स्लो रन रेट से बनी पीडीपी-भाजपा सरकार की सेंचुरी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार की सत्ता में सेंचुरी (सौ दिन) उपलब्धियों, नाकामियों और विवादों के स्लो रन रेट से सोमवार को पूरे होने जा रहे हैं। वैचारिक रूप से भिन्नता वाले दोनों दलों की सरकार की शुरुआत भी विवादों में रही और सौ दिन भी विवादों के बीच ही पूरे होने जा रहे है।
शपथ ग्रहण समारोह के बाद मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की ओर से शांतिपूर्ण चुनाव के लिए पाकिस्तान और अलगाववादियों को श्रेय देने से उठा विवादों के बवंडर का सिलसिला हर नये दिन के साथ बढ़ता चला गया। सत्ता में आने के बाद अलगाववादी नेता मसर्रत आलम की रिहाई पर बवाल हो गया।
पीडीपी, भाजपा दोनों घटकों में इस मामले में बड़ी दूरी आ गई। दिल्ली तक मोदी सरकार से जवाब देते नहीं बना। आखिर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संसद में सफाई देनी पड़ी कि पीडीपी और मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने मसर्रत मामले में एकतरफा फैसला लिया। दोनों दलों में तल्खी को कम करने के लिए समन्वय समिति का गठन करना पड़ा। विवाद यहीं नहीं थमे।
इन पांच मुद्दों पर बीजेपी-पीडीपी में हुई तकरार
1-मसर्रत ने गिलानी की रैली में पाकिस्तान के पक्ष में नारेबाजी कर दी और पाक झंडे लहराए। इसके बाद रिहाई के तूल पकड़ते जा रहे मामले से निपटने को सरकार को आखिर में मसर्रत की गिरफ्तारी करवानी पड़ी। मसर्रत की गिरफ्तारी के बाद से अब तक कभी गिलानी तो कभी यासीन मलिक और कभी शब्बीर शाह की रैलियों में पाक झंडे लहराए जाने का क्रम जारी है।
2-गठबंधन सरकार की नई भर्ती नीति भी विवादों में रही। नई भर्ती नीति को लेकर जम्मू से लेकर कश्मीर तक इसका विरोध किया गया। खुद सरकार में शामिल भाजपा में इसको लेकर विरोध के स्वर उठे।
3- जम्मू मे एम्स न खुलना और तवी में कृत्रिम झील की व्यवहारिकता पर सवाल उठाने के मुख्यमंत्री के संवाददाता सम्मेलन में जवाब बड़ा विवाद बन गया। जम्मू में कामयाब बंद से लेकर आंदोलन की सिलसिला अब तक जारी है और भाजपा से जवाब देते नहीं बन रहा।
4- कश्मीरी विस्थापितों के लिए घाटी में अलग टाउनशिप
पीएम मोदी ने चुनाव के समय कश्मीरी पंडितों की घर वापसी को लेकर वादा किया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने मुख्यमंत्री मुफ्ती इस मुद्दे पर बात की थी। इसके बाद मुफ्ती ने अलग टाउनशिप के लिए जमीन की घोषणा कर दी। इसके बाद घाटी में तूफान आ गया अलगावादी से लेकर राजनीतिक पार्टियों ने इसका विरोध करना शुरु कर दिया। इससब के चलते मुख्यमंत्री मुफ्ती अपने वादे से पलट गए और अलग टाउनशिप को ठंड़े बस्ते में डाल दिया गया।
5- अफस्पा, अनुच्छेद 370 पर गठबंधन सरकार का कोई स्पष्ट स्टैंड नहीं दिख रहा है। दोनों ही दल इन मुद्दों पर हमेशा एक दूसरें को कोसते नजर नजर आते हैं।
गठबंधन सरकार में ये रहे विवाद
सज्जाद लोन के मंत्रालय वितरण से खुश न होने, किसानों को फसल बर्बादी के मुआवजा चेक, रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर के आतंकवादियों को आतंकवादियों से खत्म करवाने, कश्मीर में मोबाइल टावरों पर हमले, रिफ्यूजियों की समस्या का हल, पाक गोलीबारी, स्वास्थ्य मंत्री पर महिला डाक्टर से अभद्रता विवाद।
बाढ़ प्रभावितों को मुआवजा व उनका पुनर्वास, सरकारी वाहनों के विरोध में भाजपा मंत्रियों के कई दिन वाहन इस्तेमाल न करने, गिलानी पास पोर्ट मामला, उपमुख्यमंत्री की मुख्य सचिव से नाराजगी, मंत्री की शादी में हेलिकाप्टरों व सरकार वाहनों का खुला प्रयोग, अहम मुद्दों पर दोनों दलों में वैचारिक मतभेद, जम्मू में सिखों का प्रदर्शन व युवक की मौत के बाद कर्फ्यू और धारा 144 तक की नौबत आदि विवाद प्रमुख रूप से शामिल है।
वादों को पूरा करने की पहाड़ सी चुनौती
पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार के लिए वादों को पूरा करना बड़ी चुनौती है। वित्तीय संकट से रियासत को उबारकर विकास की पटरी पर दौड़ना, कश्मीरी पंडित विस्थापितों की सम्मानजनक घाटी वापसी,
रिफ्यूजियों के मसलों का हल, बाढ़ प्रभावित लोगों का पुनर्वास, जम्मू को स्वतंत्र पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित करना, जम्मू और श्रीनगर को स्मार्ट शहर बनाना, शिक्षित बेरोजगार युवाओं को रोजगार, अफस्पा को हटाने पर गौर करने से संबंधित वादे शामिल हैं।
सौ दिनों पर क्या कहते हैं कि सियासी दल
ऐतिहासिक जनादेश के बाद पीडीपी भाजपा गठबंधन सरकार एक मार्च को बनने के बाद रियासत में विश्वास का माहौल बना है। गठबंधन सरकार विकास की दिशा में तेजी से काम कर रही है। हर क्षेत्र के साथ सामान
व्यवहार और बिना किसी भेदभाव के विकास करना सरकार के एजेंडे में शामिल है। स्थानीय निकाये चुनाव करवाने को गठबंधन सरकार ने मंजूरी दी है। अभी तो सौ दिन ही हुए है गठबंधन सरकार आने वाले वक्त में
रियासत के लोगों का विश्वास जीतने में सफल रहेगी। गठबंधन सरकार भ्रष्टाचार मुक्त शासन देकर जन आकांक्षाओं को पूरा करेगी।
जुगल किशोर शर्मा, प्रदेशाध्यक्ष एवं सांसद भाजपा
पीडीपी भाजपा बड़े बड़े वादे कर वैचारिक मतभेदों के बावजूद गठबंधन में तो आ गई है। सौ दिन भी गुजर गए लेकिन विवादों के अलावा अभी तक सरकार कोई काम नहीं कर पाई है। कहीं भी विकास नजर नहीं आ
रहा है। लोगों को अब लग रहा है कि उनकी भावनाओं के साथ खिलवाड़ हुआ है। इस सरकार की शुरूआत ही पाकिस्तान, आतंकवाद और अलगाववाद को श्रेय देने से हुई है। वादों को सरकार भूल गई है। सरकारी कोष की बेतरतीब बर्बादी हो रही है। मंत्री की शादी में भी जमकर सरकारी कोष की बर्बादी हुई।
रविंद्र कुमार शर्मा, मुख्य प्रवक्ता कांग्रेस
पीडीपी भाजपा गठबंधन सरकार के सौ दिन निराशाजनक रहे। लोगों को दोनों दलों ने जो सब्जबाग दिखाये वह हकीकत में नहीं बदले। लोगों की मुश्किलें कम होने के बजाये बढ़ी है। यह अपवित्र गठबंधन से रियासत के लोगों को लाभ कम और नुकसान ज्यादा हुआ है। देवेंद्र सिंह राणा, संभागीय प्रधान नेशनल कांफ्रेंस