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हड़ताल से 100 आंगनबाड़ी सेंटर हैं बंद
Updated Tue, 26 Jun 2018 12:28 AM IST
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उधमपुर। लंबित मांगों को पूरा करने की मांग पर सोमवार को आंगनबाड़ी वर्कर्स ने डीसी कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान आंगनबाड़ी वर्कर्स ने कहा कि करीब दो महीने से जिले में 100 के करीब आंगनबाड़ी सेंटर बंद हैं। इस वजह से बच्चों को कोई सुविधा नहीं मिल रही है। उन्होंने कहा कि उनकी मांगों पर गौर नहीं किया जा रहा है। इस कारण वह हड़ताल करने के लिए मजबूर हैं।
सुबह नौ बजे आंगनबाड़ी वर्कर्स ने डीसी कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन शुरू किया। इस दौरान आंगनबाड़ी वर्कर्स ने कहा कि जब से लंबित मांगों को लेकर हड़ताल शुरू की है, तब से जिले में 100 से अधिक आंगनबाड़ी सेंटर बंद हैं। इन सेंटर में बच्चों को दोपहर के भोजन के अलावा शिक्षा भी दी जाती है। लेकिन दो महीने से उन बच्चों को कुछ नहीं मिला है। इसके अलावा सेंटर में किशोरियों और गर्भवती महिलाओं को एक वक्त के खाने के राशन की सुविधा दी जाती है। वह भी सुविधाओं से वंचित हो रहीं। वहीं आंगनबाड़ी वर्कर्स हर रोज धरना-प्रदर्शन करने के लिए मजबूर हैं।
‘नहीं उठाया जा रहा कोई कदम’
प्रदर्शन के दौरान आंगनबाड़ी वर्कर्स ने कहा कि प्रशासन को पता है कि हड़ताल और प्रदर्शन के कारण बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कई प्रकार की सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। इसके बावजूद हड़ताल को खत्म कराने के लिए केंद्र सरकार और प्रशासन की तरफ से कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है। यहां तक की कोई बात करने के लिए भी नहीं पहुंच रहा है। इसलिए हड़ताल को जारी रखने के लिए मजबूर हैं। राज्यपाल से अपील की कि लंबित मांगों को पूरा करने केे लेकर अपने स्तर से कोई कदम उठाएं।
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सुबह नौ बजे आंगनबाड़ी वर्कर्स ने डीसी कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन शुरू किया। इस दौरान आंगनबाड़ी वर्कर्स ने कहा कि जब से लंबित मांगों को लेकर हड़ताल शुरू की है, तब से जिले में 100 से अधिक आंगनबाड़ी सेंटर बंद हैं। इन सेंटर में बच्चों को दोपहर के भोजन के अलावा शिक्षा भी दी जाती है। लेकिन दो महीने से उन बच्चों को कुछ नहीं मिला है। इसके अलावा सेंटर में किशोरियों और गर्भवती महिलाओं को एक वक्त के खाने के राशन की सुविधा दी जाती है। वह भी सुविधाओं से वंचित हो रहीं। वहीं आंगनबाड़ी वर्कर्स हर रोज धरना-प्रदर्शन करने के लिए मजबूर हैं।
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‘नहीं उठाया जा रहा कोई कदम’
प्रदर्शन के दौरान आंगनबाड़ी वर्कर्स ने कहा कि प्रशासन को पता है कि हड़ताल और प्रदर्शन के कारण बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कई प्रकार की सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। इसके बावजूद हड़ताल को खत्म कराने के लिए केंद्र सरकार और प्रशासन की तरफ से कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है। यहां तक की कोई बात करने के लिए भी नहीं पहुंच रहा है। इसलिए हड़ताल को जारी रखने के लिए मजबूर हैं। राज्यपाल से अपील की कि लंबित मांगों को पूरा करने केे लेकर अपने स्तर से कोई कदम उठाएं।
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