जम्मू एयरपोर्ट पर 12 विमान नहीं उतरने से यात्रियों में मची खलबली
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पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण जम्मू एयरपोर्ट पर शुक्रवार को निजी कंपनियों के 12 विमान नहीं उतरे। इससे सैकड़ों यात्रियों को दरबदर होना पड़ा।
लोग एयरपोर्ट के बाहर घंटों उम्मीद के साथ बैठे रहे कि कोई वैकल्पिक व्यवस्था होगी लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो पाया। एयर इंडिया की सिर्फ चार फ्लाइट्स ही जम्मू पहुंचीं, जिनके विमान नियमों पर खरे उतरे।
जम्मू एयरपोर्ट के डायरेक्टर डीके गौतम ने बताया कि जम्मू एयरपोर्ट का रनवे भारतीय वायुसेना के अधीन आता है, जबकि एयरपोर्ट की अन्य इमारतों और तकनीकी विभाग की जिम्मेदारी एयरपोर्ट अथॉरिटी के पास है।
निजी कंपनियों के विमान एयरपोर्ट पर उतरने की कुछ शर्तों और नियमों पर खरे नहीं उतर रहे थे। इस पर वायुसेना ने आपत्ति जताई थी। इसी क्रम में शुक्रवार को अचानक एयरलाइंस कंपनियों ने जम्मू के लिए तमाम फ्लाइट्स (एयर इंडिया को छोड़) रद्द कर दीं।
दोपहर बाद नई दिल्ली में डायरेक्टर जनरल आफ सिविल एविएशन, वायुसेना के अधिकारियों और एयरलाइंस कंपनियों के बीच हुई बैठक में सहमति बनी।
प्रभावित होने वाली उड़ानों में इंडिगो की छह, स्पाइस जेट की दो और जेट एयरवेज की चार फ्लाइट्स शामिल हैं। यह उड़ानें दिल्ली से जम्मू और जम्मू से दिल्ली की उड़ानें हैं।
पहले यह सूचना आई थी कि 26 अक्तूबर तक जम्मू के लिए विमान नहीं आएंगे, लेकिन एयरपोर्ट डायरेक्टर ने बताया कि बैठक में सहमति बन गई है और शनिवार से विमान सेवा शुरू हो जाएगी।
विमान सेवा ठप होने से लगभग 1200 से ज्यादा यात्री दरबदर हुए। कुछ यात्री दिल्ली में ही फंसे रहे तो कुछ को जम्मू एयरपोर्ट से वापस लौटना पड़ा।
दिल्ली से श्रीनगर (वाया जम्मू) जाने वाली फ्लाइट्स सीधे श्रीनगर रवाना की गईं। एयरपोर्ट अथारिटी के अनुसार यदि फ्लाइट्स लेट होती हैं या रद्द होती हैं, तो यात्रियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था या होटलों में ठहराने की जिम्मेदारी विमान कंपनियों की होती है।
बताया जाता है कि कुछ यात्रियों का टिकट रिफंड किया गया, जबकि शेष यात्रियों को शनिवार को अन्य विमानों में भेजा जाएगा।
उमर भी नहीं पहुंच पाए जम्मू
उन्हें शेर-ए-कश्मीर भवन में आयोजित पार्टी के कार्यक्रम में शामिल होना था। बाद में उनकी अनुपस्थिति में ही यह कार्यक्रम संपन्न हुआ। पीएमओ राज्यमंत्री डा. जितेंद्र सिंह भी विमान उपलब्ध न होने के कारण एक समारोह में भाग नहीं ले पाए।
डा. सिंह को सुबह निजी कंपनी के विमान से आना था, लेकिन उड़ान रद्द होने के कारण वह दोपहर बाद एयर इंडिया की फ्लाइट्स से जम्मू पहुंचे।
वायुसेना ने दिया था नोटामा
वायुसेना की ओर से विमान कंपनियों को सात अक्तूबर को एक नोटाम (नोटिस टू एयरमैन) जारी किया गया था जिसमें कहा गया था कि एयरपोर्ट के रनवे की वजन सहने की क्षमता कम है।
प्रतिबंध 14 अक्तूबर से 14 जनवरी तक के लिए लगाया था। इस बारे में विमानन नियामक डीजीसीए को इसी हफ्ते अवगत करा दिया गया और साथ ही एयरलाइंसों से इस बारे में संवाद किया गया था।
साथ ही कहा कि वायुसेना के अचानक सूचना देने की वजह से एयरलाइंस तैयार नहीं थी और इसके चलते जम्मू के लिए तमाम उड़ाने रद्द करनी पड़ीं। वायुसेना ने एयरलाइनों को काफी कम वजन के साथ उड़ानों के संचालन को कहा था।
सूत्रों के मुताबिक, इस मामले को नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने रक्षा मंत्रालय के समक्ष उठाया और चर्चा के बाद वायुसेना ने शुक्रवार शाम को तत्काल प्रभाव से अपना नोटाम रद्द कर दिया।