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इस बार जीत की राह आसान नहीं
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कठुआ। नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस का उधमपुर डोडा सीट पर गठबंधन राजनीतिक समीकरण बिगाड़ सकता है। कठुआ, उधमपुर, रियासी, किशतवाड़, डोडा और रामबन जिलों से साढ़े 16 लाख मतदाताओं को रिझाने के लिए राजनीतिक दल जी जान से जुट गए हैं। भाजपा मोदी का नाम इस्तेमाल कर उधमपुर डोडा सीट हासिल करना चाहती है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस प्रत्याशी पूर्व सांसद डॉ कर्ण सिंह और महाराजा हरि सिंह के नाम की ब्रांडिंग में जुटे हुए हैं। जमीनी स्तर के मुद्दे फिलहाल प्रचार से गायब हैं लेकिन बड़े बड़े वादों के साथ वोटरों को रिझाने का काम जारी है। भाजपा से टूटकर अलग हुए चौधरी लाल सिंह रसाना मामले की सीबीआई जांच, जम्मू से भेदभाव जैसे मुद्दों को लेकर जनता के बीच हैं। ऐसे में कांटे की टक्कर की उम्मीद है। बहुजन समाज पार्टी भी तिलकराज भगत को चुनाव मैदान में उतारने का ऐलान कर चुकी है।
जानकारों की मानें तो विपक्षियों का एकजुट होना और मैदान में कई टक्कर के प्रतिद्वंद्वियों का उतरना भाजपा की राह को मुश्किल करता दिखाई दे रहा है। हालांकि पार्टी इस बार भी मोदी फैक्टर पर काम कर रही है। उधर, कांग्रेस के लिए भी मुश्किलें कम नहीं हैं। भाजपा की ओर से किया जा रहा मोदी सरकार के पांच वर्ष में विकास का प्रचार और लाल सिंह की ओर से डोगरों को एकत्रित करने की रणनीति में कांग्रेस को भी एड़ी-चोटी का जोर लगाना होगा।
उधर, मंगलवार तक आम सहमति न बन पाने तक नेशनल कांफ्रेंस की ओर से पूर्व मंत्री प्रेम सागर अजीज को लोकसभा चुनाव में उतारा जाना तय माना जा रहा था। इन अटकलों पर भी चुनाव पूर्व हुए नेकां-कांग्रेस गठबंधन ने विराम लगा दिया है। लोकसभा की विभिन्न सीटों पर हुए समझौते के बाद अब नेकां और कांफ्रेंस के नेता व कार्यकर्ता भी आने वाले दिनों में एक साथ वोट मांगते नजर आएंगे।
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जानकारों की मानें तो विपक्षियों का एकजुट होना और मैदान में कई टक्कर के प्रतिद्वंद्वियों का उतरना भाजपा की राह को मुश्किल करता दिखाई दे रहा है। हालांकि पार्टी इस बार भी मोदी फैक्टर पर काम कर रही है। उधर, कांग्रेस के लिए भी मुश्किलें कम नहीं हैं। भाजपा की ओर से किया जा रहा मोदी सरकार के पांच वर्ष में विकास का प्रचार और लाल सिंह की ओर से डोगरों को एकत्रित करने की रणनीति में कांग्रेस को भी एड़ी-चोटी का जोर लगाना होगा।
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उधर, मंगलवार तक आम सहमति न बन पाने तक नेशनल कांफ्रेंस की ओर से पूर्व मंत्री प्रेम सागर अजीज को लोकसभा चुनाव में उतारा जाना तय माना जा रहा था। इन अटकलों पर भी चुनाव पूर्व हुए नेकां-कांग्रेस गठबंधन ने विराम लगा दिया है। लोकसभा की विभिन्न सीटों पर हुए समझौते के बाद अब नेकां और कांफ्रेंस के नेता व कार्यकर्ता भी आने वाले दिनों में एक साथ वोट मांगते नजर आएंगे।
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