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कठुआ कांड को सांप्रद्रायिक रंग देने पर विद्यार्थियों का हल्ला बोल
Updated Fri, 20 Apr 2018 09:26 PM IST
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kathua
- फोटो : AMAR UJALA
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कठुआ। रसाना मामले को सांप्रदायिक रंग देने के विरोध में कठुआ डिग्री कालेज के विद्यार्थियों ने वीरवार को हल्ला बोल के अंदाज में सड़क पर उतर कर विरोध जताया। उन्होंने डिग्री कालेज से शहीदी चौक तक रैली निकालकर सरकार में शामिल दलों पर रसाना कांड को सांप्रदायिक रंग देने का आरोप लगाया। शहीदी चौक पर विद्यार्थियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। विद्यार्थियों ने शहीदी चौक पर मानव शृंखला बनाकर यातायात को जाम कर दिया। विद्यार्थियों ने अफसोस जताते हुए कहा कि आज हालत यह हो गई है कि बच्ची को इंसाफ दिलाने की मांग पीछे चली गई है। इसकी आड़ में मामले को सांप्रदायिक रंग देने का काम किया जा रहा है। इस दौरान विद्यार्थियों ने हिंदू एकता मंच के खिलाफ भी जमकर नारेबाजी की।
विद्यार्थियों इशांत सूदन, जीवन ज्योति आदि ने कहा कि तीन महीने में राज्य को अशांत कर दिया गया है। यह कोई मजहबी फसाद नहीं था और न ही दो समुदाय के बीच का झगड़ा था, बच्ची की हत्या की गई थी, लेकिन राज्य में सांप्रदायिक माहौल बनाया गया। तीन माह से ज्यादा का वक्त गुजर गया, लेकिन बच्ची को इंसाफ नहीं मिला। विद्यार्थियों ने कहा कि उन्हें किसी भी जांच एजेंसी से कोई लेना-देना नहीं है। मामला अब कोर्ट में है और कोर्ट ही निर्धारित करेगा कि जांच सही है या गलत। जब तक मामला कोर्ट में नहीं था, तब तक सीबीआई जांच की मांग समझ में आती है, लेकिन अब जो लोग यह मांग उठा रहे हैं, क्या उनको न्यायपालिका में भी भरोसा नहीं है। यदि ऐसा है तो सीबीआई कौन सी स्वतंत्र एजेंसी है। भाजपा के जिन दो मंत्रियों ने त्यागपत्र दिया, तीन महीने तक वे कहां थे। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उन्हें कोई शौक नहीं कि इस प्रकार के मामले में आकर पढ़ाई करने का कीमती वक्त खराब करें, लेकिन तीन महीने से जो सांप्रदायिक रंग देकर माहौल खराब किया गया, उस माहौल में पढ़ाई भी नहीं हो सकती। ऐसे में इस मामले को सांप्रदायिक रंग न देते हुए न्यायपालिका पर भरोसा रखना चाहिए।
विद्यार्थियों के प्रदर्शन में पहुंच कर सीबीआई जांच के लगाए नारे
जिस समय शहीदी चौक पर विद्यार्थी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे, वहां अचानक कुछ लोग पहुंचे और सीबीआई जांच की मांग पर नारेबाजी करने लगे। सीबीआई जांच की मांग को लेकर नारेबाजी होते देख विद्यार्थियों ने भी उस गुट के समक्ष ही सरकार पर रसाना कांड को सांप्रदायिक रंग देने का आरोप लगाते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। विद्यार्थियों ने कहा कि वहां पहुंचे लोगों पर सरकार में शामिल पार्टियों के एजेंडे को हवा देने का आरोप लगाया। दोनों पक्षों के बीच तीखी बहसबाजी भी हुई। विद्यार्थियों ने कहा कि सीबीआई जांच की मांग उनकी नहीं है, लेकिन जानबूझकर विद्यार्थियों के बैनर तले हो रहे प्रदर्शन में इस मांग को उठाया जा रहा है। विद्यार्थियों ने बताया कि इस पक्ष के लोगों ने उन्हें जेएनयू का दलाल और देशद्रोही तक कह दिया। उन्होंने कहा कि इनकी मानसिकता से साफ है कि वे बच्ची को इंसाफ नहीं, बल्कि उसकी आड़ में माहौल को खराब करने पर आमादा हैं। सीबीआई जांच की मांग कर रहे लोगों से जब मीडिया वालों ने सवाल पूछे तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया और विद्यार्थियों के वहां से जाने के बाद वे भी चले गए।
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विद्यार्थियों इशांत सूदन, जीवन ज्योति आदि ने कहा कि तीन महीने में राज्य को अशांत कर दिया गया है। यह कोई मजहबी फसाद नहीं था और न ही दो समुदाय के बीच का झगड़ा था, बच्ची की हत्या की गई थी, लेकिन राज्य में सांप्रदायिक माहौल बनाया गया। तीन माह से ज्यादा का वक्त गुजर गया, लेकिन बच्ची को इंसाफ नहीं मिला। विद्यार्थियों ने कहा कि उन्हें किसी भी जांच एजेंसी से कोई लेना-देना नहीं है। मामला अब कोर्ट में है और कोर्ट ही निर्धारित करेगा कि जांच सही है या गलत। जब तक मामला कोर्ट में नहीं था, तब तक सीबीआई जांच की मांग समझ में आती है, लेकिन अब जो लोग यह मांग उठा रहे हैं, क्या उनको न्यायपालिका में भी भरोसा नहीं है। यदि ऐसा है तो सीबीआई कौन सी स्वतंत्र एजेंसी है। भाजपा के जिन दो मंत्रियों ने त्यागपत्र दिया, तीन महीने तक वे कहां थे। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उन्हें कोई शौक नहीं कि इस प्रकार के मामले में आकर पढ़ाई करने का कीमती वक्त खराब करें, लेकिन तीन महीने से जो सांप्रदायिक रंग देकर माहौल खराब किया गया, उस माहौल में पढ़ाई भी नहीं हो सकती। ऐसे में इस मामले को सांप्रदायिक रंग न देते हुए न्यायपालिका पर भरोसा रखना चाहिए।
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विद्यार्थियों के प्रदर्शन में पहुंच कर सीबीआई जांच के लगाए नारे
जिस समय शहीदी चौक पर विद्यार्थी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे, वहां अचानक कुछ लोग पहुंचे और सीबीआई जांच की मांग पर नारेबाजी करने लगे। सीबीआई जांच की मांग को लेकर नारेबाजी होते देख विद्यार्थियों ने भी उस गुट के समक्ष ही सरकार पर रसाना कांड को सांप्रदायिक रंग देने का आरोप लगाते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। विद्यार्थियों ने कहा कि वहां पहुंचे लोगों पर सरकार में शामिल पार्टियों के एजेंडे को हवा देने का आरोप लगाया। दोनों पक्षों के बीच तीखी बहसबाजी भी हुई। विद्यार्थियों ने कहा कि सीबीआई जांच की मांग उनकी नहीं है, लेकिन जानबूझकर विद्यार्थियों के बैनर तले हो रहे प्रदर्शन में इस मांग को उठाया जा रहा है। विद्यार्थियों ने बताया कि इस पक्ष के लोगों ने उन्हें जेएनयू का दलाल और देशद्रोही तक कह दिया। उन्होंने कहा कि इनकी मानसिकता से साफ है कि वे बच्ची को इंसाफ नहीं, बल्कि उसकी आड़ में माहौल को खराब करने पर आमादा हैं। सीबीआई जांच की मांग कर रहे लोगों से जब मीडिया वालों ने सवाल पूछे तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया और विद्यार्थियों के वहां से जाने के बाद वे भी चले गए।
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