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युवाओं के हाथ में कश्मीर समस्या का हल
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जम्मू। राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा कि कश्मीर समस्या का हल युवाओं के पास है। जब मैंने कश्मीर के युवाओं को बुलाकर बात की तो उन्होंने कहा कि 13 से 20 साल की उम्र के बच्चों के बीच में ही कश्मीर का हल है। दिल्ली में कश्मीर की हर खराब चीज को दिखाया जाता है, लेकिन अच्छाई को देशवासियों के सामने नहीं लाया जाता है। यहां शुक्रवार को कन्वेंशन सेंटर में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के ई-उद्घाटन पर राज्यपाल बोल रहे थे।
राज्यपाल ने नेशनल मीडिया की ओर इशारा करते हुए कहा कि अगर कश्मीर में एक मौत हो जाती है तो वह नेशनल हेडलाइन होती है। कई राज्यों में रोज 5 से 10 मौतें होती हैं, लेकिन वह उस शहर की भी खबर नहीं होती है। कश्मीर को जानबूझ कर ऐसा दिखाया जाता है। कश्मीर की फुटबाल की टीम लीग मुकाबलों में नंबर दो पर आ गई, इसका भी कहीं जिक्र नहीं किया गया। जिस दिन कश्मीर का मोहन बगान के साथ मुकाबला था उस दिन 27000 युवा खेल देखने आए थे। मगर यह देश में नहीं दिखाया गया। दिल्ली से बहुत निराशा हुई है। एक हजार डाक्टर चालीस दिन में भर्ती हो गए, किसी ने नहीं दिखाया। नौ राउंड पंचायत और चार राउंड का निकाय चुनाव की उपलब्धि को भी किसी ने नहीं लिखा। कश्मीर में अफवाहों के बावजूद टीकाकरण में भरपूर सफलता मिली, जो एक रिकार्ड है। लेकिन यह कोई अच्छाई दिल्ली में नहीं दिखाई जाती है। पत्थरबाज बताकर गाली देते हैं, लेकिन यह सोचना होगा कि अगर बच्चों को छह बजे के बाद कुछ करने को नहीं देंगे तो वह सही या गलत कुछ तो करेंगे।
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राज्यपाल ने नेशनल मीडिया की ओर इशारा करते हुए कहा कि अगर कश्मीर में एक मौत हो जाती है तो वह नेशनल हेडलाइन होती है। कई राज्यों में रोज 5 से 10 मौतें होती हैं, लेकिन वह उस शहर की भी खबर नहीं होती है। कश्मीर को जानबूझ कर ऐसा दिखाया जाता है। कश्मीर की फुटबाल की टीम लीग मुकाबलों में नंबर दो पर आ गई, इसका भी कहीं जिक्र नहीं किया गया। जिस दिन कश्मीर का मोहन बगान के साथ मुकाबला था उस दिन 27000 युवा खेल देखने आए थे। मगर यह देश में नहीं दिखाया गया। दिल्ली से बहुत निराशा हुई है। एक हजार डाक्टर चालीस दिन में भर्ती हो गए, किसी ने नहीं दिखाया। नौ राउंड पंचायत और चार राउंड का निकाय चुनाव की उपलब्धि को भी किसी ने नहीं लिखा। कश्मीर में अफवाहों के बावजूद टीकाकरण में भरपूर सफलता मिली, जो एक रिकार्ड है। लेकिन यह कोई अच्छाई दिल्ली में नहीं दिखाई जाती है। पत्थरबाज बताकर गाली देते हैं, लेकिन यह सोचना होगा कि अगर बच्चों को छह बजे के बाद कुछ करने को नहीं देंगे तो वह सही या गलत कुछ तो करेंगे।
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