{"_id":"6866dc1ff69fbbd0b80442a2","slug":"wrestler-biniya-won-gold-udhampur-news-c-202-1-udh1002-124875-2025-07-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Udhampur News: बीनिया पहलवान के पैतृक गांव खनेड़ में खुशी का माहौल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Udhampur News: बीनिया पहलवान के पैतृक गांव खनेड़ में खुशी का माहौल
विज्ञापन
बीनिया पहलवान स्वर्ण पदक के साथ।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संवाद न्यूज एजेंसी
रामनगर। तहसील बसंतगढ़ के खनेड़ गांव के रहने वाले बीनिया मीन पहलवान ने अमेरिका में स्वर्ण पदक जीतकर जम्मू-कश्मीर ही नहीं, बल्कि देश का नाम रोशन किया है। इस उपलब्धि उनके घर पर परिवार सहि पूरे गांव में खुशी की लहर है और सभी गर्व महसूस कर रहे हैं।
बीनिया पहलवान के पिता का नाम सैफुद्दीन है और उनका पैतृक गांव खनेड़ है। यहीं पर उनका जन्म हुआ। बीनिया के बड़े भाई मोहम्मद फारूक ने बताया कि बीनिया को बचपन में कुश्ती करने का बहुत शौक था। तब वह दसवीं कक्षा में पढ़ते थे और उनकी आयु लगभग 15 वर्ष थी। पहली बार 2001 में लाटी गांव में हुए दंगल में उन्होंने कुश्ती के मुकाबले में हिस्सा लिया। मुकाबला जीतने पर उन्हें इनाम में टीवी और तांबे का बर्तन मिला था।
इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह तहसील और जिला स्तर पर कुश्ती मुकाबलों में भाग लेने लगे। वह मुकाबलों में जीत हासिल करते गए। 2003 में कठुआ के मशेड़ी इलाके में कुश्ती में हिस्सा लेने गए। वहां पर शानदार प्रदर्शन करने पर पुलिस के उच्चाधिकारियों ने बीनिया पहलवान की सराहना की ।
विज्ञापन
2005 में उधमपुर में आयोजित दंगल में उन्होंने बढि़या प्रदर्शन किया। इसके बाद जब बीनिया ने बड़ी माली का मुकाबला जीता तो दंगल में मुख्य मेहमान के तौर में पहुंचे एसपी उधमपुर ने उन्हें जम्मू-कश्मीर पुलिस की ओर से खेल मुकाबलों में हिस्सा लेने को प्रेरित किया। उन्होंने बीनिया को एसपीओ पद का नियुक्ति पत्र दिया।
उनके बड़े भाई मोहम्मद फारूक ने बताया कि चार वर्ष पहले पिता की मृत्यु होने के बाद अब घर में मां के साथ बीनिया का परिवार रहता है।
विज्ञापन
रामनगर। तहसील बसंतगढ़ के खनेड़ गांव के रहने वाले बीनिया मीन पहलवान ने अमेरिका में स्वर्ण पदक जीतकर जम्मू-कश्मीर ही नहीं, बल्कि देश का नाम रोशन किया है। इस उपलब्धि उनके घर पर परिवार सहि पूरे गांव में खुशी की लहर है और सभी गर्व महसूस कर रहे हैं।
बीनिया पहलवान के पिता का नाम सैफुद्दीन है और उनका पैतृक गांव खनेड़ है। यहीं पर उनका जन्म हुआ। बीनिया के बड़े भाई मोहम्मद फारूक ने बताया कि बीनिया को बचपन में कुश्ती करने का बहुत शौक था। तब वह दसवीं कक्षा में पढ़ते थे और उनकी आयु लगभग 15 वर्ष थी। पहली बार 2001 में लाटी गांव में हुए दंगल में उन्होंने कुश्ती के मुकाबले में हिस्सा लिया। मुकाबला जीतने पर उन्हें इनाम में टीवी और तांबे का बर्तन मिला था।
विज्ञापन
इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह तहसील और जिला स्तर पर कुश्ती मुकाबलों में भाग लेने लगे। वह मुकाबलों में जीत हासिल करते गए। 2003 में कठुआ के मशेड़ी इलाके में कुश्ती में हिस्सा लेने गए। वहां पर शानदार प्रदर्शन करने पर पुलिस के उच्चाधिकारियों ने बीनिया पहलवान की सराहना की ।
विज्ञापन
2005 में उधमपुर में आयोजित दंगल में उन्होंने बढि़या प्रदर्शन किया। इसके बाद जब बीनिया ने बड़ी माली का मुकाबला जीता तो दंगल में मुख्य मेहमान के तौर में पहुंचे एसपी उधमपुर ने उन्हें जम्मू-कश्मीर पुलिस की ओर से खेल मुकाबलों में हिस्सा लेने को प्रेरित किया। उन्होंने बीनिया को एसपीओ पद का नियुक्ति पत्र दिया।
उनके बड़े भाई मोहम्मद फारूक ने बताया कि चार वर्ष पहले पिता की मृत्यु होने के बाद अब घर में मां के साथ बीनिया का परिवार रहता है।