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35-ए पर लोगों के मिले जुले बयान

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35-ए पर लोगों के मिले जुले बयान
आरएस पुरा। राज्य में 35ए को लेकर विरोध के सुर मुखर होते जा रहे हैं। इसके विरोध में काफी लोग खड़े हो रहे हैं और चाहते हैं कि इसके जल्द से जल्द रद्द कर दिया जाए। क्योंकि इसके कारण राज्य के ही लोगों को अधिकारों से वंचित होना पड़ रहा है। इस बारे में सरकार को समय रहते विचार करना चाहिए। इसके साथ ही कुछ ऐसे लोग भी हैं जो इसका समर्थन कर रहे हैं और चाहते हैं कि इसके हटने से लोगों के अधिकार छिन जाएंगे।
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पूर्व सरपंच किशोर कुमार ने कहा कि महाराजा द्वारा 35-ए लोगों को विशेष दर्जा प्राप्त करने के लिए अमल में लाए जाने के साथ पाकिस्तान के बजाए भारत के साथ जाने का फैसला किया था। राज्य में पहले ही युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा अगर 35-ए को हटाया गया तो वह नई मुश्किलों का सामना करेंगे।
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पीपुल सेक्युलर फोरम के प्रधान कुंदन लाल शर्मा का कहना है कि 35-ए को राज्य के लोगों की बेहतरी के लिए हटाया जाना चाहिए। पाक अधिकृत कश्मीर के लोगों को विभाजन के समय कश्मीर में रखे जाने के बजाय जम्मू में बसाया गया। बाद में कश्मीर में आतंकवाद के चलते कश्मीरी पंडितों को जम्मू व दूसरे राज्य में जाना पड़ा।
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बुजुर्ग हरि सिंह का कहना है कि समय की मांग को देखते हुए 35-ए को हटाया जाना जरूरी है। आजादी के 70 वर्षों में जो कुछ घटा वह दुनिया के सामने है। देशभक्त लोगो की मांग को देखते हुए अब अनुच्छेद 370 व 35-ए को हटाना जरूरी हो गया है।
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फैसले से पहले सियासत शुरू
विजयपुर। 35ए पर सुप्रीम कोर्ट में होने वाले फैसले से पहले तरफ सियासत शुरू हो गई है। विजयपुर के गणमान्य लोग और संगठनों ने मांग की है कि 35ए को जल्द तोड़ा जाए। डुग्गर मंच के मोहन सिंह सलाथिया, पंकज सिंह, हरभजन सिंह, सुभाष सिंह, बृजेश सिंह, किरण, सीमा देवी आदि ने इस पर गहरी चिंता जताई।
इनका कहना है कि इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में होने की स्थिति निर्धारित हो चुकी है, लेकिन राज्य में इस मुद्दे को लेकर तरह-तरह की बयानबाजी करके राजनितीक दल जनता को भड़काने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस मामले की न्यायालय में सुनवाई तय हो चुकी हो उस पर सियासत करना माहौल बिगाड़ने का प्रयास है। इस मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, उमर अबदुल्ला, नेकां अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला सहित अन्य नेता प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। राज्य की वरिष्ठ पार्टियों के पदाधिकारियों द्वारा न्यायालय में होने वाली सुनवाई पर अपनी प्रतिक्रिया जताना देश की कानून व्यवस्था को भंग करने के समान है। ब्यूरो

राज्य के विकास में रोड़ा
अखनूर। 35ए पर क्षेत्र के विभिन्नों संगठनों ने इसे खत्म करने की मांग की है। लोगों ने राज्य विकास के लिए रोड़ा बताया है। सामाजिक कार्यकर्ता रामपाल ने बताया कि वर्षों से राज्य में लागू है। मगर राजनीति के कारण उसे हटाने पर कभी गौर नहीं किया। समय के साथ अनुच्छेद 370 को हटाना जरूरी हो गया है। जिसका लाभ देशद्रोही ताकत उठा रही हैं। ग्रामीण बोध शर्मा ने कहा कि 370 के कारण राज्य में विकास रुका है। इसका लाभ कश्मीर घाटी के लोग ले रहे हैं। ऐसे में जम्मू संभाग के लोगों से हमेशा ही भेदभाव होता रहा है। इसके हटने से लोगों को हक मिलेगा। विद्यार्थी रोहन कुमार ने बताया कि जम्मू के युवाओं को सरकारी नौकरियों से वंचित रहने पर मजबूर होना पड़ता है। इसमें इसकी आड़ पर कश्मीर के युवाओं को प्राथमिकता मिलती है। सप्रीम कोर्ट को कदम उठाना चाहिए। ब्यरो
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