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Udhampur News: मंजूरी के डेढ़ साल बाद भी बिजली ढांचे की मजबूती की योजना टेंडरिंग में लटकी
Mon, 23 Sep 2024 02:34 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
Updated Mon, 23 Sep 2024 02:34 AM IST
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रोजाना जिलावासियों को लाइन में फाल्ट और तार टूटने की वजह से झेलनी पड़ रही बिजली कटौती की समस्या
194 करेाड़ रुपये की लागत से पहले चरण के काम को मिली थी मंजूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। जिले भर में 50 साल पुराने ढांचे के सहारे बिजली की आपूर्ति हो रही है। इस कारण लाइनों में फाल्ट और तारों के टूटने की वजह से लोगों को रोजाना बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, डेढ़ साल पहले 194 करोड़ की रुपये आरडीएसएस योजना को मंजूरी मिल चुकी है।
लेकिन, अभी तक टेंडरिंग प्रक्रिया ही पूरी नहीं हो पाई है। इससे अभी तक काम शुरू ही नहीं हुआ है। इससे विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। वहीं, लोगों में भी रोष व्याप्त है।
शहर में आए दिन किसी न किसी एलटी लाइन, फीडर अथवा बिजली ट्रांसफार्मर में फाल्ट आने से शहरवासियों को कई कई घंटे बिना सुविधा के गुजारने पड़ रहे हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए सरकार की तरफ से लगभग डेढ़ साल पहले केंद्र प्रायोजित पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) के तहत करीब 194 करेाड़ रुपये की लागत से पहले चरण के काम को मंजूरी दी गई थी।
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लेकिन, लंबा अरसा गुजरने के बाद भी जमीनी स्तर पर योजना का काम आगे नहीं बढ़ पाया है। जिले में मौजूदा समय में करीब 1.50 लाख बिजली कनेक्शन हैं, जिसमें से 39 हजार शहर में है।
योजना के तहत विभाग की ओर से यह होना है कार्य
विभाग की ओर से इस योजना के तहत जिलेभर में ट्रांसफार्मर, एलटी लाइन, पुराने तार, ग्रिड स्टेशन अपग्रेडेशन के साथ ही नए खंभे, 11केवीए फीडर, 100 वाट की क्षमता वाले ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाई जानी है। 27 किलोमीटर लंबी नई 11 केवीए लाइन डालने के साथ ही 460 बड़े नए ट्रांसफार्मर लगाए जाएंगे। 40 किलोमीटर तक एबीसी लाइन के तार बिछाने के साथ ही पुराने एलटी तारों को बदलकर 300 किलोमीटर तक नए तार डाले जाएंगे। जिले में 100 वाट वाले ट्रांसफार्मरों की क्षमता को बढ़ाकर 250 वाट की जाएगी। 250 वाट के ट्रांसफार्मरों की क्षमता 400 वाट और 400 वाट वाले ट्रांसफार्मरों की 630 वाट की जाएगी। दूरदराज के क्षेत्रों में 15 हजार खंभे लगाने के साथ ही ग्रिड स्टेशनों के पुराने उपकरणों को बदला जाना है।
बिजली कटौती का शेड्यूल तो पता है लेकिन बार-बार असमय फाल्ट के कारण अधिक समस्या उठानी पड़ती है। विभागीय कर्मचारियों द्वारा फाल्ट को ठीक करके कुछ राहत तो दिलाई जाती है लेकिन कुछ समय के बाद समस्या दोबारा से शुरू हो जाती है।
-जुगल किशोर, स्थानीय निवासी
बिजली ढांचा पुराना होने के कारण बार बार फाल्ट आने की समस्या पेश आ रही है। थोड़ी सी हवा चलने अथवा मौसम में हल्की खराबी आने पर ही शहर के अधिकतर इलाकों में बिजली गुल हो जाती है और लोगों को कई कई घंटे बिना बिजली के परेशान होना पड़ता है। इसके लिए बिजली ढांचे को मजबूत करने की सख्त जरूरत है।
-अंकित शर्मा, स्थानीय निवासी
शहर में बिजली कटौती तो ग्रामीण इलाकों में लो वोल्टेज की समस्या, खंभों की कमी जैसी कई समस्याएं जिलावासियों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं। शहर में भी तारों और बिजली ट्रांसफार्मरों को अपग्रेड करने अथवा बदलने की जरूरत काफी ज्यादा है। बिजली ढांचा काफी पुराना है और इसे अब अपग्रेड करने की जरूरत है।
-शंकर चंद, स्थानीय निवासी
खंभो पर आग लगना अथवा तारे टूटने जैसी घटनाएं आम हो चली हैं। इसका बडा कारण यह भी है कि यहां बिजली ढांचा काफी पुराना है। कई दशक बीच जाने के बाद भी इसे अभी तक अपग्रेड नहीं किया गया है। जबकि पहले के मुकाबले शहर और ग्रामीण इलाकों में जनसंख्या बढ़ने के साथ ही बिजली कनेक्शन की संख्या में भी काफी ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। इसलिए बिजली ढांचे को भी अपग्रेड करने की जरूरत है।
-गुरवचन सिंह, स्थानीय निवासी
उधमपुर में बिजली ढांचे की मजबूती के लिए केंद्र प्रायोजित पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) के तहत करीब 194 करेाड़ रूपए के पहले चरण के काम की मंजूरी मिल चुकी है। उधमपुर में एनटीपीसी को इस काम की जिम्मेदारी मिली है। टेंडरिंग प्रक्रिया को लेकर काम चल रहा है। उम्मीद है इस साल के अंत तक इस पर काम शुरू हो जाएगा।
-सुनील दत्त पंडोह, एक्सईएन, पीडीडी, उधमपुर
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194 करेाड़ रुपये की लागत से पहले चरण के काम को मिली थी मंजूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। जिले भर में 50 साल पुराने ढांचे के सहारे बिजली की आपूर्ति हो रही है। इस कारण लाइनों में फाल्ट और तारों के टूटने की वजह से लोगों को रोजाना बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, डेढ़ साल पहले 194 करोड़ की रुपये आरडीएसएस योजना को मंजूरी मिल चुकी है।
लेकिन, अभी तक टेंडरिंग प्रक्रिया ही पूरी नहीं हो पाई है। इससे अभी तक काम शुरू ही नहीं हुआ है। इससे विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। वहीं, लोगों में भी रोष व्याप्त है।
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शहर में आए दिन किसी न किसी एलटी लाइन, फीडर अथवा बिजली ट्रांसफार्मर में फाल्ट आने से शहरवासियों को कई कई घंटे बिना सुविधा के गुजारने पड़ रहे हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए सरकार की तरफ से लगभग डेढ़ साल पहले केंद्र प्रायोजित पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) के तहत करीब 194 करेाड़ रुपये की लागत से पहले चरण के काम को मंजूरी दी गई थी।
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लेकिन, लंबा अरसा गुजरने के बाद भी जमीनी स्तर पर योजना का काम आगे नहीं बढ़ पाया है। जिले में मौजूदा समय में करीब 1.50 लाख बिजली कनेक्शन हैं, जिसमें से 39 हजार शहर में है।
योजना के तहत विभाग की ओर से यह होना है कार्य
विभाग की ओर से इस योजना के तहत जिलेभर में ट्रांसफार्मर, एलटी लाइन, पुराने तार, ग्रिड स्टेशन अपग्रेडेशन के साथ ही नए खंभे, 11केवीए फीडर, 100 वाट की क्षमता वाले ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाई जानी है। 27 किलोमीटर लंबी नई 11 केवीए लाइन डालने के साथ ही 460 बड़े नए ट्रांसफार्मर लगाए जाएंगे। 40 किलोमीटर तक एबीसी लाइन के तार बिछाने के साथ ही पुराने एलटी तारों को बदलकर 300 किलोमीटर तक नए तार डाले जाएंगे। जिले में 100 वाट वाले ट्रांसफार्मरों की क्षमता को बढ़ाकर 250 वाट की जाएगी। 250 वाट के ट्रांसफार्मरों की क्षमता 400 वाट और 400 वाट वाले ट्रांसफार्मरों की 630 वाट की जाएगी। दूरदराज के क्षेत्रों में 15 हजार खंभे लगाने के साथ ही ग्रिड स्टेशनों के पुराने उपकरणों को बदला जाना है।
बिजली कटौती का शेड्यूल तो पता है लेकिन बार-बार असमय फाल्ट के कारण अधिक समस्या उठानी पड़ती है। विभागीय कर्मचारियों द्वारा फाल्ट को ठीक करके कुछ राहत तो दिलाई जाती है लेकिन कुछ समय के बाद समस्या दोबारा से शुरू हो जाती है।
-जुगल किशोर, स्थानीय निवासी
बिजली ढांचा पुराना होने के कारण बार बार फाल्ट आने की समस्या पेश आ रही है। थोड़ी सी हवा चलने अथवा मौसम में हल्की खराबी आने पर ही शहर के अधिकतर इलाकों में बिजली गुल हो जाती है और लोगों को कई कई घंटे बिना बिजली के परेशान होना पड़ता है। इसके लिए बिजली ढांचे को मजबूत करने की सख्त जरूरत है।
-अंकित शर्मा, स्थानीय निवासी
शहर में बिजली कटौती तो ग्रामीण इलाकों में लो वोल्टेज की समस्या, खंभों की कमी जैसी कई समस्याएं जिलावासियों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं। शहर में भी तारों और बिजली ट्रांसफार्मरों को अपग्रेड करने अथवा बदलने की जरूरत काफी ज्यादा है। बिजली ढांचा काफी पुराना है और इसे अब अपग्रेड करने की जरूरत है।
-शंकर चंद, स्थानीय निवासी
खंभो पर आग लगना अथवा तारे टूटने जैसी घटनाएं आम हो चली हैं। इसका बडा कारण यह भी है कि यहां बिजली ढांचा काफी पुराना है। कई दशक बीच जाने के बाद भी इसे अभी तक अपग्रेड नहीं किया गया है। जबकि पहले के मुकाबले शहर और ग्रामीण इलाकों में जनसंख्या बढ़ने के साथ ही बिजली कनेक्शन की संख्या में भी काफी ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। इसलिए बिजली ढांचे को भी अपग्रेड करने की जरूरत है।
-गुरवचन सिंह, स्थानीय निवासी
उधमपुर में बिजली ढांचे की मजबूती के लिए केंद्र प्रायोजित पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) के तहत करीब 194 करेाड़ रूपए के पहले चरण के काम की मंजूरी मिल चुकी है। उधमपुर में एनटीपीसी को इस काम की जिम्मेदारी मिली है। टेंडरिंग प्रक्रिया को लेकर काम चल रहा है। उम्मीद है इस साल के अंत तक इस पर काम शुरू हो जाएगा।
-सुनील दत्त पंडोह, एक्सईएन, पीडीडी, उधमपुर