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जिला अस्पताल में अभी तक नहीं चल पाए हैं ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट
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जिला अस्पताल में ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट के बारे में जानकारी देते मेडिकल सुपरिटेंडेंट डा. विजय रै?
- फोटो : UDHAMPUR
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उधमपुर। जिला अस्पताल में लगाए गए दोनों ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट अब तक काम नहीं कर पाए हैं। पीएम केयर के तहत लगाए इन प्लांटों में कुछ तकनीकी खामी आ रही है। इसको दूर करने के लिए काम चल रहा है।
जबकि, स्वास्थ्य विभाग के लगाए गए ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट का काम पूरा हो गया है। इसकी टेस्टिंग का काम चल रहा है। कोरोना संक्रमण के ओमिक्रॉन स्वरूप को लेकर जिला अस्पताल में की गई तैयारियों का जायजा लेने मंगलवार को भाजपा के मंडल प्रधान विवेक गुप्ता जिला अस्पताल पहुंचे, जिन्हें मेडिकल सुपरिंटेंडेंट ने पूरी जानकारी दी।
दिसंबर 2020 में जिला अस्पताल के लिए ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट स्थापित करने की मंजूरी मिली थी। छह महीने के बाद अस्पताल में तीन हजार लीटर क्षमता के प्लांट की मशीनरी पहुंचना शुरू हुई। इसके साथ केंद्र सरकार ने पीएम केयर के तहत भी एक और ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट स्थापित करने की मंजूरी दे दी थी। इसकी क्षमता एक हजार लीटर की थी।
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दोनों प्लांट की मशीनरी करीब तीन महीने पहले ही जिला अस्पताल में स्थापित की गई हैं, लेकिन अब तक दोनों प्लांट नियमित तरीके से ऑक्सीजन जनरेट करने का काम नहीं कर पाए हैं। तीन हजार लीटर का प्लांट पूरी तरह स्थापित हो चुका है, और इसकी टेस्टिंग का काम किया जा रहा है। जबकि, एक हजार लीटर का प्लांट अब तक काम नहीं कर पाया है। इसमें कुछ तकनीकी कमी सामने आ रही हैं।
एक हजार लीटर के प्लांट में जीरो लाइट केमिकल में प्योरिटी नहीं आ रही है। ऑक्सीजन में करीब 90 प्रतिशत प्योरिटी चाहिए। जबकि, इस प्लांट में 60 प्रतिशत ही प्योरिटी आ रही है। इसके साथ मरीज के बेड तक प्रेशर भी बहुत ज्यादा पहुुंच रहा है। मरीज तक करीब 4.5 बार प्रेशर पहुंचना चाहिए। इसमें करीब छह बार प्रेशर पहुंच रहा है।
वहीं, तीन हजार लीटर के प्लांट में प्योरिटी बिल्कुल सही है। इसका प्रेशर भी सही है। लेकिन, इसकी अभी टेस्टिंग चल रही है। मेडिकल सुपरिंटेंडेंट से जानकारी हासिल करने के बाद भाजपा नेता का कहना था कि जिला अस्पताल में तैयारी पूरी है। नए वेरियंट से लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।
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पीएम केयर के तहत लगाए गए प्लांट की तकनीकी खामी को दूर करने के लिए डीआरडीओ की टीम पहुंच गई है। जल्द ही इस कमी को दूर कर दिया जाएगा। जबकि, तीन हजार लीटर क्षमता के प्लांट में कोई कमी सामने नहीं आई है। इसकी टेस्टिंग चल रही है। कुछ दिनों में इसको शुरू कर दिया जाएगा। प्लांट को चलाने में बहुत ज्यादा बिजली का इस्तेमाल होता है। इसलिए, इनको ज्यादातर बंद रखा जाता है। जब जरूरत होगी तो इनको शुरू कर दिया जाएगा।
- डॉ. विजय रैना, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, जिला अस्पताल
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जबकि, स्वास्थ्य विभाग के लगाए गए ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट का काम पूरा हो गया है। इसकी टेस्टिंग का काम चल रहा है। कोरोना संक्रमण के ओमिक्रॉन स्वरूप को लेकर जिला अस्पताल में की गई तैयारियों का जायजा लेने मंगलवार को भाजपा के मंडल प्रधान विवेक गुप्ता जिला अस्पताल पहुंचे, जिन्हें मेडिकल सुपरिंटेंडेंट ने पूरी जानकारी दी।
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दिसंबर 2020 में जिला अस्पताल के लिए ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट स्थापित करने की मंजूरी मिली थी। छह महीने के बाद अस्पताल में तीन हजार लीटर क्षमता के प्लांट की मशीनरी पहुंचना शुरू हुई। इसके साथ केंद्र सरकार ने पीएम केयर के तहत भी एक और ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट स्थापित करने की मंजूरी दे दी थी। इसकी क्षमता एक हजार लीटर की थी।
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दोनों प्लांट की मशीनरी करीब तीन महीने पहले ही जिला अस्पताल में स्थापित की गई हैं, लेकिन अब तक दोनों प्लांट नियमित तरीके से ऑक्सीजन जनरेट करने का काम नहीं कर पाए हैं। तीन हजार लीटर का प्लांट पूरी तरह स्थापित हो चुका है, और इसकी टेस्टिंग का काम किया जा रहा है। जबकि, एक हजार लीटर का प्लांट अब तक काम नहीं कर पाया है। इसमें कुछ तकनीकी कमी सामने आ रही हैं।
एक हजार लीटर के प्लांट में जीरो लाइट केमिकल में प्योरिटी नहीं आ रही है। ऑक्सीजन में करीब 90 प्रतिशत प्योरिटी चाहिए। जबकि, इस प्लांट में 60 प्रतिशत ही प्योरिटी आ रही है। इसके साथ मरीज के बेड तक प्रेशर भी बहुत ज्यादा पहुुंच रहा है। मरीज तक करीब 4.5 बार प्रेशर पहुंचना चाहिए। इसमें करीब छह बार प्रेशर पहुंच रहा है।
वहीं, तीन हजार लीटर के प्लांट में प्योरिटी बिल्कुल सही है। इसका प्रेशर भी सही है। लेकिन, इसकी अभी टेस्टिंग चल रही है। मेडिकल सुपरिंटेंडेंट से जानकारी हासिल करने के बाद भाजपा नेता का कहना था कि जिला अस्पताल में तैयारी पूरी है। नए वेरियंट से लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।
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पीएम केयर के तहत लगाए गए प्लांट की तकनीकी खामी को दूर करने के लिए डीआरडीओ की टीम पहुंच गई है। जल्द ही इस कमी को दूर कर दिया जाएगा। जबकि, तीन हजार लीटर क्षमता के प्लांट में कोई कमी सामने नहीं आई है। इसकी टेस्टिंग चल रही है। कुछ दिनों में इसको शुरू कर दिया जाएगा। प्लांट को चलाने में बहुत ज्यादा बिजली का इस्तेमाल होता है। इसलिए, इनको ज्यादातर बंद रखा जाता है। जब जरूरत होगी तो इनको शुरू कर दिया जाएगा।
- डॉ. विजय रैना, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, जिला अस्पताल