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Udhampur News: कुलदीप के संस्कार में लगे पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे, हर घर से वीडीजी भर्ती होने के उठे स्वर
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वीडीजी नजीर अहमद के जनाजे में शामिल लोग। संवाद
- फोटो : kishatwad
15 साल बाद फिर किश्तवाड़ क्षेत्र में आतंकी सक्रिय, सालों पहले हुई थी इसी तरह एक हत्या
दोस्त थे दोनों, नजीर ही संभालता था कुलदीप के पशु, पहली बार एक साथ जंगल में गए
संवाद न्यूज एजेंसी
किश्तवाड़। आतंकवादियों द्वारा मारे गए दो ग्राम रक्षा गार्डों की अंतिम यात्रा में हर आंख नम रही। सैकड़ों लोगों ने गांव ओहली में आतंकियों द्वारा मारे गए वीडीजी नजीर अहमद और कुलदीप कुमार को अंतिम विदाई थी।
सारा दिन ओहली गांव में मातम छाया रहा। सुबह सबसे पहले ग्राम रक्षक नजीर अहमद को सपुर्द-ए-खाक किया गया। इसके बाद कुलदीप कुमार का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। लोगों ने कुलदीप कुमार अमर रहे, पाकिस्तान मुर्दाबाद और आतंकवाद मुर्दाबाद के नारे लगाए। ग्रामीण फिरदौस ने कहा कि हम चाहते हैं कि सरकार 130 घरों में से प्रत्येक से एक वीडीजी की भर्ती करे।
वीरवार को हुई हत्याओं के बाद दोनों ग्राम रक्षा गार्डों के शव शुक्रवार देर रात ओहली गांव स्थित उनके घर लाए गए थे। संस्कार में पहुंचे अधिकारियों ने कहा कि दोनों मवेशियों को चराने के लिए वन क्षेत्र में गए थे। कुलदीप कुमार ने एक सप्ताह पहले अपने पिता अमर चंद को खो दिया था और त्रासदी के बाद यह वन क्षेत्र की उनकी पहली यात्रा थी। इस दौरान दोस्त नजीर अहमद ही उनके पशुओं की देखभाल कर रहे थे। लोगों ने बताया कि गांव में यह दूसरी घटना थी। दशकों पहले भी आतंकवादियों ने एक निवासी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। 15 साल से अधिक समय पहले इस क्षेत्र को आतंकवाद से मुक्त कर दिया गया था और नवीनतम घटना ग्रामीणों के लिए चिंता का कारण है। पूर्व सरपंच मोहम्मद फारूक ने बताया कि नजीर के परिवार में उनकी पत्नी, तीन बेटे और एक बेटी के अलावा एक विकलांग भाई है, जबकि कुमार अपने पीछे पत्नी, दो बेटे और एक बेटी छोड़ गए हैं। फारूक ने कहा कि गांव तक सड़क नहीं है। जहां तक सड़क है, गांव उससे पांच किलोमीटर आगे है। यही कारण है कि शवों को ढूंढने में घंटों लग गए और खोजी दलों को वन क्षेत्र से शव निकालने में ही लगभग आठ घंटे लग गए। हम सरकार से अनुरोध करते हैं कि प्रत्येक परिवार को सरकारी नौकरी सहित पर्याप्त अनुग्रह राहत प्रदान की जाए।
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हम सदियों से साथ, आतंकी नहीं डाल सकते संबंधों में दरार : पूर्व सरपंच मोहम्मद फारूक ने आतंकवाद से निपटने के लिए गांव में वीडीजी को मजबूत करने की भी मांग की। उन्होंने कहा, वे (आतंकवादी) हमारे समुदायों के बीच दरार पैदा करना चाहते हैं लेकिन हम उन्हें बताना चाहते हैं कि हम सदियों से एक साथ रह रहे हैं और उनके नापाक मंसूबों को नाकाम कर देंगे। ग्रामीण फिरदौस ने कहा कि आतंकियों के सफाए के लिए बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाने की मांग की।
पाकिस्तान निहत्थों का खून बहा रहा
रिखी राज ने पाकिस्तान की आलोचना की और कहा कि निहत्थे और गरीब लोगों को मारना कोई जिहाद नहीं है। उन्होंने कहा, पाकिस्तान कायर है और वह हमारी सेना से नहीं लड़ सकता, इसलिए निर्दोषों का खून बहाया ंजा रहा है। पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) की एक शाखा, कश्मीर टाइगर्स ने दावा किया है कि उसने वीडीजी को मार डाला। समूह ने शवों की तस्वीरें भी साझा कीं। किश्तवाड़ के साथ-साथ राजोरी, पुंछ, रियासी, उधमपुर, डोडा और कठुआ जिलों सहित जम्मू क्षेत्र के कई अन्य जिलों में इस साल आतंकवादी हमलों में वृद्धि दर्ज की गई।
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दोस्त थे दोनों, नजीर ही संभालता था कुलदीप के पशु, पहली बार एक साथ जंगल में गए
संवाद न्यूज एजेंसी
किश्तवाड़। आतंकवादियों द्वारा मारे गए दो ग्राम रक्षा गार्डों की अंतिम यात्रा में हर आंख नम रही। सैकड़ों लोगों ने गांव ओहली में आतंकियों द्वारा मारे गए वीडीजी नजीर अहमद और कुलदीप कुमार को अंतिम विदाई थी।
सारा दिन ओहली गांव में मातम छाया रहा। सुबह सबसे पहले ग्राम रक्षक नजीर अहमद को सपुर्द-ए-खाक किया गया। इसके बाद कुलदीप कुमार का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। लोगों ने कुलदीप कुमार अमर रहे, पाकिस्तान मुर्दाबाद और आतंकवाद मुर्दाबाद के नारे लगाए। ग्रामीण फिरदौस ने कहा कि हम चाहते हैं कि सरकार 130 घरों में से प्रत्येक से एक वीडीजी की भर्ती करे।
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वीरवार को हुई हत्याओं के बाद दोनों ग्राम रक्षा गार्डों के शव शुक्रवार देर रात ओहली गांव स्थित उनके घर लाए गए थे। संस्कार में पहुंचे अधिकारियों ने कहा कि दोनों मवेशियों को चराने के लिए वन क्षेत्र में गए थे। कुलदीप कुमार ने एक सप्ताह पहले अपने पिता अमर चंद को खो दिया था और त्रासदी के बाद यह वन क्षेत्र की उनकी पहली यात्रा थी। इस दौरान दोस्त नजीर अहमद ही उनके पशुओं की देखभाल कर रहे थे। लोगों ने बताया कि गांव में यह दूसरी घटना थी। दशकों पहले भी आतंकवादियों ने एक निवासी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। 15 साल से अधिक समय पहले इस क्षेत्र को आतंकवाद से मुक्त कर दिया गया था और नवीनतम घटना ग्रामीणों के लिए चिंता का कारण है। पूर्व सरपंच मोहम्मद फारूक ने बताया कि नजीर के परिवार में उनकी पत्नी, तीन बेटे और एक बेटी के अलावा एक विकलांग भाई है, जबकि कुमार अपने पीछे पत्नी, दो बेटे और एक बेटी छोड़ गए हैं। फारूक ने कहा कि गांव तक सड़क नहीं है। जहां तक सड़क है, गांव उससे पांच किलोमीटर आगे है। यही कारण है कि शवों को ढूंढने में घंटों लग गए और खोजी दलों को वन क्षेत्र से शव निकालने में ही लगभग आठ घंटे लग गए। हम सरकार से अनुरोध करते हैं कि प्रत्येक परिवार को सरकारी नौकरी सहित पर्याप्त अनुग्रह राहत प्रदान की जाए।
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हम सदियों से साथ, आतंकी नहीं डाल सकते संबंधों में दरार : पूर्व सरपंच मोहम्मद फारूक ने आतंकवाद से निपटने के लिए गांव में वीडीजी को मजबूत करने की भी मांग की। उन्होंने कहा, वे (आतंकवादी) हमारे समुदायों के बीच दरार पैदा करना चाहते हैं लेकिन हम उन्हें बताना चाहते हैं कि हम सदियों से एक साथ रह रहे हैं और उनके नापाक मंसूबों को नाकाम कर देंगे। ग्रामीण फिरदौस ने कहा कि आतंकियों के सफाए के लिए बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाने की मांग की।
पाकिस्तान निहत्थों का खून बहा रहा
रिखी राज ने पाकिस्तान की आलोचना की और कहा कि निहत्थे और गरीब लोगों को मारना कोई जिहाद नहीं है। उन्होंने कहा, पाकिस्तान कायर है और वह हमारी सेना से नहीं लड़ सकता, इसलिए निर्दोषों का खून बहाया ंजा रहा है। पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) की एक शाखा, कश्मीर टाइगर्स ने दावा किया है कि उसने वीडीजी को मार डाला। समूह ने शवों की तस्वीरें भी साझा कीं। किश्तवाड़ के साथ-साथ राजोरी, पुंछ, रियासी, उधमपुर, डोडा और कठुआ जिलों सहित जम्मू क्षेत्र के कई अन्य जिलों में इस साल आतंकवादी हमलों में वृद्धि दर्ज की गई।