Jammu Kashmir Electricity: जम्मू संभाग में 10.24 लाख बिजली उपभोक्ता, 3.62 लाख की बिना मीटर जल रही बत्ती
जम्मू संभाग में मौजूदा समय में घरेलू मीटर वाले 8 लाख 81 हजार कुल उपभोक्ता हैं। इनमें पांच लाख 35 हजार मीटर वाले हैं, जबकि 3 लाख 44 हजार बिना मीटर के ही हैं। इसी तरह कामर्शियल में एक लाख 3 हजार उपभोक्ता हैं।
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जम्मू संभाग में 10 लाख 24 हजार बिजली उपभोक्ता हैं। इनमें तीन लाख 62 हजार बिना मीटर के बिजली जला रहे हैं। हर माह बिजली विभाग को करोड़ों रुपये का लाइन लॉस हो रहा है, लेकिन मीटर लगाने पर काम सुस्त है। जम्मू संभाग में मौजूदा समय में घरेलू मीटर वाले 8 लाख 81 हजार कुल उपभोक्ता हैं।
इनमें पांच लाख 35 हजार मीटर वाले हैं, जबकि 3 लाख 44 हजार बिना मीटर के ही हैं। इसी तरह कामर्शियल में एक लाख 3 हजार उपभोक्ता हैं। इनमें 91 हजार मीटर वाले, जबकि 12 हजार बिना मीटर के हैं। विभाग की अव्यवस्था के कारण लोग खुद भी मीटर लगवाने में दिलचस्पी नहीं दिख रहे हैं।
इसका कारण यह है कि बिजली ज्यादा जलाने पर बिल कम आ रहा है। मीटर लगाने से बिल चार से पांच गुना ज्यादा होगा। मौजूदा समय में इन उपभोक्ताओं को लोड के हिसाब से बिल थमाया जाता है, लेकिन यह जांच नहीं होती कि उपभोक्ता ने कितनी बिजली जलाई है।
इससे हर माह 60 फीसदी से ज्यादा लाइन लॉस हो रहा है। इसे कम करने के लिए स्मार्ट और प्रीपेड मीटर लगाने पर भी काम शुरू हुआ है, लेकिन अभी तक दोनों प्रोजेक्टों पर काम पूरा नहीं हो पाया है। इतना ही नहीं, कृषि, सरकारी विभागों, पंपों में भी मीटर नहीं लग पाए हैं। इनको भी विभाग ने अपने रिकॉर्ड में रखा है।
सरकारी विभागों में 7 हजार मीटर, 700 नहीं लगे
औद्योगिक क्षेत्र में 9100 उपभोक्ताओं में से 9 हजार उपभोक्ताओं ने मीटर लगवाए हैं, 100 ने मीटर ही नहीं लगाए हैं। कृषि क्षेत्र में 18 हजार 663 उपभोक्ताओं हैं। इनमें 15 हजार 440 मीटर वाले और 3223 बिना मीटर वाले हैं। पब्लिक लाइटिंग में 112 में से 84 बिना मीटर के हैं।
वाटर वर्क्स में दो हजार उपभोक्ता है, इनमें 12 मीटर वाले, जबकि 800 बिना मीटर के ही बिजली जला रहे हैं। इतना ही नहीं राज्य और केंद्र सरकार के विभागों में सात हजार मीटर हैं, जबकि 700 बिना मीटर के हैं। पंप सेट में 2085 उपभोक्ताओं में से 1100 मीटर वाले, जबकि 985 बिना मीटर वाले हैं।
हर माह 66 करोड़ की बिजली खपत हो रही
मौजूदा समय में कॉरपोरेशन को लाइन लोस 60 फीसदी से ज्यादा है। हर माह 66 करोड़ रुपये की बिजली की खपत होती है, लेकिन इससे आठ से दस करोड़ ही वसूली हो पाती है। इस कारण बिजली विभाग ने 2020 के बाद स्मार्ट मीटर और प्रीपेड मीटर लगाने पर काम शुरू किया था।
विरोध के बाद कुछ जगहों में काम बंद रखा गया है। अभी तक तय लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया है। ग्रामीण, शहरी इलाकों में मीटर की सुविधा दी जा रही है। ऐसे उपभोक्ता, जो मीटर नहीं लगा रहे हैं। इन पर कार्रवाई की जा रही है। मीटर लगाना सभी के लिए अनिवार्य है। - राजेश शर्मा, एक्सईएन, बिजली विभाग, जम्मू