चन डाल रहे हैं। लेकिन कानून व्यवस्था बनाए रखना, हमारी प्राथमिकता है। परिसीमन पर उन्होंने कहा कि अभी कोई फाइनल निर्णय नहीं हुआ।
बातचीत सबसे अच्छी पहल
राज्यपाल के बयान पर हुर्रियत (एम) के अध्यक्ष मीरवाइज मोलवी उमर फारूक ने कहा कि यदि सार्थक बातचीत शुरू की जाती है तो सकारात्मक प्रतिक्रिया होगी। बातचीत ही एकमात्र सबसे अच्छी पहल है। हुर्रियत हमेशा मसले के समाधान के लिए वार्ता के पक्ष में रही है। अभी कुछ नया नहीं कहा है। रोजाना युवाओं की हो रही मौतों को ध्यान में रखते हुए स्वाभाविक रूप से शांतिपूर्ण समाधान चाहते हैं।