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Udhampur News: डेढ़ साल से बंद पशु चिकित्सा डिस्पेंसरी बनी खंडहर
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चनुंनता में बंद पड़ी पशु चिकित्सा डिस्पेंसरी की इमारत की खस्ता हालत।
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- लोगों नही मिल पा रहा लाभ, पशुओं का उपचार कराने के लिए निजी डॉक्टर बुलाने पर मजबूर
- चनुंनता व उसके आसपास पालतू मवेशियों की संख्या लगभग 15 हजार
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। चनुनंता पंचायत में पशू चिकित्सा विभाग की ओर से लोगों के मवेशियों के लिए स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के लिए डिस्पेंसरी का निर्माण किया गया था लेकिन पिछले डेढ़ साल से यह बंद होने से इसकी इमारत खंडहर में तबदील हो गई है।
डिस्पेंसरी के बंद होने से क्षेत्र के लोगों के साथ-साथ अन्य पंचायती के लोगों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि स्थानीय लोगों ने कई बार विभाग के उच्च अधिकारियों से डिस्पेंसरी खोलने की मांग की लेकिन सुनवाई नहीं हुई। डिस्पेंसरी वाली जगह जंगली झाड़ियां व घास से भर चुकी है। ग्रामीणों को अपने माल मवेशियों के लिए पर्याप्त चिकित्सा सुविधा भी नहीं मिल पा रही है। क्षेत्र के ज्यादातर लोग खेतीबाड़ी पर निर्भर हैं। लोगों ने काफी संख्या में मवेशी पाल रखे हैं। इसी से उनकी रोजी-रोटी चलती है। पूरी पंचायत व आसपास के क्षेत्र से मवेशियों की आबादी लगभग 15 हजार है। मवेशियों के बीमार पड़ने या अन्य तरह ही कोई तकलीफ होने पर लोगों को बाहर से प्राइवेट तौर पर डॉक्टर को बुलाना पड़ता है जिससे परेशानी के साथ-साथ आम आदमी पर आर्थिक भोज भी पड़ता है।
समाज सेवक रतन का कहना था कि क्षेत्र में डिस्पेंसरी 2001 में बनाई गई थी ताकि क्षेत्र के साथ-साथ आसपास रहने वाले लोगों को भी इसका लाभ मिल सके लेकिन हैरानी की बात यह है कि पिछले ढाई साल से डिस्पेंसरी पूरी तरह से बंद हो चुकी है और इमारत की हालत अपनी बदहाली बयां कर रही है। कई बार पशू चिकित्सा जिला मुख्य अधिकारी को भी इस बारे में अवगत करवा चुके हैं लेकिन कुछ नहीं हुआ।
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कोट....
विभाग के जिला मुख्य अधिकारी से बंद पड़ी डिस्पेंसरी को खोलने के लिए बात की गई है। उम्मीद है कि जल्द ही डिस्पेंसरी खुल जाएगी। लोगों को आ रही समस्या से निजात मिलेगी। -
डॉ सुनील भारद्वाज, विधायक रामनगर।
फोटो सहित
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- चनुंनता व उसके आसपास पालतू मवेशियों की संख्या लगभग 15 हजार
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। चनुनंता पंचायत में पशू चिकित्सा विभाग की ओर से लोगों के मवेशियों के लिए स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के लिए डिस्पेंसरी का निर्माण किया गया था लेकिन पिछले डेढ़ साल से यह बंद होने से इसकी इमारत खंडहर में तबदील हो गई है।
डिस्पेंसरी के बंद होने से क्षेत्र के लोगों के साथ-साथ अन्य पंचायती के लोगों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि स्थानीय लोगों ने कई बार विभाग के उच्च अधिकारियों से डिस्पेंसरी खोलने की मांग की लेकिन सुनवाई नहीं हुई। डिस्पेंसरी वाली जगह जंगली झाड़ियां व घास से भर चुकी है। ग्रामीणों को अपने माल मवेशियों के लिए पर्याप्त चिकित्सा सुविधा भी नहीं मिल पा रही है। क्षेत्र के ज्यादातर लोग खेतीबाड़ी पर निर्भर हैं। लोगों ने काफी संख्या में मवेशी पाल रखे हैं। इसी से उनकी रोजी-रोटी चलती है। पूरी पंचायत व आसपास के क्षेत्र से मवेशियों की आबादी लगभग 15 हजार है। मवेशियों के बीमार पड़ने या अन्य तरह ही कोई तकलीफ होने पर लोगों को बाहर से प्राइवेट तौर पर डॉक्टर को बुलाना पड़ता है जिससे परेशानी के साथ-साथ आम आदमी पर आर्थिक भोज भी पड़ता है।
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समाज सेवक रतन का कहना था कि क्षेत्र में डिस्पेंसरी 2001 में बनाई गई थी ताकि क्षेत्र के साथ-साथ आसपास रहने वाले लोगों को भी इसका लाभ मिल सके लेकिन हैरानी की बात यह है कि पिछले ढाई साल से डिस्पेंसरी पूरी तरह से बंद हो चुकी है और इमारत की हालत अपनी बदहाली बयां कर रही है। कई बार पशू चिकित्सा जिला मुख्य अधिकारी को भी इस बारे में अवगत करवा चुके हैं लेकिन कुछ नहीं हुआ।
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विभाग के जिला मुख्य अधिकारी से बंद पड़ी डिस्पेंसरी को खोलने के लिए बात की गई है। उम्मीद है कि जल्द ही डिस्पेंसरी खुल जाएगी। लोगों को आ रही समस्या से निजात मिलेगी। -
डॉ सुनील भारद्वाज, विधायक रामनगर।
फोटो सहित