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Udhampur News: जल-विहीन पंचायत के किसानों के लिए संजीवनी बनी वाटर शेड परियोजना
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उधमपुर। नाबार्ड की ओर से चन्नी मानसर में बनाया गया चेकडेम। संवाद
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- नाबार्ड के तहत तैयार चन्नी-मानसर चेक डैम ने भीषण जल संकट को किया दूर
- अब किसान मौसमी फसलें उगाकर आय में कर रहे बेहतरीन वृद्धि
सौरभ सागर
उधमपुर। वाटरशेड परियोजना के अंतर्गत नवनिर्मित चेक डैम ने उधमपुर जिले की जल-विहीन चन्नी-मानसर पंचायत के किसानों के लिए राहत और नई उम्मीद जगाई है। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक द्वारा 4.54 लाख रुपये की अनुमानित लागत से तैयार बांध ने उस भीषण जल संकट को दूर किया है जिसके कारण कई किसान अपनी खेती छोड़ने को मजबूर हो गए थे। मृदा और जल संरक्षण के उद्देश्य से बनाई गई इस परियोजना ने न केवल कृषि गतिविधियों को पुनर्जीवित किया है, बल्कि गांव के सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने को भी मजबूत किया है।
नाबार्ड द्वारा वाटरशेड कार्यक्रम के तहत एक कुआं और एक चेकडैम का निर्माण किया गया। जिससे चन्नी-मानसर क्षेत्र के स्थानीय लोगों को लाभ मिला। नाबार्ड यहां दो तरह से काम करता है जिसमें स्प्रिंग-शेड के तहत पुराने झरनों को पुनर्जीवित किया जाता है और वाटरशेड के तहत जल और मृदा संरक्षण पर काम होता है। वर्षों से चन्नी-मानसर पंचायत के पहाड़ी इलाके में उचित जल भंडारण सुविधाओं का अभाव था, जिसके कारण बारिश का पानी बिना उपयोग के ही बह जाता था। जिसके परिणामस्वरूप कृषि भूमि का विशाल क्षेत्र बंजर हो गया। जिससे किसान मौसमी फसलें उगाने में असमर्थ हो गए। कई लोगों को कृषि छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा, जिससे क्षेत्र की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई। हालांकि, नवनिर्मित चेकडैम ने बारिश के जल को प्रभावी ढंग से संचयित और फसलों के लिए निरंतर सिंचाई सुनिश्चित करके पूरे परिदृश्य को बदल दिया।
लाभार्थी किसान रमेश कुमार ने कहा कि इस बांध के कारण, हमारे पास अपनी फसलों के लिए पानी है। यहां तक कि घरेलू और जंगली जानवरों को भी इससे पीने के लिए पानी मिल रहा है।
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नाबार्ड के प्रबंधक डॉ. सिद्धार्थ गौतम ने बताया कि यह परियोजना 2018 में शुरू की गई थी। परियोजना के अंतर्गत न केवल सूखे जैसी स्थितियों को कम किया गया है, बल्कि कृषि उत्पादकता को भी बढ़ाया गया है। किसान अब कई मौसमी फसलें उगा सकते हैं, जिससे उनकी आय में बेहतरीन वृद्धि हुई है। परियोजना ने मृदा अपरदन को रोकने और भूजल स्तर में सुधार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे समुदाय का लंबे समय तक लाभ सुनिश्चित हुआ है।
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- अब किसान मौसमी फसलें उगाकर आय में कर रहे बेहतरीन वृद्धि
सौरभ सागर
उधमपुर। वाटरशेड परियोजना के अंतर्गत नवनिर्मित चेक डैम ने उधमपुर जिले की जल-विहीन चन्नी-मानसर पंचायत के किसानों के लिए राहत और नई उम्मीद जगाई है। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक द्वारा 4.54 लाख रुपये की अनुमानित लागत से तैयार बांध ने उस भीषण जल संकट को दूर किया है जिसके कारण कई किसान अपनी खेती छोड़ने को मजबूर हो गए थे। मृदा और जल संरक्षण के उद्देश्य से बनाई गई इस परियोजना ने न केवल कृषि गतिविधियों को पुनर्जीवित किया है, बल्कि गांव के सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने को भी मजबूत किया है।
नाबार्ड द्वारा वाटरशेड कार्यक्रम के तहत एक कुआं और एक चेकडैम का निर्माण किया गया। जिससे चन्नी-मानसर क्षेत्र के स्थानीय लोगों को लाभ मिला। नाबार्ड यहां दो तरह से काम करता है जिसमें स्प्रिंग-शेड के तहत पुराने झरनों को पुनर्जीवित किया जाता है और वाटरशेड के तहत जल और मृदा संरक्षण पर काम होता है। वर्षों से चन्नी-मानसर पंचायत के पहाड़ी इलाके में उचित जल भंडारण सुविधाओं का अभाव था, जिसके कारण बारिश का पानी बिना उपयोग के ही बह जाता था। जिसके परिणामस्वरूप कृषि भूमि का विशाल क्षेत्र बंजर हो गया। जिससे किसान मौसमी फसलें उगाने में असमर्थ हो गए। कई लोगों को कृषि छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा, जिससे क्षेत्र की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई। हालांकि, नवनिर्मित चेकडैम ने बारिश के जल को प्रभावी ढंग से संचयित और फसलों के लिए निरंतर सिंचाई सुनिश्चित करके पूरे परिदृश्य को बदल दिया।
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लाभार्थी किसान रमेश कुमार ने कहा कि इस बांध के कारण, हमारे पास अपनी फसलों के लिए पानी है। यहां तक कि घरेलू और जंगली जानवरों को भी इससे पीने के लिए पानी मिल रहा है।
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नाबार्ड के प्रबंधक डॉ. सिद्धार्थ गौतम ने बताया कि यह परियोजना 2018 में शुरू की गई थी। परियोजना के अंतर्गत न केवल सूखे जैसी स्थितियों को कम किया गया है, बल्कि कृषि उत्पादकता को भी बढ़ाया गया है। किसान अब कई मौसमी फसलें उगा सकते हैं, जिससे उनकी आय में बेहतरीन वृद्धि हुई है। परियोजना ने मृदा अपरदन को रोकने और भूजल स्तर में सुधार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे समुदाय का लंबे समय तक लाभ सुनिश्चित हुआ है।